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वो 5 बातें जो नरेंद्र मोदी को गुजरात के राजनीतिक मैदान में बनाती हैं ‘अजेय’

27 सालों में नरेंद्र मोदी 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और उसके बाद 8 साल से वह देश के प्रधानमंत्री हैं. (फाइल फोटो)

27 सालों में नरेंद्र मोदी 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और उसके बाद 8 साल से वह देश के प्रधानमंत्री हैं. (फाइल फोटो)

Gujarat: 1 दिसंबर को गुजरात में पहले चरण का मतदान है. ऐसे में न्यूज18 ने भाजपा के वरिष्ठ अधिकारियों से समझने की कोशिश क ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

27 सालों में मोदी 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और उसके बाद 8 साल से वह पीएम हैं.
इस बार के चुनाव में भी नरेंद्र मोदी नाम ही वह जादू है जो भाजपा के लिए काम कर रहा है.
यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस राज्य में उनके नाम का सिक्का चलता है.

रिपोर्ट- मारिया शकील/अमन शर्मा

अहमदाबाद. गुजरात में भाजपा के 27 साल लंबे शासन में अगर कोई बात नहीं बदली है तो वह है नरेंद्र मोदी का अपने घरेलू राज्य में अजेय रहना. इन 27 सालों में नरेंद्र मोदी 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और उसके बाद 8 साल से वह देश के प्रधानमंत्री हैं. यहां तक कि इस बार के चुनाव में भी मोदी नाम ही वह जादू है जो भाजपा के लिए काम कर रहा है. गुजरात में प्रधानमंत्री को लेकर यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस राज्य में उनके नाम का सिक्का चलता है.

गुरुवार यानी 1 दिसंबर को गुजरात में पहले चरण का मतदान है. ऐसे में न्यूज18 ने भाजपा के वरिष्ठ अधिकारियों से समझने की कोशिश की कि गुजरात मॉडल के आखिर वह कौन से 5 स्तंभ हैं जिसके दम पर मोदी की सत्ता का शामियाना आज तक टिका हुआ है, और जो मतदाताओं को भाजपा से कहीं और डिगने नहीं देता है. लोगों के लिए लंबे वक्त से चले आ रहे उन लाभों में गांव-गांव तक नर्मदा का पानी पहुंचना, दो दशकों से व्याप्त शांति और सुरक्षा, उच्च साक्षरता दर के लिए शिक्षा का बुनियादी ढांचा, डेयरी क्षेत्र को समर्थन, और उच्च गुणवत्ता वाला पर्यटन सर्किट शामिल है. पूरे गुजरात में कहीं भी चले जाएं, यह वह मुद्दे हैं जिनके दम पर लोग मोदी के नाम पर भाजपा को वोट देना जारी रखे हुए हैं. तो क्या इस बार भी यानी 2022 के चुनाव में भी यह तरीका कारगर होगा?

नर्मदा जल

यह मोदी ही थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण इरिगेशन योजना लागू करके गुजरात में पानी की कमी और सूखे की समस्या का निराकरण किया था. यह योजना खासतौर पर सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र के लिए लाभदायक रही. इस योजना के तहत सौराष्ट्र क्षेत्र में 1370 किमी लंबी पानी की पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है और करीब 1150 किमी लंबी पाइपलाइन का कार्य प्रगति पर है. इसकी बदौलत सौराष्ट्र और कच्छ के कोने कोने में नर्मदा का पानी पहुंचा और करीब दस लाख एकड़ से ज्यादा जमीन के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध हो सका. 2014 से गुजरात बजट में इस योजना के लिए करीब 10000 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं. यही योजना है जिसकी वजह से सौराष्ट्र और कच्छ के इलाकों में एक मटका पानी के लिए मीलों पैदल जाने वाली महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ.

