गुजरातः बिजनेसमैन ने कोरोना से जीती जंग तो ऑफिस को बना दिया Covid अस्पताल, मिलेगा फ्री में इलाज

गुजरातः बिजनेसमैन ने कोरोना से जीती जंग तो ऑफिस को बना दिया Covid अस्पताल, मिलेगा फ्री में इलाज
गुजरात के व्यापारी ने ऑफिस को बनवाया कोविड अस्पताल (प्रतीकात्मक तस्वीर)

गुजरात (Gujarat) के सूरत में एक बिजनेसमैन ने कोरोना वायरस (Coronavirus) के मरीजों के लिए एक खास पहल की शुरुआत की है. सूरत के रियल एस्टेट बिजनेसमैन कादर शेख ने कोरोना मरीजों के लिए श्रेयम कॉम्प्लेक्स स्थित अपने 30 हजार स्क्वायर फीट ऑफिस को कोविड अस्पताल (Covid Hospital) में तब्दील करवाया है.

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  • Last Updated: July 22, 2020, 12:28 PM IST
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अहमदाबाद. गुजरात (Gujarat) के सूरत में एक बिजनेसमैन ने कोरोना वायरस (Coronavirus) के मरीजों के लिए एक खास पहल की शुरुआत की है. सूरत के रियल एस्टेट बिजनेसमैन कादर शेख ने कोरोना मरीजों के लिए श्रेयम कॉम्प्लेक्स स्थित अपने 30 हजार स्क्वायर फीट ऑफिस को कोविड अस्पताल (Covid Hospital) में तब्दील करवाया है. इस अस्पताल में कोरोना वायरस के सभी मरीजों को फ्री में इलाज मिलेगा.

पिछले दिनों 63 वर्षीय कादर शेख कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद कादर ने अपना इलाज एक प्राइवेट अस्पताल में करवाया, जिसमें उनके काफी पैसे भी खर्च हो गए. कोरोना से ठीक होने के बाद उनके दिमाग में ऐसे लोगों का खयाल आया जो इतने पैसे लगाकर अपना इलाज नहीं करवा सकते. डिस्चार्ज होने के तुरंत बाद शेख ने अपने ऑफिस को अस्पताल में तब्दील करने का काम शुरू किया.

नगर निगम ने भी दी अस्पताल को हरी झंडी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कादर ने मेडिकल स्टाफ, आईसीयू और अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सूरत नगर निगम से करार भी किया है. कादर ने ऑफिस को कोविड अस्पताल के तौर पर तब्दील किया, इसमें 85 बेड लगाए गए हैं. अस्पताल बनने के बाद सूरत नगर निगम के कमिश्नर बीएन पानी और डिप्टी हेल्थ कमिश्नर डॉक्टर आशीष नाइक ने यहां का दौरा किया और इसके बाद अस्पताल को हरी झंडी मिली.
पोती के नाम पर रखा अस्पताल का नाम


खास बात ये है कि कादर शेख ने इस अस्पताल का नाम अपनी पोती हीबा के नाम पर रखा है. अस्पताल को हरी झंडी मिलने के बाद कादर ने कहा, 'ये अस्पताल सबके लिए है. इसमें न जाति, न पंथ और न धार्मिक भेदभाव होगा. मैं चांदी का चम्मच मुंह में लेकर पैदा नहीं हुआ था. मैंने भी आर्थिक परेशानियां झेली हैं और कठिन परिश्रम किया है. अब मैं आर्थिक रूप से मजबूत हो गया हूं. इसलिए मैंने इस मुश्किल समय में जरूरतमंदों की तरफ मदद का हाथ बढ़ाने का फैसला लिया है.'
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