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गुजरात के 200 से अधिक व्यापारी वर्षों से कर रहे हैं किसानों के साथ कॉन्‍ट्रैक्ट फार्मिंग

अहमदाबाद में होती है कॉन्‍ट्रैक्‍ट फार्मिंग.
अहमदाबाद में होती है कॉन्‍ट्रैक्‍ट फार्मिंग.

Kisaan Andolan: अहमदाबाद के नरोदा फल बाज़ार के कई थोक विक्रेता किसानों के साथ मिलकर फलों का कॉन्‍ट्रैक्ट फ़ार्मिंग (Contract Farming) कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 22, 2020, 9:27 AM IST
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(संजय टैंक)


अहमदाबाद. इस समय किसान केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों (Farm Laws) के ख़िलाफ़ प्रदर्शन (Farmer Protest) कर रहे हैं लेकिन पिछले वर्षों में गुजरात (Gujarat) सहित अन्य स्थानों पर भी कॉन्‍ट्रैक्ट फार्मिंग का चलन बढ़ा है. पर यह समझौता किसी किसान और कंपनी के बीच नहीं होता बल्कि व्यापारी और किसानों के बीच होता है. यह समझौता लिखित नहीं होता बल्कि ज़ुबान की क़ीमत पर आधारित होता है. अहमदाबाद के नरोदा फल बाज़ार के कई थोक विक्रेता किसानों के साथ मिलकर फलों का कॉन्‍ट्रैक्ट फ़ार्मिंग कर रहे हैं.

लछमनभाई रोहरा नरोदा फल बाज़ार के अध्यक्ष हैं और थोक व्यापारी हैं और कच्छ के एक किसान जयंतीभाई के साथ उन्होंने एक करार किया हुआ है. लछमनभाई ने कहा कि इस करार के अनुसार, ‘सैफ़्रॉन नारंगी आम और अनार की कच्छ में काफ़ी उपज होती है. किसानों के साथ A1 गुणवत्ता वाले फलों के लिए करार हुआ है और इन फलों के लिए किसानों को हम दोगुनी क़ीमत देते हैं. जहां तक सैफ़्रॉन आम की बात है, हम अच्छी गुणवत्ता वाले फलों के लिए उन्हें दोगुनी क़ीमत देते हैं’.
लछमनभाई ने कहा, 'अगर बाज़ार में आम की क़ीमत ₹30-35 प्रति किलो है तो A1 गुणवत्ता वाले फलों की क़ीमत ₹60-70 प्रति किलो होती है'. इसके बदले हम किसानों को कीटनाशक और बॉक्स पैकिंग का सामान देते हैं. अगर किसान के पास पैसा नहीं होता तो हम उन्हें 10-20 लाख रुपए भी दे देते हैं.'



उन्होंने कहा, 'किसानों को सिर्फ A1 गुणवत्ता वाले फलों के लिए ही मेहनत करनी होती है.' अगर कोई किसान 60-65 प्रतिशत अच्छी गुणवत्ता वाले फल का उत्पादन करता है तो उसे दोगुनी क़ीमत मिलती है और शेष 30-35 प्रतिशत फलों के लिए उन्हें बजार का भाव दिया जाता है.

अहमदाबाद के लछमनभाई ही नहीं, बल्कि एक अन्य व्यापारी मोहम्मद अफ़ज़ल इब्राहिम मेमन भी किसानों के साथ इसी तरह का कारोबार करते हैं. कच्छ के अलावा, वह जूनागढ़ के एक अन्य किसान दासभाई अंकोलवाडी से भी कारोबार करते हैं. उन के साथ गिर के आम का कारोबार करते हैं. इनके साथ उनका कारोबार आपसी संबंध के आधार पर है न कि इसके लिए कोई लिखित करार किया है.

सीजन के शुरू में किसानों को बीज, कीटनाशक और पैकिंग के सामान के लिए एडवांस दिया जाता है. जब फसल तैयार हो जाती है, तब बाज़ार के आधार पर इसकी क़ीमत तय की जाती है. अगर किसानों को किसी अन्य बजार में ज़्यादा क़ीमत मिल रही है तो उस बाज़ार में भी किसानों को अपने उत्पाद बेचने की इजाज़त दी जाती है. महत्त्वपूर्ण यह है कि कि अहमदाबाद के 50 से अधिक व्यापारी राज्य भर के 200 से अधिक व्यापारी किसानों के साथ इस तरह का कारोबार कर रहे हैं.
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