AN-32 में खोए एयरफोर्स सैनिकों की तलाश जारी, जानिए कैसा है परिजनों का हाल

AN-32 के पायलट आशीष तंवर की पत्नी संध्या तंवर उस वक्त हवाई ट्रैफिक कंट्रोल ड्यूटी पर थीं (फाइल फोटो)

AN-32 के पायलट आशीष तंवर की पत्नी संध्या तंवर उस वक्त हवाई ट्रैफिक कंट्रोल ड्यूटी पर थीं (फाइल फोटो)

AN-32 पर सवार एयरफोर्स के सैनिकों के अलावा नंदादेवी में हुए हिमस्खलन में खोए पर्वतारोहियों के परिवार वाले भी उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं.

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AN-32 एयरक्राफ्ट के अचानक से राडार से गायब हो जाने का मामला हो या फिर नंदा देवी से 8 पर्वतारोहियों का गायब हो जाना. दोनों ही मामले में लापता लोगों के लिए खोजी अभियान जारी हैं. और दोनों में ही अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है. ऐसे में इन सभी के परिजनों में बेचैनी है और उम्मीद का दामन थामे परिवार दुआएं कर रहे हैं.

चाहे AN-32 एयरक्राफ्ट पर सवार एयरफोर्स के सैनिक हों या नंदा देवी पर पर्वतारोहण के लिए गए 8 लोग. इनका कोई भी सुराग अभी तक नहीं लग सका है. दोनों ही मामलों में खोए लोगों के परिवारों में उनके न मिलने से बेचैनी है. हालांकि परिवारों ने अभी आशा नहीं खोई है और वे अपने घरवालों के लौटने की दुआएं कर रहे हैं.

पिथरौगढ़ के हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे आठ पर्वतारोही

AN-32 एयरक्राफ्ट अचानक से राडार से गायब हो गया था. जबकि नंदादेवी पूर्वी चोटी को फतह करने के प्रयास के दौरान 8 लोग पिथौरागढ़ के हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे. दोनों ही मामलों में लोगों के बचने की संभावनाएं कम बताई जा रही हैं. दावा यह भी किया गया है कि पिथौरागढ़ मामले में आठ में से पांच पर्वतारोहियों के शव भी देखे गए हैं.
हिम स्खलन में मारे गए पर्वतारोहियों के शरीर



पिथौरागढ़ की घटना मंगलवार को हुई थी. इसमें चार साथियों को बचा लिया गया था. ये विदेशी नागरिक आंखों में आंसू लिए अपने देशों के लिए रवाना हो चुके हैं. वहीं अरुणाचल में AN-32 एयरक्राफ्ट की खोज का अभियान गुरुवार शाम को खराब मौसम के चलते कुछ देर रुका था लेकिन इसे फिर से शुरू कर दिया गया है.

स्थानीय लोग भी जुटे AN-32 की खोज में

AN-32 को खोजने के लिए वायुसेना ने स्थानीय लोगों और पुलिस एजेंसियों को भी शामिल कर लिया है. यहां तक कि लापता विमान को खोजने के लिए सैटेलाइट और दूसरे एडवांस तरीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. इनके अलावा एसयू- 30, सी130 जे विमानों को भी इसकी खोज में लगाया गया है. रात में भी एयरफोर्स ने अपने खोजी ऑपरेशन बंद नहीं किए हैं, उनके विमान रात के अंधेरे में भी उड़कर लापता विमान को खोज रहे हैं.

सर्च ऑपरेशन में कई एडवांस तकनीकों का हो रहा प्रयोग

यह एक सुदूर इलाका है और यहां मौसम भी जल्दी-जल्दी बदलता रहता है. ऐसे में वायुसेना के चार एमआई-17 हेलिकॉप्टर्स, तीन एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर्स को तैनात किया है. इनके अलावा दो सुखोई-30 एयरक्राफ्ट, एक सी130 ट्रांसपोर्टर एयरक्राफ्ट और एक मानवरहित एरियल व्हीकल को तैनात किया है. यही नहीं सेना ने शुक्रवार सुबह से दो चीता हेलिकॉप्टर को भी सर्च मिशन में शामिल कर लिया है.

