ब्लैक फंगस के बाद अब व्हाइट फंगस के मामले, जानिए कैसे फैलता है और किसे है खतरा?

व्हाइट फंगस शरीर के विभिन्न अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है. (सांकेतिक तस्वीर)

व्हाइट फंगस शरीर के विभिन्न अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है. (सांकेतिक तस्वीर)

White Fungus: विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक व्हाइट और ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन के अलग-अलग साइड इफेक्ट होते हैं. यह व्हाइट फंगस शरीर के विभिन्न अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है.

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अहमदाबाद. अहमदाबाद सहित राज्य में म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस (Black Fungus) के हाहाकार के बीच व्हाइट फंगस (White Fungus) का जोखिम सामने आया है. अहमदाबाद सोला सिविल में पिछले एक सप्ताह में व्हाइट फंगस के तीन मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है. म्यूकरमाइकोसिस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर राज्य सरकार द्वारा इस बीमारी को महामारी घोषित किया है. अब व्हाइट फंगस के मामले सामने आने पर प्रशासन चिंतित है.

विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक व्हाइट और ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन के अलग-अलग साइड इफेक्ट होते हैं. यह व्हाइट फंगस शरीर के विभिन्न अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है. सोला सिविल अस्पताल के ईएंडटी विभाग के प्रमुख डॉ. नीना का कहना है कि "ब्लैक फंगस के अलावा एसपजीलोसिस और कैंडिडा प्रकार के फंगस भी होते हैं. मधुमेह के रोगियों में स्वस्थ लोगों में भी कैंडिडा फंगस पाया जाता है. लेकिन अब तक जो मामले देखने को मिले हैं उनमें एसपजीलोसिस और कैंडिडा के मामले भी देखने को मिले हैं. हर फंगस रोग खतरनाक है. लेकिन इसका कितना प्रभाव पड़ा है, यह इसके जोखिम को निर्धारित करता है."

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ये हैं व्हाइट फंगस इसके लक्षण
म्यूकरमाइकोसिस खतरनाक है क्योंकि यह आंखों, मस्तिष्क और नाक में प्रवेश करता है. इसी तरह यह व्हाइट फंगस इतना मिलता-जुलता है कि यह नाक, आंख और दिमाग में इतनी तेजी से फैल सकता है. व्हाइट फंगस के लिए एक इंजेक्शन या टैबलेट ओरिकैंजोल एन्टीफंगल उपचार है जो रोगियों को घर पर दिया जा सकता है. म्यूकरमाइकोसिस में दिए गए इंजेक्शन का साइड इफेक्ट किडनी पर होता है लेकिन व्हाइट फंगस में दी जाने वाली गोलियों या इंजेक्शन का साइड इफेक्ट लीवर पर होता है.

इसलिए हर तीन दिन में लीवर की जांच करानी पड़ती है. इस फंगस से त्वचा, हड्डियों और फेफड़ों के साथ-साथ उन लोगों में प्लमनरी इन्फेक्शन का कारण बन सकता है जिनका ट्रांसप्लांट हुआ है या कैंसर की दवा ले रहे हैं. हमने यहां शुरुआती दौर में देखा है. प्रारंभिक अवस्था में पकड़े जाने पर अच्छा परिणाम प्राप्त किया जा सकता है.




यदि कोरोना से ठीक होने वाला व्यक्ति जानना चाहता है कि क्या वह ब्लैक फंगस या व्हाइट फंगस से पीड़ित है,  यदि आप लंबे समय से आईसीयू में हैं या आपको मधुमेह या बहती या सफेद बहती नाक है, अगर तालू में छेद है, या ठीक से नहीं देख पा रहे हैं तो ये इसके शुरुआती चरण के लक्षण होते हैं. गौरतलब है कि व्हाइट फंगस का यह मामला फिलहाल अहमदाबाद में सामने आया है. पहले पटनामे व्हाइट फंगस का मामला देखा गया था. अब ब्लैक फंगस के बाद व्हाइट फंगस का जोखिम बढ़ रहा है.

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