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गांधीनगर लोकसभा: क्यों है देश की सभी सीटों की 'शाह'

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Updated: April 22, 2019, 5:36 PM IST
गांधीनगर लोकसभा: क्यों है देश की सभी सीटों की 'शाह'
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गुजरात की राजधानी गांधीनगर की लोकसभा सीट बीजेपी की पारंपरिक सीट मानी जाती है.

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  • Last Updated: April 22, 2019, 5:36 PM IST
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गुजरात की राजधानी गांधीनगर की लोकसभा सीट बीजेपी की पारंपरिक सीट मानी जाती है. पिछले कई दशकों से यहां वरिष्ठ भाजपाई नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने एकक्षत्र राज किया है. 1998 से 2014 तक के चुनावों में आडवाणी यहां से जीतते आ रहे हैं. उनसे पहले 1991 में अटल बिहारी वाजपेयी भी यहां से सांसद रह चुके हैं.

इस बार 91 वर्षीय आडवाणी बीजेपी ने टिकट नहीं दिया है. अब यहां से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चुनाव मैदान में हैं. उनके सामने कांग्रेस ने गांधीनगर उत्तरी विधानसभा सीट से अपने विधायक सीजे चावड़ा को खड़ा किया है. चावड़ा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और लंबे समय से राज्य में राजनीति कर रहे हैं.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. 2014 के चुनावों के दौरान उन्हें सबसे महत्वपूर्ण और दिल्ली की सत्ता की चाबी कहे जाने वाले यूपी की कमान सौंपी गई थी. अमित शाह की अगुवाई में बीजेपी ने यूपी में ऐतिहासिक 71 सीटों पर जीत हासिल की थी.

इस बार के चुनाव में पार्टी के स्टार प्रचारक के तौर पर अमित शाह देशभर में प्रचार कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें अपनी सीट चुनाव प्रचार कर पाने का कम ही मौका मिला है. दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी सीजे चावड़ा ने लगातार चुनाव प्रचार कर जीत का रुख अपनी ओर मोड़ने की कोशिश की है.

सीजे चावड़ा


क्या हैं समीकरण

इस लोकसभा सीट में सात विधानसभाएं आती हैं-घटोलडिया, साबरमती, कलोल, बेजालपुर, सानंद, नारनपुरा और गांधीनगर उत्तरी. गांधीनगर की सीट पर पटेलों और वाघेला समुदाय का दबदबा है. बीते चुनावों में इन दोनों समुदायों का समर्थन बीजेपी पार्टी को मिलता आया है. वाघेला समुदाय से ही आने वाले शंकर सिंह वाघेला ने 1989 में पहली बार जीतक बीजेपी का खाता इस सीट पर खोला था. 2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने सात में से पांच सीटों पर जीत हासिल की थी. अमित शाह ऐसे नेता माने जाते हैं कि जिनकी राज्य की राजनीति और वोटों पर मजबूत पकड़ है. वो राज्य के गृह मंत्री भी रह चुके हैं. ऐसे में यह देखना रोचक होगा कि कांग्रेस सीजे चावड़ा उन्हें कितनी कड़ी टक्कर देते हैं.यह भी पढ़ें: भोपाल में दिग्विजय सिंह का बस प्रज्ञा ठाकुर से नहीं इतिहास से भी है मुकाबला

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First published: April 22, 2019, 5:31 PM IST
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