Tauktae तूफान: अब भी अंधेरे में जीने को मजबूर लोग, दीयों के लिए मिट्टी का तेल नहीं

ताउते का असर अभी भी खत्म नहीं हुआ है.

Taukte Cyclone: ऊना से 20 किमी की दूरी पर स्थित सनखडा गांव में गोहिल दरबारों की बड़ी आबादी है. इस गांव के करीब 35 जवान भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं. इन सिपाहियों के परिवार इस समय यहां बेहद दयनीय स्थिति में रह रहे हैं.

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    गिर सोमनाथ. सौराष्ट्र में गिर सोमनाथ (Gir Somnath) जिले के ऊना और गिर-गढ़दा तालुका में टाउते तूफान (Taukte Cyclone) से हुई तबाही अभी तक ठीक नहीं हुई है. जनजीवन अभी भी प्रभावित है. तूफान के 25 दिन से अधिक समय के बाद भी ऊना तालुका के कई ग्रामीण इलाकों में लोग अभी भी अंधेरे में जी रहे हैं. बिजली नहीं होने की वजह से खेती योग्य जमीन भी सूख गई है. पानी के लिए पशु भटक रहे हैं. क्षेत्र के लोग मवेशियों को पिलाने के लिए कुओं से पानी भरने को मजबूर हैं. वहीं यहां 35 जवानों के परिवार अब भी अंधेरे में जी रहे हैं. यह स्थिति ऊना तालुका के सनखडा गांव की है.

    ऊना से 20 किमी की दूरी पर स्थित सनखडा गांव में गोहिल दरबारों की बड़ी आबादी है. इस गांव के करीब 35 जवान भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं. इन सिपाहियों के परिवार इस समय यहां बेहद दयनीय स्थिति में रह रहे हैं. यही हाल सनखडा गांव से महज दो किलोमीटर दूर मालन गांव का है. सनखडा और मालन गाम में कुल 1,500 परिवार कृषि काम से जुड़े हैं. पिछले 17 मई को तूफान से आम और नारियल जैसे बागवानी के पेड़ उखड़ गए थे. कई कच्चे घर की छतें उड़ गईं.

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    बिजली की आपूर्ति करने वाले खंभे ढहे
    गांव में बिजली आपूर्ति करने वाले कई बिजली के खंभे गिर गए. एक महीने बाद भी प्रशासन की ओर से नियुक्त कोई अधिकारी या टीम सर्वे के लिए मालन गाम में नहीं पहुंची है. अब तक गिर के इस क्षेत्र के लोगों को कोई सहायता नहीं दी गई है. सनखडा और मालन क्षेत्र के लगभग 35 युवक सेना में शामिल हैं. वे देश की सीमाओं पर मातृभूमि की रक्षा कर रहे हैं. सर्वेक्षण दल अभी तक क्षेत्र में नहीं पहुंचा है और न ही कोई सहायता प्राप्त की है.

    सनखडा और मालन गांवों में आए तूफान ने ऐसा कहर बरपाया कि यहां के लोगों को आज भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पिछले एक माह से बिजली नहीं आने के कारण मालन क्षेत्र की महिलाएं अपने जानवरों को कुओं से पानी निकाल कर प्यास बुझा रही हैं. जब तक बिजली की आपूर्ति बहाल नहीं हो जाती, किसान खेती नहीं कर सकते. घरों के लिए छोटी झोपड़ी, पाइप या छत उपलब्ध नहीं है. मिल भी जाए तो इतनी कीमत चुकानी पड़ती है कि जिसे यहां रहने वाले लोग वहन नहीं कर सकते.

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