ग्रामीणों का दावा पर्वत से उठते देखा धुंआ

इसके अलावा अरुणाचल के 3-4 स्थानीय नागरिकों की एक टीम को भी इस खोजी अभियान में लगाया गया है. ये लोग तुम्बिन गांव के पास 'बायर आदि' पर्वत श्रंखला, मोलो गांव के पास 'परी आदि' पर्वत श्रंखला और मोलो और तुम्बिन के बीच 'सिबिर-विरगांग आदि' पर्वत श्रंखला के बीच विमान की तलाश कर रहे हैं. इस बीच तुम्बिन गांव के 3 ग्रामीणों ने दावा किया है कि उन्होंने सोमवार को एक पर्वत से घना काला धुंआ उठते देखा था.

पत्नी के सामने राडार से गायब हुआ था एयरक्राफ्ट

AN-32 के पायलट आशीष तंवर की पत्नी संध्या तंवर उस वक्त ट्रैफिक कंट्रोल ड्यूटी पर थीं, जिस वक्त उनकी आंखों के सामने से ही यह एयरक्राफ्ट रडार से गायब हो गया. यह विमान मेचुका के जंगलों में जा रहा था. विमान पर 12 अन्य लोग सवार थे. संध्या एयर ट्रैफिक कंट्रोल की अधिकारी हैं और सबसे पहले उन्हें ही एयरक्राफ्ट के गायब होने का पता चला था. संध्या और आशीष की शादी पिछले साल ही हुई है. आशीष ने 2013 में एयरफोर्स ज्वाइन की थी.

एयरफोर्स सैनिकों के परिवार खोजी अभियान में चाहते हैं और तेजी

AN-32 पर सवार वायुसेना के सैनिकों में बलिया के सूरज सिंह भी थे. बलिया जिला मुख्यालय से तकरीबन 40 किमी दूर स्थित शोभा छपरा गांव में विमान लापता होने की सूचना के बाद से बेचैनी का माहौल है. उनके भाई विक्रांत सिंह ने बताया कि उन्हें एयरक्राफ्ट के लापता होने की ख़बर जोरहाट एयरबेस से तीन जून की शाम को मिली थी. सूरज के पिता विनोद सिंह किसान हैं. उनके परिवार को चमत्कार होने और सकुशल वापसी की पूरी आशा है. इसी 19 फरवरी को सूरज की शादी हुई थी और वे 15 दिनों की छुट्टी बिताकर पिछले महीने की 24 तारीख को ही जोरहाट स्थित वायुसेना यूनिट गए थे.

फ्लाइट लेफ्टिनेंट मोहित गर्ग की वापसी का भी उनके परिवार को भरोसा है. उनके पिता सुरिंदरपाल गर्ग और उनके चाचा ऋषिपाल गर्ग असम रवाना हो चुके हैं. मोहित की शादी भी बस एक साल पहले हुई थी. एयरफोर्स सैनिकों के परिवार खोजी अभियान में और तेजी चाहते हैं.

पहले भी इस पिता ने AN-32 के हादसे में खोया था अपना बेटा

विमान के लापता होने के बाद पुणे के 62 साल के राजेंद्र बारपट्टे को एक बार फिर दुख का सामना करना पड़ रहा है. उनके बेटे भी वायुसेना के अधिकारी थे जो एक AN-32 एयरक्राफ्ट में सवार थे जो करीब तीन साल पहले लापता हो गया था. उस विमान में 29 लोग थे. जुलाई, 2016 में यह विमान चेन्नई एयरपोर्ट से उड़ा था और बंगाल की खाड़ी में लापता हो गया था. उनके 27 साल के बेटे कुणाल इस एयरक्राफ्ट में बतौर नेविगेटर सवार थे. काफी खोज के बाद भी इसका पता नहीं लगाया जा सका था. इसके बाद उन्हें कई महीनों बाद वायुसेना की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ने कहा था कि अब एयरक्राफ्ट में सवार लोगों के बचने की कोई संभावना नहीं है.

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