सूरत में रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी, शीशी में पानी भरकर वसूले 7,000 रुपये

 रेमडेसिविर

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Coronavirus In Gujarat: गुजरात स्थित सूरत में पीड़ित परिवार ने आरोपी को तब पकड़ा जब वह शीशियां को वापस लेने आया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 24, 2021, 1:13 PM IST
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सूरत. गुजरात स्थित सूरत (Surat News) में रेमडेसिवीर इंजेक्शन ( remdesivir) की कालाबाजारी का मामला सामने आया है. मिली जानकारी के अनुसार एक शख्स को सरथाणा पुलिस ने कालाबाजारी के आरोप में गिरफ्तार किया. स्थानीय लोगों ने उसे डुप्लीकेट रेमडेसिवीर इंजेक्शन बेचने के दौरान योगी चौक पर पकड़ा. खुद को दिव्येश बताने वाले आरोपी ने बुधवार को कथित रूप से 7,000 रुपये में छह डुप्लिकेट शीशियां बेची थीं.

पीड़ित परिवार ने आरोपी को तब पकड़ा जब वह गुरुवार को इंजेक्शन की शीशियों को वापस लेने आया. उसे इंजेक्शन की शीशियों के साथ सरथाणा पुलिस को सौंप दिया गया. इसके बाद पुलिस ने पीड़ित परिवार से कहा कि कि शीशियों की डिलीवरी उमरा पुलिस स्टेशन के इलाके में दी गईं ऐसे में शिकायत वहां दर्ज की जानी चाहिए. जिग्नेश और उनका परिवार शिकायत दर्ज करने के लिए उमरा पुलिस स्टेशन पहुंचा, उमरा पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया और उन्हें वापस सरथाणा भेज दिया. हालांकि शाम को सरथाणा पुलिस ने  शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की.

 शीशियों में क्या था इसकी होगी जांच - पुलिस

पुलिस के सहायक आयुक्त सी के पटेल ने कहा 'पीड़ित परिवार को रेमडेसिवीर शीशियां बेची गईं.  शीशियों में डुप्लिकेट या एक्सपायर्ड सामग्री हैं या नहीं, अभी इसकी जांच हो रही है. प्रथमदृष्टया यह  ज्यादा कीमत पर अनधिकृत बिक्री का मामला है.' पुलिस ने कहा कि शिकायतकर्ता दावा कर रहे हैं कि इसमें पानी है. अभी इसकी जांच होगी कि शीशियों में क्या था.
जिग्नेश के दोस्त मनीष हिरपारा ने कहा, 'योगी चौक के एक अस्पताल में मैलानी के एक परिवार का सदस्य भर्ती है. डॉक्टर ने हमें इंजेक्शन लाने के लिए कहा और हम सरकारी सप्लाई के जरिए इंतजाम नहीं कर सके. इसलिए हमने बाहर खोज करने की कोशिश की और इस व्यक्ति का फोन नंबर मिला.'

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार हिरपारा ने कहा कि आरोपी ने 7,000 रुपये में एक इंजेक्शन देने की पेशकश की. हम तैयार हो गये और अठवा गेट के पास वनिता विश्राम ग्राउंड के करीब युवक से इंजेक्शन लिया. जब हम अस्पताल पहुंचे, तो हमने पाया किया कि इंजेक्शन नकली हैं और शीशियों की एक्सपायरी डेट 2020 थी.





परिवार को यह भी बताया गया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन पाउडर के तौर पर आता है, जबकि उन्हें जो शीशियां मिलीं थी वह लिक्विड फॉर्म में थी. फिर उन्होंने आरोपी को फोन किया. आरोपी ने फोन पर कबूल किया कि उसने नकली इंजेक्शन दिया पैसे वापस करने के लिए सहमत हो गया. हिरपारा ने कहा, 'आरोपी ने गुरुवार सुबह गूगल पे के जरिए पैसे वापस किए और शीशियां वापस लेने आया, तब हमने उसे पकड़ा और पुलिस को सौंप दिया.'
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