नर्मदा नहर अब कई शाखा नहरों और उप-नहरों की श्रृंखला बन चुकी है जो कुल मिलाकर 17 जिलों में 71,748 किमी तक पहुंचती है. प्रधानमंत्री के तौर पर भी उन्होंने इस परियोजना पर ध्यान दिया और हाल ही में गुजरात में कच्छ शाखा नहर का उद्घाटन किया जो पश्चिम गुजरात के अंतिम छोर तक नर्मदा जल पहुंचाती है. यह जगह मध्य गुजरात से 750 किमी से भी ज्यादा दूर है. इसके अलावा सरदार सरोवर बांध 3000 से ज्यादा गांवों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराता है, जिसके तहत गुजरात के 15 जिलों में 73 तालुकाओं की 18.45 लाख हेक्टेयर भूमि लाभ पा रही है. गुजरात के करीब 4 करोड़ से ज्यादा लोगों तक पीने का पानी पहुंच रहा है. यही नहीं 2019 में प्रधानमंत्री की ‘नल से जल योजना’ की बदौलत गुजरात के हर घर में पीने का पानी पहुंच रहा है.

शिक्षा मॉडल

गुजरात की साक्षरता दर 2021 में 82.5 फीसद थी. 2001 में जब मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला तब यह दर 69 फीसद पर थी. इसके पीछे की वजह है राज्य में 55,000 हजार के करीब स्कूलों का विशाल नेटवर्क और पिछले एक दशक में गुजरात में उच्च और उच्चतर शिक्षा में छात्रों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होना. न्यूज18 के साथ साझा किए गए आंकड़े बताते हैं कि 2001 में गुजरात में उच्च और उच्चतर माध्यमिक में दाखिला लेने वाले बच्चों की संख्या 17 लाख थी. जो 2021 में बढ़कर 21 लाख तक पहुंच चुकी है. यहीं नहीं बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर में भी अच्छी खासी कमी दर्ज की गई है.

आंकड़े बताते हैं कि गुजरात के स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई छोड़ने की दर 2001 में प्राथमिक में 25 फीसद, उच्च प्राथमिक में 52 फीसद, और माध्यमिक में 70 फीसद थी. यह दर घटकर 2021 में प्राथमिक में महज 1 फीसद, उच्च प्राथमिक में 4.5 फीसद और माध्यमिक में 23 फीसद रह गई है. अधिकारियों का कहना है यह आंकड़े काफी स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं. यही नहीं बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित और केंद्रित करने वाली योजनाओं ने स्थिति में सुधार करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है.

भाजपा यह भी बता रही है कि किस तरह गुजरात में विश्वविद्यालयों की संख्या जो 2001 में 21 थी 2022 तक बढ़कर 103 हो चुकी है. और कॉलेज 775 से 3,117 के आंकड़ों को पार कर चुके हैं. मोदी की शुरू की हुई योजनाएं जैसे विद्यालक्ष्मी बॉन्ड योजना, कन्या केलवानी रथ यात्रा योजना, अन्न त्रिवेणी योजना और हाल ही में लागू हुई वहली डिक्री योजना, और मुख्यमंत्री युवा स्वावलंबन योजना ने राज्य में शिक्षा की बढ़ोतरी में अहम भूमिका निभाई है. वहीं गुजरात देश का पहला राज्य बन चुका है जिसने नई शिक्षा नीति को लागू किया है.

शांति और सुरक्षा

दंगा नहीं, स्थिर कानून व्यवस्था और आंतकवाद मुक्त माहौल, यह वह स्थिति है जिसने गुजरात में लोगों को भाजपा की ओर आकर्षित किया है. इस वजह से ही चुनाव के दौरान गुजरात में सत्ता विरोधी माहौल नहीं बन पाया है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस बार के चुनाव अभियान में इस बात का खास जोर दिया है कि किस तरह राज्य के युवाओं ने पिछले 20 सालों में कोई दंगा नहीं देखा है. राज्य भर में बड़े बड़े होर्डिंग के जरिए भाजपा लोगों को सुरक्षा और शांति थीम के जरिए आकर्षित कर रही है. मोदी ने अपने भाषणों में भी सूरत और अहमदाबाद में पहले हुए बम धमाकों का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह उस समय की यूपीए सरकार ने उनका सहयोग नहीं किया था और कांग्रेस आतंकवाद को लेकर नरम रवैया अपनाती रही है.

