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वडोदरा: सोनी परिवार से लाखों रुपये हड़पकर खुद को मृत घोषित करने वाले ज्योतिषी को पुलिस ने दबोचा

पुलिस ने गिरफ्तार किया

पुलिस ने गिरफ्तार किया

Vadodara crime: एक अन्य गिरफ्तार साहिल वोरा उर्फ ​​सीताराम भार्गव ने सोनी परिवार के घर पर कलश की रस्म अदा की और जमीन में दबे पुराने सिक्कों को बाहर निकाला. लेकिन उन्होंने इसे परिवार को नहीं दिया

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    वडोदरा. गुजरात के सामा क्षेत्र में स्वाति सोसायटी स्थित घर में रहते सोनी परिवार के पांच सदस्यों को आत्महत्या (Suicide) करने पर मजबूर करने वाले 9 ज्योतिषी में से 2 को पुलिस ने राजस्थान से हिरासत में लिया है. पकड़े गए दो ज्योतिषियों में से एक ने अनुष्ठान के नाम पर सोनी परिवार से 4 लाख रुपये लिए थे और दूसरे ने 3.50 लाख रुपये लिए थे.

    ज्योतिष गजेन्द्र पर आरोप है कि उसने 4 लाख रुपये लिए फिर भी के लिए अनुष्ठान नहीं किया और खबर फैलाई कि वह मर गया था. एक अन्य गिरफ्तार साहिल वोरा उर्फ ​​सीताराम भार्गव ने सोनी परिवार के घर पर कलश की रस्म अदा की और जमीन में दबे पुराने सिक्कों को बाहर निकाला, लेकिन उन्होंने इसे परिवार को नहीं दिया और 3.50 लाख रुपये अपने साथ ले गए.

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ठग ज्योतिष टीम के 9 सदस्यों में से दो जिन्होंने सोनी परिवार को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. राजस्थान के नागरा तहसील के खिनचर गामव के निवासी गजेंद्र भार्गव और कुचेरा गांव से साहिल वोरा उर्फ ​​सीताराम भार्गव को गिरफ्तार किया गया है. ज्योतिषियों के इस समूह का मुखिया वडोदरा गोत्री क्षेत्र के निवासी हेमंत जोशी हैं और वो फरार हैं. हेमंत जोशी के माध्यम से सोनी परिवार राजस्थान के ठग ज्योतिषी गजेंद्र भार्गव और साहिल वोरा उर्फ ​​सीताराम भार्गव के संपर्क में आया.

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    हेमंत जोशी का असली नाम हेतमाराम है. पुलिस ने साहिल वोरा नाम के एक ज्योतिषी की भी जांच की, जो पैनगेट आयुर्वेदिक कॉलेज के पास रहता है. साहिल वोराने नरेंद्र सोनी के वहां टोना किया और एक गड्ढा खोदा और 10 चांदी के सिक्कों के साथ-साथ साल 1920 के सिक्के निकले थे. उन्होंने ये सिक्के नरेंद्रभाई को नहीं दिए और उन्हें अपने साथ ले गए. इसके अलावा, साहिल ने अनुष्ठान करने के लिए 3.50 लाख रुपये लिए. जब पुलिस ने सीताराम भार्गव को राजस्थान से गिरफ्त में लिया तो पता चला कि वह साहिता वोरा है.

    इसके अलावा एक अन्य आरोपी गजेन्द्र भार्गव वडोदरा आए और अनुष्ठान करने के नाम पर 4 लाख रुपये लिए थे. 4 लाख रुपये लेने के बाद वह अनुष्ठान करने नही आया. जब सोनी के परिवार ने हेमंत जोशी से संपर्क किया, तो उन्हें कहा गया कि गजेंद्र भार्गव की मृत्यु हो गई हे, इसलिए वह नहीं आएगा. वास्तव में गजेंद्र भार्गव अपने गांव में एक दर्जी के रूप में रहते थे और काम करते थे.

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