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विधानसभा चुनाव: गुजरात के वो मुख्यमंत्री जो 1965 की जंग में पाकिस्तानी फाइटर के हमले में मारे गए

1965 की भारत पाकिस्तान जंग में गुजरात के दूसरे सीएम बलवंत राय मेहता पाकिस्तानी फाइटर के हमले में मौत हुई थी.

1965 की भारत पाकिस्तान जंग में गुजरात के दूसरे सीएम बलवंत राय मेहता पाकिस्तानी फाइटर के हमले में मौत हुई थी.

Gujarat Assembly Elections: बलवंत राय मेहता! ये आजाद भारत का वह नाम है जो बतौर मुख्यमंत्री पाकिस्तानी लड़ाकू विमान के ह ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

बलवंत राय मेहता जून 1963 से सितंबर 1965 तक गुजरात के सीएम रहे
पाकिस्तान से युद्ध के बीच बलवंत राय रैली में सेना के जवानों का हौसला बढ़ाने निकले थे
पाकिस्तान के फाइटर पायलट कैस हुसैन ने पीछा कर किया था हमला

अहमदाबाद. गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 का सियासी मैदान एक बार फिर तैयार है. आजादी के आंदोलन से लेकर आजाद भारत तक के सफर में गुजरात के नेताओं का अहम नेतृत्व रहा है. कभी कांग्रेस का मजबूत किला माने जाने वाले गुजरात में पिछले 27 साल से बीजेपी सत्ता में है. यह वह राज्य है जहां की राजनीति में कई ऐतिहासिक घटनाक्रम हुए हैं. इन्हीं में से एक नाम गुजरात के उस मुख्यमंत्री का भी जिक्र करना जरूरी है, जो भारत पाकिस्तान के बीच 1965 की जंग में शहीद हो गए थे. इनका नाम था बलवंत राय मेहता. तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता के हेलीकॉप्टर बीचक्राफ्ट पर पाकिस्तानी एयरफोर्स ने उस समय हमला किया जब वह एक रैली में भाग लेकर कच्छ की तरफ निकले थे. इस हमले में तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता समेत 7 लोगों की जान चली गई थी.

दरअसल, बलवंत राय मेहता गुजरात के दूसरे मुख्यमंत्री थे. जून 1963 से लेकर सितंबर 1965 तक वह गुजरात के सीएम थे. वह गुजरात में काफी लोकप्रिय नेता रहे और आजादी के आंदोलन में भाग लेने के अलावा उन्हें पंचायती राज का पितामह भी कहा जाता था. देश विभाजन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकरावों का दौर जारी था. साल 1965 में पाकिस्तान और भारत के बीच एक बार फिर जंग छिड़ गई. जंग सरहदों पर थी और देश के भीतर शहरों, कस्बों और गांव गांव में देश के प्रति समर्पण का जज्बा भी हिलोरे मार रहा था. इसी बीच गुजरात के तत्कालीन सीएम बलवंत राय मेहता 19 सितंबर 1965 के दिन सुबह जल्दी उठकर अहमदाबाद में होने वाली जनसभा के लिए करीब 10 बजे अपने आवास से निकल पड़े.

जवानों का हौसला बढ़ा रहे थे सीएम
पाकिस्तान से जारी युद्ध के बीच बलवंत राय रैली में भारतीय सेना के जवानों का हौसला बढ़ा रहे थे. उस दौर के पूरे हालातों पर नजर रखने वाले लोग बताते हैं कि रैली के बाद दोपहर डेढ़ बजे बलवंत मेहता वापस लौटे. इसके बाद उन्हें अहमदाबाद एयरपोर्ट के लिए निकलना था. उनके साथ उनकी पत्नी सरोज बेन समेत 3 सहयोगी और एक पत्रकार भी थे.

क्या हुआ था उस दिन?
19 सितंबर 1965 के दिन बलवंत राय मेहता के चॉपर बीचक्राफ्ट ने मीठापुर से कच्छ के लिए जैसे ही उड़ान भरी वैसे ही पाकिस्तान के फाइटर पायलट कैस हुसैन ने उसे इंटरसेप्ट कर लिया. बेहद तेजी से हालात बदल गए और सीएम बलवंत राय मेहता के चॉपर के चालक ने उन पर मंडरा रहे खतरे को भांप लिया. गुजरात सीएम का चॉपर पाकिस्तानी फाइटर से घिर गया. पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट द्वारा एयरसेप्ट करता देख बीचक्राफ्ट ने अपने पंखे हिलाने शुरू कर दिए. ऐसा कर उन्होंने उन्हें छोड़ दिए जाने के लिए इशारा किया था, लेकिन पाकिस्तानी पायलट ने मीठापुर से 100 किलोमीटर दूर सुथाली गांव के ऊपर फायर करते हुए बलवंत राय मेहता के बीचक्राफ्ट को हिट कर दिया. इससे विमान में विस्फोट हो गया और वह आग की लपटों से घिर कर जमीन पर गिर गया. पाकिस्तान के इस हमले में तत्कालीन सीएम बलवंत राय, उनकी पत्नी और पायलट समेत 7 लोगों की जान चली गई. बीचक्राफ्ट गुजरात सरकार के मुख्य पायलट जहांगीर एम. इंजीनियर उड़ा रहे थे.

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सीएम बलवंत राय मेहता के हेलीकॉप्टर बीचक्राफ्ट का कच्छ में पीछा कर पाकिस्तानी फाइटर चालक कैस हुसैन ने हमला किया था. (तस्वीर: द डॉन अखबार)

पाकिस्तानी पायलट ने जताया था खेद
जैसे ही यह खबर फैली तो देश में पाकिस्तान को लेकर गहराया आक्रोश अपने चरम पर था. भारतीय सेना की ओर से पाकिस्तान को इस घटना पर तगड़ा संदेश दिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक 25 साल का पाकिस्तानी पायलट हुसैन उस दिन भारतीय वायु क्षेत्र में 20 हजार फीट की ऊंचाई पर घुस आया था. उधर, 46 साल बाद पाकिस्तानी फाइटर एयरक्राफ्ट के पायलट हुसैन ने बलवंत राय मेहता के हेलीकॉप्टर बीचक्राफ्ट के पायलट की बेटी को पत्र लिखकर माफी मांगी. पायलट की बेटी ने भी पत्र का जवाब दिया और पिता के हत्यारे को माफ कर दिया.

स्वतंत्रता सेनानी रहे, पंचायती राज के थे वास्तुकार
भारतीय स्वतंत्रता सेनानी बलवंत राय मेहता ने अंग्रेजों से भी मुकाबला किया. उनका जन्म गुजरात के भावनगर में 19 फरवरी 1900 को हुआ. शादी सरोजबेन से हुई. वह राजनीतिज्ञ थे, जो सौराष्ट्र क्षेत्र से भारत की संविधान सभा के लिए चुने गये थे. स्वतंत्रता के बाद वह गुजरात के दूसरे मुख्यमंत्री बने. बलवंत राय मेहता ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की दिशा में कई बड़े काम किए. उन्हें पंचायती राज का वास्तुकार माना जाता है. बलवंत राय मेहता की ही पहल थी कि गांव सभाओं को स्वायत्त बनाया गया.

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