महाकुंभ:पाकिस्तान की शैली में बनाए गए चार अस्थायी गांव

महाकुंभ:पाकिस्तान की शैली में बनाए गए चार अस्थायी गांव
कुंभ में एकदम किनारे टीले पर ये गांव बसे हैं। इनमे देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए सिंधी भाई रुके हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भी दो सौ श्रद्धालुओं के आने का भी कार्यक्रम है।

कुंभ में एकदम किनारे टीले पर ये गांव बसे हैं। इनमे देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए सिंधी भाई रुके हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भी दो सौ श्रद्धालुओं के आने का भी कार्यक्रम है।

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इलाहाबाद। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेले महाकुंभ में पाकिस्तान के चार गांव भी दिखाई दे रहे हैं। इनमें शामिल एक गांव ब्रसलीन टेऊराम जी महाराज की जन्म स्थली खंडू ग्राम है। इनमें कुछ पर्ण कुटिया पाकिस्तान के उन गांव की शैली की है जहां सिंधी संत रहते थे।

कुंभ में एकदम किनारे टीले पर ये गांव बसे हैं। इनमे देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए सिंधी भाई रुके हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भी दो सौ श्रद्धालुओं के आने का भी कार्यक्रम है। इस आयोजन में शामिल रामटेक चंदानी ने बताया कि साल 1926 में प्रेम प्रकाश पंथ के आचार्य स्वामी टेउंराम जी महाराज ने श्री प्रेम प्रकाश अन्न क्षेत्र छावनी लगाने की शुरुआत की थी।

कुंभ में सिंध प्रदेश के किसी संत संप्रदाय की यह पहली छावनी थी। उसी साल 1926 में चैत्र मेला आयोजित करने की परंपरा भी शुरू हुई थी। इसके बाद से सिंध प्रांत का शिविर सभी कुंभ में लगातार लग रहा है। सेक्टर 12 में गंगा तट और टीले पर चार गांव बसाए गए हैं, जिनमें अमरापुर धाम के अतिरिक्त खंडू, भिट्टशाह और चक गांव है। ये तीनों गांव टीले पर बसे हैं।

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