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ब्रेन डेड घोषित होने के बाद ढाई साल के बच्चे ने 7 लोगों की जिंदगी को किया गुलजार

बच्‍चे के अंगों को दूसरे लोगों के शरीर में प्रत्‍यारोपित किया गया. (File Pic)
बच्‍चे के अंगों को दूसरे लोगों के शरीर में प्रत्‍यारोपित किया गया. (File Pic)

अंगों के जरूरतमंदों का पता चलते ही, बच्चे के ह्रदय और फेफड़ों को अस्पताल से एक एम्बुलेंस में सूरत एयरपोर्ट पहुंचाया गया और एयर एम्बुलेंस के द्वारा सीधे चेन्नई के एमजीएम अस्पताल ले जाया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 17, 2020, 2:19 PM IST
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कीर्तेश पटेल
सूरत.
दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड (Brain Dead) घोषित किए गए एक ढाई साल के बच्चे ने अपने शरीर के अंगों (Body Organ Donation) के जरिये सात लोगों को पुनर्जीवन दिया है. इस बच्चे के माता पिता द्वारा अंगों के दान करने के बाद जिन सात लोगों को नया जीवन मिला है उसमें दो लोग रूस और यूक्रेन के भी हैं. इस बच्चे के दिल को मंगलवार के दिन चेन्नई (Chennai) के एमजीएम अस्पताल में रूस के एक चार साल के बच्चे में प्रत्यारोपित किया गया है और उसके फेफड़ों को यूक्रेन के चार साल के बच्चे में प्रत्यारोपित किया गया है.

कोरोना महामारी (Coronavirus) के बीच सूरत (Surat) में अंगदान करने की यह दूसरी घटना है. बीते हुए 9 दिसंबर को सूरत के भातर एरिया के रहने वाले बच्‍चे जैश संजीव ओझा अपने अपार्टमेंट के दूसरे तल पर स्थित अपने पड़ोसी की बालकनी से फिसल कर गिर गए थे. उन्हें पास में ही स्थित अमृता अस्पताल ले जाया गया जहां कई दिनों तक उनका इलाज चलता रहा. लेकिन 14 दिसंबर को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड यानी उनके मस्तिष्क को मृत घोषित कर दिया.

इसके बाद, सूरत में स्थापित 'डोनेट लाइफ" नाम के एक एनजीओ के अध्यक्ष नीलेश मांडलेवाला अस्पताल पहुंचे और जैश के पिता संजीव ओझा को जोकि एक पत्रकार भी हैं, उन्हें बच्चे के अंगों को दान करने के लिए समझाया जिससे दूसरे बच्चों को जीवनदान मिल सके.
अंगों के जरूरतमंदों का पता चलते ही, बच्चे के ह्रदय और फेफड़ों को अस्पताल से एक एम्बुलेंस में सूरत एयरपोर्ट पहुंचाया गया और एयर एम्बुलेंस के द्वारा सीधे चेन्नई के एमजीएम अस्पताल ले जाया गया. सूरत और चेन्नई के बीच 1615 किलोमीटर की दूरी केवल 160 मिनट में पूरी की गई.



हृदय को रूस के एक चार साल के बच्चे में और फेफड़ों को यूक्रेन के चार साल के बच्चे में प्रत्यारोपित किया गया. पिछले एक साल से इन दोनों बच्चों का इलाज चेन्नई के इस अस्पताल में चल रहा था.

अहमदाबाद स्थित किडनी रोग और रिसर्च सेंटर इंस्‍टीट्यूट के द्वारा बच्चे की दोनों किडनियों को सुरेंद्र नगर की एक 13 साल की बच्ची में और सूरत की एक 17 साल की लड़की में प्रत्यारोपित कर दिया गया. लिवर को आइकेडीआरसी में दो साल के बच्चे में प्रत्यारोपित कर दिया गया. आंखों के कॉर्निया को लोक दृष्टि चक्षु बैंक में दान कर दिया गया.
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