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गुजरात के मेहसाना में पाटीदार की मौत पर ओछी राजनीति!

जनक दवे | News18Hindi
Updated: June 17, 2017, 8:54 AM IST
गुजरात के मेहसाना में पाटीदार की मौत पर ओछी राजनीति!
Photo of Victim

मेहसाना में केतन की शव यात्रा निकाली जाएगी जो गुजरात के राज्यपाल के घर तक होगी.

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11 दिन बित चुके हैं मेहसाना के केतन पटेल की मौत को और पाटीदार समाज मांग कर रहा है कि उन्हें न्याय चाहिए. न्याय के लिए सीबीआई जांच चाहिए, वहीं सरकार है की मानती नहीं.

जी हां ये किस्सा गुजरात के मेहसाना का है जहां, केतन की शव यात्रा निकाली जाएगी. ये यात्रा गुजरात के राज्यपाल के घर तक निकाली जानी है. राज्यपाल के घर की चौखट पर केतन के शव को रखने का ऐलान पाटीदार कर चुके हैं. पाटीदार समाज के बने हुए नेता दावा कर रहे हैं कि शव यात्रा में उनके साथ लाखों पाटीदार जुड़ेंगे.

पाटीदारों के इस दांव पर सरकार भौचक्की रह गई है. सरकार को समझ नहीं आ रहा कि पाटीदारों के गुस्से को कैसे शांत किया जाए. दरअसल सरकार के सलाहकार, मामले की तीव्रता पहचानने मैं गच्चा खा गए और एक के बाद एक हुई देरी ने शांत बने पाटीदार आंदोलन की लौ को एक बार फिर जला दिया है. गौरतलब है की पाटीदार आंदोलन की शुरुआत इसी मेहसाना से हुई थी.

पिछले 11 दिन से केतन पटेल का शव मेहसाना के सिविल अस्पताल में है. केतन के परिवार वाले केतन के शव को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. केतन के परिवार ने समाज के नाम पर बन बैठे कुछ नेताओं की मांग को खुद की मांग करार दे दिया है, चूंकि उन्हें समाज में रहना जो है.

केतन की संदिग्ध मौत पर परिवार ने पहले ही एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी. इसे सरकार ने यह कहकर ठुकरा दिया था कि मजिस्ट्रेट जांच हो रही है. ऐसे में दूसरी जांच की जरूरत नहीं. लेकिन, पोस्टमॉर्टेम नोट ने यह साफ कर दिया कि चोरी के आरोप में पकड़े गए केतन को जब जेल से बाहर अस्पताल लाया गया तब उसके शरीर पर 39 जख्म थे. उसके बाद उसकी मौत हो गई. परिवार ने मौत का कारण बताने की मांग की, जिसे पहले नहीं बताया गया. 39 जख्म की बात सामने आने के बाद सरकार के पास मामला दर्ज करने के आदेश देने के अलावा कोई चारा नहीं था.

लेकिन, तब तक चार दिन हो गए थे. तय हुआ कि केतन का दोबारा पोस्टमॉर्टेम कराया जाए. दोबारा जब किया गया तो शरीर पर 50 जख्म मिले. आनन फानन में पुलिस ने एक पुलिस कांस्टेबल और एक दुकान के व्यापारी और उसेक बेटे को गिरफ्तार कर लिया.

यह वही व्यापारी था जिसकी दूकान के ड्रोवर से साड़े नौ हजार रुपए की चोरी करने का केतन पर आरोप था. पुलिस का दावा है की चोरी के शक के बाद दूकान के मालिक और आसपास के लोगों ने केतन को मारा था और पुलिस थाने दिया गया था. पुलिस ने उसे सीधा जेल भेज दिया था.हालांकि परिवार उस बात को मानने को तैयार नहीं है. परिवार मान रहा है कि केतन को पुलिस ने ही कस्टडी में मारा है और इसके लिए ही सीबीआई जांच की मांग कर रहा है. वहीं सरकार का तर्क है पाटीदारों की सारी मांगे मान ली गई हैं और जांच भी सही दिशा में है.

हालांकि, अब शवयात्रा का एक पहलु यह भी है कि कांग्रेस और कुछ नेता चुनावी साल में इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं. 18 जून यानि रविवार को केतन के शव यात्रा के रूप में मेहसाना से सड़क के मार्ग गांधीनगर राज्यपाल के घर लाकर रखने का ऐलान पाटीदार कर चुके हैं.

पुलिस ने शवयात्रा निकालने की कोई मंजूरी दी नहीं है और न ही देगी. ऐसी स्थिति में शवयात्रा निकालने पर पुलिस द्वारा उन्हें रोका जाएगा. पाटीदार भी चाहते हैं कि उन्हें रास्ते में रोका जाए.

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First published: June 17, 2017, 8:54 AM IST
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