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यहां तोप-नगाड़ों से सहरी-इफ्तारी की इत्तला!

यहां तोप-नगाड़ों से सहरी-इफ्तारी की इत्तला!

रायसेन मध्यप्रदेश ही नहीं देश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां रमजान में रोजा इफ्तारी और सहरी का संकेत तोप चलाकर और नगाड़े बजाकर दिया जाता है।

रायसेन मध्यप्रदेश ही नहीं देश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां रमजान में रोजा इफ्तारी और सहरी का संकेत तोप चलाकर और नगाड़े बजाकर दिया जाता है।

रायसेन मध्यप्रदेश ही नहीं देश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां रमजान में रोजा इफ्तारी और सहरी का संकेत तोप चलाकर और नगाड़े बजाकर दिया जाता है।

    रायसेन। रमजान के पाक महीने में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे रायसेन जिला मुख्यालय पर तोप की गर्जना के साथ मुस्लिम समुदाय के लोग सहरी ओर रोजा इफ्तारी करते है। देश में अपनी तरह की यह अनूठी परंपरा है।

    कहा जाता है कि हिंदुस्तान में यह परंपरा कभी नवाबी क्षेत्र रहे रायसेन में अभी भी कायम है और जिला कलेक्टर द्वारा तोप चलाने ओर बारूद खरीदने की विधिवत लिखित अनुमति मुस्लिम त्यौहार कमेटी को रमजान महीने में सीमित समयावधि के लिए दी जाती है।

    रायसेन जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक किले की पहाड़ी पर एक नियत स्थान है जहां रमजान माह शुरू होने के एक दिन पहले प्रशासन की अभिरक्षा में रखी तोप को मुस्लिम त्यौहार कमेटी के सदस्य लेकर जाते हैं। तोप चलाने के लिए प्रशिक्षित तोपची ही नियुक्त किए जाते हैं।

    रायसेन मध्यप्रदेश ही नहीं देश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां रमजान शरीफ में रोजा इफ्तारी और सहरी का संकेत तोप चलाकर दिया जाता है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि तोप की गर्जना सुनकर आसपास के लगभग 50 गांव के लोग रोजा खोलते हैं।

    एडवोकेट रेहान खान ने बताया कि भोपाल स्टेट के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह खान द्वारा यह तोप रायसेन के मुसलमानों को दान में दी गई थी। इस तोप में लगभग दो सौ ग्राम बारूद का प्रयोग किया जाता है। रियासत के नवाबी शासन काल से ही रायसेन में रमजान माह में तोप ओर सहरी का संकेत देती आ रही है।

    जिला प्रशासन के अनुसार तोप का पहला लाइसेंस सबसे पहले साल 1956 में तत्कालीन कलेक्टर बदरे आलम ने जारी किया था जो आज भी जीवित हैं। हर साल में रमजान माह में जिला प्रशासन द्वारा परंपरागत तरीके से तोप चलाने और बारूद देने की अनुमति प्रदान की जाती है। प्रशासन भी इसे देश की अनूठी परंपरा मानता है। कलेक्टर ने बताया कि रमजान माह के बाद इस तोप को विधिवत कलेक्ट्रेट के मालखाने में जमा करा दी जाती है।

    इस प्रकार रायसेन जिला मुख्यालय पर रमजान माह में अलसुबह होने वाली सहरी की सूचना नगाड़ा बजाकर देने की भी यहां अनूठी परंपरा है। यहां पांच सौ फीट ऊंची किले की पहाड़ी से रात के सन्नाटे को चीरती नगाड़ों की आवाजों से आसपास के लगभग पचास गांव के रोजेदारों को जगाया जाता है। नगाड़े मध्यरात्रि लगभग ढाई बजे से बजाए जाते हैं।

    इन्हे मुस्लिम त्यौहार कमेटी द्वारा नियुक्त लोगों द्वारा बजाया जाता है। सहरी का समय शुरू होने के साथ ही नगाड़ों की आवाज थम जाती है और रोजा रखने का समय शुरू होने का संकेत हो जाता है। इसके अलावा इंतजार ईद का चांद दिखने के साथ ही उस दिन विशेष रूप से लगभग दस बार तोप चलाकर चांद दिखने का संकेत दिया जाता है।

    Tags: मध्य प्रदेश, रायसेन

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