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देश ने 2015 से 18 के बीच में झेला डेढ़ सौ साल में सबसे भयानक और लंबा सूखा

इस रिपोर्ट को आईआईटी गांधीनगर के प्रोफेसर ने तैयार किया है.

इस रिपोर्ट को आईआईटी गांधीनगर के प्रोफेसर ने तैयार किया है.

बुंदेलखंड (Bundelkhand) जैसे इलाकों में तो पानी की कमी के कारण लोगों का पलायन एक बड़ी समस्या बन चुका है. इस भयानक सूखे (severe drought) के कारण जलाशय और भूमिगत जल लगातार सूख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक अगर ऐसा ही सूखा आगे भी जारी रहा तो भारत में ये इलाके पानी सबसे बड़ी समस्या बन जाएगा.

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    अनिरुद्ध घोषाल
    नई दिल्ली: पिछले कई वर्षों में हुई कम बारिश के कारण देश में बुंदेलखंड का इलाका सूखे का प्रतीक बन चुका है. केवल बुंदेलखंड ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र का मराठवाड़ा, गुजरात का कच्छ और तमिलनाडु के कई इलाके कई सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं. देश में सूखे पर एक एक रिपोर्ट पेश की गई है. इसमें सन 1870 से लेकर 2018 तक के आंकड़े एकत्रित किए गए हैं. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में सबसे ज्यादा सूखे का समय 2015 से 2018 तक के बीच का है. ये पिछले 150 साल में सबसे ज्यादा और लंबा है. जाहिर है इसका असर देश के इन हिस्सों में भी पड़ा है.

    बुंदेलखंड जैसे इलाकों में तो पानी की कमी के कारण लोगों का पलायन एक बड़ी समस्या बन चुका है. इस भयानक सूखे के कारण जलाशय और भूमिगत जल लगातार सूख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक अगर ऐसा ही सूखा आगे भी जारी रहा तो भारत में ये इलाके पानी सबसे बड़ी समस्या बन जाएगा.

    इस अध्ययन को “Long-term (1870-2018) drought reconstruction in the context of surface water security in India” नाम दिया गया है. ये रिपोर्ट जर्नल ऑफ हाइड्रोलॉजी में प्रकाशित की गई है. इस अध्ययन को आईआईटी गांधीनगर में सिविल इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर विमल मिश्रा ने किया है. इस रिपोर्ट में 18 मौसमी और 16 जल विज्ञान संबंधी सूखे सालों का अध्ययन किया गया है. देश में पांच सबसे भयंकर सूखे 1899, 1876, 2000, 1918 और 1965 में पड़े थे. अध्ययन के अनुसार पांच हाइड्रोलॉजिकल सूखे साल 1899, 2000, 1876, 1965 और 1918 में पड़े. रिपोर्ट के अनुसार 150 साल में 1899 का सूखा अब तक का सबसे भयानक सूखा माना जाता है.

    भारत में बड़ी आबादी खेती के लिए कृषि पर निर्भर रहती है. यहां पर खेती मॉनसून पर निर्भर रहती है. ये देश की कुल वर्षा का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा होता है. मौसम में बदलाव और घटते वनों के कारण सूखे का खतरा तेजी से बढ़ा है. स्पेन के कुल क्षेत्रफल से दोगुना भाग के बराबर हर साल वन कम हो जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इस कारण देश की 2.5 फीसदी जीडीपी कम हो जाती है.

    इस अध्ययन के अनुसार देश में पड़े 5 सबसे बड़े सूखे पॉजिटिव एसएसटी (sea Surface temperature) यानी समुद्री सतह का तापमान बढ़ने के कारण पड़े हैं. भारत में सूखे और समुद्री सतह के बढ़ते तापमान के बीच साम्य होना एक बड़ी चिंता का विषय है.

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