सूरत: कोविड वैक्‍सीन लगे बिना ही जारी हो गया वैक्‍सीनेशन सर्टिफिकेट, प्रशासन मौन

सूरत में बिना वैक्‍सीन लगे ही टीकाकरण का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर-AP)

COVID-19 Vaccination Certificate: सूरत में वैक्‍सीनेशन का एक अचंभित करने वाला मामला सामने आया है. यहां बिना वैक्‍सीन लगे ही टीकाकरण का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया.

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    सूरत. सूरत के सरकारी आरोग्य केन्द्र से कोविड-19 वैक्‍सीनेशन (COVID-19 Vaccination) का एक अचंभित करने वाला मामला सामने आया है. दरअसल, यहां के एक व्‍यक्ति का 13 मार्च को वैक्‍सीनेशन होना था लेकिन वह 9 मार्च को हरिद्वार चले गए. टीका न लगने के बावजूद उन्‍हें वैक्‍सीन की पहली डोज का प्रमाण पत्र भेज दिया गया. जब उन्‍हें पहली डोज की वैक्‍सीन का प्रमाण पत्र मिला तो वह चौक गए. इस मामले पर पूरे प्रशासन ने चुप्‍पी साध ली है. मामले पर किसी भी तरह की स्‍पष्‍टता देने से इनकार किया जा रहा है.

    बात दें कि सूरत के पांडेसरा विस्‍तार में रहने वाले सिंध परिवार के एक वृद्ध व्‍यक्ति हरिद्वार गए थे. इस बीच उन्‍हें एक प्रमाण पत्र मिला, जिसके अनुसार सूरत के बमरोली आरोग्‍य केंद्र में उनको कोरोना वैक्‍सीन की पहली डोज दी गई है. प्रमाण पत्र मिलने के बाद पूरा परिवार हैरान है.

    दरअसल, अनुप सिंह ने 10 मार्च को अपने पिता हरिभान सिंह और मां अन्‍नपूर्णा सिंह को कोरोना टीका लगवाने के लिए ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन कराया था. उन्‍हें टीकाकरण के लिए 13 मार्च की डेट दी गई थी. लेकिन इस बीच हरिभान सिंह हरिद्वार चले गए. जोकि अभी तक हरिद्वार से लौटे नहीं हैं और उनका टीकाकरण नहीं हो पाया है.

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    अनुप सिंह ने बताया कि उन्‍हें ऑनलाइन प्रमाण पत्र का मैसेज मिला. जिसमें लिखा था कि उनके पिता की अप्‍वाइमेंट थी और उन्‍हें कोरोना टीके की पहली डोज दी गई है. जब उन्‍होंने इस मामले में हेल्‍थ सेंटर में पूछताछ करने की कोशिश की तो पता चला कि वहां स्‍टॉफ के पास भी ऑनलाइन सर्टिफिकेट था. इस मामले में उन्‍हें हेल्‍थ सेंटर से भी कोई स्‍पष्‍ट जवाब नहीं मिल सका.

    इसी हेल्‍थ सेंटर में ऐसा ही एक और केस
    हालांकि सूरत महानगर पालिका संचालित बमरोली आरोग्‍य केंद्र पर टीकाकरण के बिना प्रमाण पत्र देने का ये पहला केस नहीं है. इससे पहले सूरत में एनजीओ चलाने वाले राकेश सिंह के साथ ही ऐसी घटना हो चुकी है. उन्‍होंने अपने सास-ससुर के लिए ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन कराया था. उन्‍हें भी 13 मार्च को ही टीकाकरण के लिए बुलाया गया था. वह अपने सास-ससुर को आरोग्‍य केंद्र पर ले जाए इससे पहले ही उन्‍हें पहली डोज के टीकाकरण का मैसेज मिल गया. राकेश भी यह पढ़कर चौक गए.

    राकेश सिंह ने बताया कि उन्‍हें जो प्रमाण पत्र मिला उसमें डॉक्‍टर का नाम भी लिखा था. उन्‍होंने कहा कि वह जिला कलेक्‍टर और सूरत महानगर पालिका कमिश्‍नर से इसकी शिकायत करेंगे. साथ ही प्रमाण जारी करने वाले डॉक्‍टर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे. उनका कहना है कि टीकाकरण के समय कैंडिडेट का आईडी प्रूफ मांगा जाता है. लेकिन यहां तो सीधा ही सर्टिफिकेट मिल गया. ऐसे में यह कोई सामान्‍य भूल नहीं है बल्कि एक बड़ी गड़बड़ी है.

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