डेयरी क्रांति

आज भारत की कुल दूध आपूर्ति का 1/5वां हिस्सा गुजरात पूरा करता है. मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने सहकारी मॉडल गांव की अवधारणा बनाई और राज्य में पशुपालन क्षेत्र के विकास पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया. गुजरात में इस क्षेत्र की बदौलत 35 लाख दुग्ध उत्पादकों और अन्य 10 लाख श्रमिकों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है. 2020-21 में इसका टर्नओवर 39,000 करोड़ रुपये था, जो आने वाले वर्षों में 46,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.

गुजरात का डेयरी नेटवर्क इसलिए भी सराहनीय है क्योंकि इसकी पूरी प्रक्रिया में कोई बिचौलिया या दलाल नहीं है. 70 फीसद से ज्यादा ग्राहकों से प्राप्त होने वाला पैसा सीधे किसानों की जेब में जाता है, जिनमें से अधिकांश महिलाएं हैं. भारत की सबसे बड़ी दुग्ध सहकारी संस्था अमूल भी गुजरात के आणंद में ही स्थित है. कच्छ क्षेत्र की बन्नी प्रजाति की भैंस यहां की सफलता की कहानी बयां करती है. यह भैंस अपने उत्पादन और वातावरण सहने की क्षमता के लिए जानी जाती है. मोदी ने भी 15 दिसंबर 2020 को अपनी कच्छ यात्रा के दौरान इस नस्ल का उल्लेख किया था.

गुजरात में 35 लाख दुग्ध उत्पादकों में से 36 फीसद, करीब 12.5 लाख-किसान महिलाएं है. यही एक अहम वजह है कि गुजरात में महिलाओं का भाजपा को समर्थन मिलता है. प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने डेयरी क्षेत्र की एक बड़ी समस्या के समाधान के लिए पशुओं के सार्वभौमिक टीकाकरण पर भी जोर दिया है. गुजरात मुख्यमंत्री गौ पोषण योजना डेयरी किसानों के लिए एक सफल योजना साबित हुई है. डेयरी क्षेत्र के लिए मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल में मोदी का स्थापित बुनियादी ढांचे की सफलता का डंका आज भी मतदाताओं के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में गूंजता है.

पर्यटन क्षेत्र

गुजरात आज भारत के सर्वाधिक चर्चित पर्यटन क्षेत्रों में शुमार है. इसके पीछे मोदी का योगदान है, उनकी दूर दृष्टि और दिशाओं की बदौलत ही, यह संभव हो सका. कच्छ के रण से लेकर केवडिया में भीड़-खींचने वाली ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ तक, द्वारका-सोमनाथ-अंबाजी का मंदिर सर्किट और सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव में दुनिया का सबसे बड़ा नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम. 2006 में मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘रण उत्सव’ जो धोरडो में 100 दिनों के उत्सव में बदल चुका है और हर साल भारत और विदेशों से 4-5 लाख पर्यटकों की मेजबानी करता है. यह सब वह बातें है जिसने गुजरात को पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी बनाया है.

सीमा पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से नदाबेट में भारत-पाकिस्तान सीमा व्यू पाइंट को ‘गुजरात के वाघा’ के रूप में विकसित किया गया है. अप्रैल 2022 में गृह मंत्री अमित शाह ने इसका उद्घाटन किया था. इसके अलावा, मोटेरा, अहमदाबाद में 93 लाख वर्ग फुट में निर्मित सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव राज्य के लिए गुजरात ओलंपिक मिशन शुरू करने और 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने के उद्देश्य से वर्ल्डक्लास स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में एक पहल है.

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इस पूरे प्रोजेक्ट पर 4,600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. स्पोर्ट्स एन्क्लेव में एक इंडोर स्पोर्ट्स एरिना, एक्वेटिक्स सेंटर, वेलोड्रोम, एथलेटिक्स गांव शामिल होंगे और भविष्य में अहमदाबाद बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम और अहमदाबाद मेट्रो को भी स्पोर्ट्स एन्क्लेव तक विस्तारित किया जाएगा ताकि क्षेत्र में आने-जाने के लिए परिवहन आसान हो जाए.

Tags: Assembly election 2022, Gujarat Assembly Elections, PM Modi

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