विदेशियों को खूब भा रही हैं मुंबई की झुग्गियां, एक रात के लिए दे रहे हैं 2280 रुपये का किराया

(Image/Facebook)

(Image/Facebook)

खार स्थित स्लम होम-स्टे में एक रात का किराया 31 अमरीकी डॉलर यानी 2280 रुपये है. स्लम में ही रहने वाले रवि संसी ने करीब एक साल पहले इसकी शुरुआत की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 5, 2018, 8:24 PM IST
  • Share this:

अगर आप उन लोगों में से हैं जो सुख-सुविधाओं से भरी जिंदगी से ऊब चुके हैं और अपने कंफर्ट जोन से बाहर आना चाहते हैं तो अपना पॉश फ्लैट या बंगला छोड़कर कुछ दिनों तक मुंबई की स्लम में रह सकते हैं. जिंदगी में नयापन तलाश रहे लोगों और भारत घूमने आए विदेशियों को 'स्लम होमस्टे' का कंसेप्ट इन दिनों खूब लुभा रहा है.

स्लमडॉग मिलेनियर की तरह कई विदेशी फिल्मों में अक्सर भारत को एक गरीब, झुग्गी-झोपड़ियों से भरा हुए ऐसे देश के रूप में दिखाया जाता है, जहां अब तक कोई विकास नहीं हुआ है. ऐसे में कई विदेशी यहां झुग्गियों में जिंदगी का अनुभव लेने आ रहे हैं.

खार स्थित स्लम होम-स्टे में एक रात का किराया 31 अमरीकी डॉलर यानी 2280 रुपये है. करीब एक साल पहले इसकी शुरुआत स्लम में रहने वाले रवि संसी ने की. 'स्लम होटल' के मालिक संसी ने अपने घर का एसी और टीवी से लैस एक हिस्सा कमरे में तब्दील कर दिया है.



https://www.facebook.com/media/set/?set=a.128157584537529&type=1&l=d1083f62ea
यहां उनके फेसबुक पेज पर कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसकी दिवारों का उधड़ा हुआ पेंट और कम्यूनल बाथरूम आपको झुग्गियों का असली अनुभव कराएंगे.

इस आईडिया को अमली जामा पहनाने की कोशिश की नीदरलैंड के डेविड ने, जो इंटरनेट के जरिए रवि के संपर्क में आए और एक एनजीएओ के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस तरह के 'होटल' किसी गरीब परिवार के लिए आय का स्त्रोत हो सकता है.हालांकि यहां कई लोग इस स्लम होमस्टे के कंसेप्ट का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस कंसेप्ट से दुनिया में भारत की गलत छवि बनाई गई है. हकीकत में भारत इससे बहुत अलग है. झुग्गी-झोपड़ियां और स्लम भारत का एक हिस्सा है, लेकिन पूरा भारत ऐसा नहीं है.सोशल मीडिया पर भी इस पहल को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. लोगों का कहना है कि गरीबी सांस्कृतिक धरोहर नहीं, जिसे लोगों के साथ बांटा जाए. जो लोग स्लम में रहकर जाएंगे, वे अपने देश जाकर यही कहेंगे कि पूरा भारत ही झुग्गियों से बना है. ये गलत धारणाओं को और पुख्ता करने जैसा है.

यह पहला मौका नहीं, जब कलाकारों और उद्यमियों को इस तरह के विवादास्पद आईडिया के लिए आलोचनाओं का सामाना करना पड़ रहा है. हाल ही में एक फोटोग्राफर को भी इस तरह की आलोचना का सामना करना पड़ा था जब उसने 'fake food in front of real, starving people' नाम से तस्वीरों की एक सीरीज शुरू की थी.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज