गुजरात निकाय चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत, जानिए क्या रहे कारण

अहमदाबाद में पार्टी की जीत का जश्न मनाते बीजेपी के कार्यकर्ता. (तस्वीर PTI)

अहमदाबाद में पार्टी की जीत का जश्न मनाते बीजेपी के कार्यकर्ता. (तस्वीर PTI)

Gujarat Local Elections Results 2021: बीजेपी की जबरदस्त जीत पर पार्टी मुख्यालय कमलम पर पटाखे फोड़े गए और आह्लादित मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि 2010 की तरह जनता ने सूद समेत प्यार वापस लौटाया है.

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नई दिल्ली. गुजरात के सभी नगर निगमों पर कब्जा करने के बाद बीजेपी की लहर स्थानीय निकाय चुनाव में भी देखने को मिली है. 2015 में जिला और तहसील पंचायतों में बीजेपी का प्रदर्शन ठीक नहीं था, लेकिन इस बार पार्टी ने परचम लहरा दिया है. बीजेपी की जीत पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि जनता ने सूद समेत प्यार वापस लौटाया है. कांग्रेस का प्रदर्शन दयनीय रहा है और कई जगहों पर पार्टी खाता तक नहीं खोल पाई है. वहीं आम आदमी पार्टी ने 38 सीटों पर जीत दर्ज की है. बीजेपी की प्रचंड जीत का अनुमान कांग्रेस के प्रदर्शन से होता है.

चुनाव नतीजों में बीजेपी का बोलबाला
2021 के चुनाव नतीजों की बात करें तो 2 मार्च को शाम 5 बजे तक बीजेपी ने 31 जिला पंचायतों की 980 सीटों में से 735 सीटें जीतकर सभी 31 जिला पंचायतों पर कब्जा किया है. वहीं 231 तहसील पंचायत की 4,774 सीटों में से 3013 सीटें जीतकर 230 तहसील पंचायतों पर पार्टी ने कब्जा किया है. 81 नगरपालिकाओं की 2720 सीटों में से बीजेपी ने 1967 सीटें जीतकर 80 नगरपालिकाओं पर कब्जा किया है. वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी स्थानीय निकाय चुनावों में 38 सीटें जीती हैं.

बीजेपी ने एंटी इनकंबेंसी को दी मात
गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष सीआर पाटिल इस बार एक नया फॉर्मूला लेकर आए थे. सीआर पाटिल पन्ना प्रमुख के अपने मिशन को सही तरीके से जमीन पर उतारने में कामयाब रहे. बीजेपी के दावे के मुताबिक तकरीबन ढाई करोड़ लोग बीजेपी के पन्ना प्रमुख की मुहिम से जुड़े हुए हैं और उन्होंने बीजेपी के समर्थन में वोट कराने में अहम भूमिका अदा की. एंटी इनकंबेंसी को खत्म करने के लिए सीआर पाटिल एक नया फंडा लेकर आए थे.



टिकट बंटवारे की तीन शर्तें
बीजेपी की नई रणनीति के मुताबिक इस बार फैसला लिया गया था कि 3 टर्म से ज्यादा चुनाव लड़े व्यक्तियों को टिकट नहीं दिया जाएगा. जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है, उन्हें भी टिकट नहीं मिलेगा. तीसरा जिनके परिवार में कोई सांसद, विधायक है, उसके परिवार में भी किसी व्यक्ति को टिकट नहीं मिलेगा. ऐसे में बीजेपी ने युवा कार्यकर्ताओं को टिकट दिए और एंटी इनकंबेंसी को हराने में कामयाब रही. बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस अपने पुराने अंदाज में ही चुनाव लड़ती आई, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा.

कांग्रेस का दयनीय प्रदर्शन
पेटलाद से कांग्रेस विधायक निरंजन पटेल ने अपने ही चुनावी इलाके में नगर पालिका के चुनाव में हिस्सा लिया था, जिन 2 वार्डों में उन्होंने उम्मीदवारी दर्ज कराई थी, उन दोनों वार्ड में उनकी करारी हार हुई. इतना ही नहीं उनके परिवार का एक भी सदस्य जीत हासिल नहीं कर सका. ऐसे ही खेडब्रह्मा के विधायक और कांग्रेस के चीफ व्हिप अश्विन कोटवाल के बेटे की भी करारी हार हुईं. तारापुर के कांग्रेस विधायक पूनम परमार के बेटे को भी हार का सामना करना पड़ा. द्वारका में कांग्रेस विधायक विक्रम माडम के बेटे को भी हार का स्वाद चखना पड़ा है. कांग्रेस के दिग्गज नेता अर्जुन मोढवाडिया के भाई भी परास्त हुए हैं. पूर्व मंत्री भरत सिंह सोलंकी और गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा अपने इलाकों में कांग्रेस को जिता नहीं सके.

कांग्रेस की हार के कारण
कांग्रेस की हार बताती है कि पार्टी में टिकटों का बंटवारा कैसे हुआ और जो ताकतवर विधायक हैं, वह भी अपना करिश्मा अपने ही इलाकों में नहीं दिखा सके. भारतीय ट्राइबल पार्टी के विधायक छोटू वसावा के बेटे को भी हार मिली है. जिला पंचायत सीट पर दिलीप बसावा को बीजेपी के उम्मीदवार पदमा वसावा ने 2 हजार वोटों से मात दी. बता दें कि बीटीपी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों ही पार्टियां आदिवासी और मुस्लिम इलाकों में कोई करिश्मा नहीं दिखा सकीं. हालांकि AIMIM ने मोडासा के एक छोटे से कस्बे में महज 9 सीटों पर जीत हासिल की है.

2015 में कांग्रेस के मुकाबले कमजोर थी बीजेपी
2015 के चुनाव में जिला पंचायतों में बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस मजबूत थी, 31 जिला पंचायतों में से 24 जिला पंचायतों पर कांग्रेस ने कब्जा किया था. बीजेपी के हिस्से सिर्फ 6 जिला पंचायत सीटें ही आई थीं. तहसील पंचायत में भी कांग्रेस को भारी बढ़त थी, 230 तहसील पंचायतों में से 132 तहसील पंचायतों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था, जबकि बीजेपी को 73 तहसील पंचायतों से संतोष करना पड़ा था. हालांकि नगर निगम की तरह नगरपालिकाओं में भी बीजेपी ने बाजी मारी थी और 56 में से 42 नगरपालिकाएं बीजेपी के पास थीं.

रूपाणी प्रसन्न, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा
बीजेपी की इस जबरदस्त जीत पर पार्टी मुख्यालय कमलम पर पटाखे फोड़े गए और कामयाबी से आह्लादित मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि 2010 की तरह जनता ने सूद समेत प्यार वापस लौटाया है. दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने पार्टी की हार की जिम्मेवारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि गलतियों से सबक लेंगे. कुछ दिन पहले 6 नगर निगमों पर कब्जा करने के बाद बीजेपी की इस जीत ने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में जबरदस्त हौसला भर दिया है.

गुजरात निकाय चुनाव के अब तक परिणाम (अपडेटेड, अंतिम नहीं)
TP                       DP                     NP
BJP           3322                   785                   2063
INC          1243                   167                   0385
IND          0115                   003                   0172
AAP         0031                   002                   0009
BSP          0004                   001                   0006
OTHERS  0016                   004                   0024
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