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गुजरात चुनाव: कांग्रेस के इस नेता ने किया था कास्ट पॉलिटिक्स का आगाज, 'KHAM' थ्योरी से सर्वाधिक सीटें जीत बनाया रिकॉर्ड

पत्रकारिता से राजनीति में प्रवेश करने वाले माधव सिंह सोलंकी ने 'KHAM (खाम)' थ्योरी लाकर कांग्रेस को 1980 में 182 में 141 सीटें जीता दीं.

पत्रकारिता से राजनीति में प्रवेश करने वाले माधव सिंह सोलंकी ने 'KHAM (खाम)' थ्योरी लाकर कांग्रेस को 1980 में 182 में 141 सीटें जीता दीं.

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हाइलाइट्स

कांग्रेस का नारा था 'जात पर न पात पर..' लेकिन माधव सिंह सोलंकी ने इसके इतर 'खाम थ्योरी' बनाई
'KHAM थ्योरी' के आसरे माधव सिंह सोलंकी ने 182 में से 149 सीटें जीतकर रिकॉर्ड कायम कर दिया

अहमदाबाद. गुजरात में 15वीं विधानसभा के लिए चुनावी संग्राम शुरू हो गया है. गुजरात में पहली बार 1960 में विधानसभा चुनाव कराए गए. 132 सीटों के लिए हुए चुनाव में 112 सीटों पर कांग्रेस जीती थी. 1960 से लेकर 1975 तक राज्य की सत्ता पर कांग्रेस का एकछत्र राज रहा, लेकिन इसके बाद यहां जनता पार्टी ने कांग्रेस को मात दे दी. 1980 में जनता पार्टी की सरकार गिरने के बाद कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन लागू रहा था. आपातकाल के बाद यहां की राजनीति में माधव सिंह सोलंकी जैसे धुरंधर राजनेता की एंट्री होती है और गुजरात की राजनीति एक नई करवट लेती है. राज्य में कांग्रेस को जिताने की जिम्मेदारी 107 दिन तक सीएम रहे चुके माधव सिंह सोलंकी को दी गई. वकालत से राजनीति में प्रवेश करने वाले माधव सिंह सोलंकी KHAM (खाम) थ्योरी ले आए. इसमें उन्होंने क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासियों के साथ मुसलमान मतदाताओं को लुभाने का ऐसा दांव चला कि कांग्रेस ने 182 में 141 सीटें जीत लीं.

‘जात पर न पात पर मुहर लगेगी हाथ पर’ जैसे नारों के साथ चुनावों में जाने वाली कांग्रेस गुजरात में ‘खाम थ्योरी’ के साथ जातीय गोलबंदी करने में सफल हो गई थी. विपक्ष भी इस थ्योरी की काट खोजने में जुटा था. माधव सिंह सोलंकी पांच साल तक मुख्यमंत्री रहे. इसके बाद 1985 के चुनाव से पहले माधव सोलंकी ने राणे कमीशन की सिफारिशों को लागू कर दिया. इससे राज्य में पिछड़ी जातियों के आरक्षण को बढ़ाकर 10 से 28 फीसद कर दिया. इसमें शामिल जातियों की संख्या बढ़ाकर 82 की बजाए 104 कर दी गई. सोलंकी के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया, लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या और ‘KHAM थ्योरी’ के आसरे माधव सिंह सोलंकी ने 182 में से 149 सीटें जीतकर रिकॉर्ड कायम कर दिया. यह गुजरात के सियासी किले में ऐसा रिकॉर्ड है, जिसे पूरे गुजरात को भगवा रंग में रंग देने वाले नरेंद्र मोदी भी नहीं भेद पाए हैं. बीजेपी को इतनी सीटें यहां कभी नहीं मिलीं.

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‘जात पर न पात पर मुहर लगेगी हाथ पर’ जैसे नारों के साथ चुनावों में जाने वाली कांग्रेस गुजरात में ‘खाम थ्योरी’ के साथ जातीय गोलबंदी करने में सफल हो गई थी.

आरक्षण आंदोलन की आग में चली गई कुर्सी
माधव सिंह का जन्म  30 जुलाई 1927 को पिल्लुड़ा, बड़ौदा राज्य, ब्रिटिश भारत में हुआ था. पेशे से वह एक वकील थे, सोलंकी 1977 में बहुत कम समय के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे. इसके बाद फिर एक बार वह साल 1980 में सत्ता में वापस आए. 11, मार्च 1985 को वे फिर से गुजरात के मुख्यमंत्री बने, हालांकि इसके बाद गुजरात में आरक्षण विरोधी आंदोलन हो गया. हिंसा हुई तो सोलंकी को इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन जातीय राजनीति में माहिर माधव सोलंकी का सबसे ज्यादा सीटों पर पार्टी को जिताने का यह रिकॉर्ड गुजरात की राजनीति में अब तक बरकरार है. वह गुजरात के चार बार सीएम बने.

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जातीय राजनीति में माहिर माधव सोलंकी का सबसे ज्यादा सीटों पर पार्टी को जिताने का रिकॉर्ड गुजरात की राजनीति में अब तक बरकरार है.

गुजरात के हर चुनाव में होती है ‘KHAM’ थ्योरी की चर्चा
गुजरात में बीते 27 साल से बीजेपी की सरकार है. गुजरात में कमल खिलाकर सीएम बने नरेंद्र मोदी आज देश के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन इतने दशकों बाद जब भी चुनाव होते हैं तो खाम थ्योरी की चर्चा होती है. यह पहली ऐसी सोशल थ्योरी थी जिसने जातीय लामबंदी की शुरुआत की. खाम थ्योरी की सफलता के बाद देश के दूसरे राज्यों में भी इसके प्रयोग हुए. वोट प्रतिशत के हिसाब से देखें तो माधव सिंह सोलंकी के खाम प्रयोग के बाद कांग्रेस को गुजरात में 1980 में 51.04 फीसदी वोट मिले और सीटें 75 से सीधे 141 हो गई थीं. तो वहीं 1985 में 55.55 प्रतिशत वोट मिला और सीटों की संख्या 149 पर पहुंच गई.

2022 में त्रिकोणीय लड़ाई के आसार
खाम की काट के तौर पर आई कोकम थ्योरी भी कारगर रही 1990 के चुनाव में चिमनलाल पटेल की अगुआई वाले जनता दल को 29.36 प्रतिशत वोट मिले और 70 सीटें मिलीं. गुजरात की बीजेपी सरकार की नजर खाम थ्योरी से बने रिकॉर्ड पर हमेशा ही रही है. गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 में त्रिकोणीय लड़ाई के आसार हैं. इसमें क्या बीजेपी को लाभ मिलेगा, यह तो नतीजों में ही स्पष्ट हो पाएगा.

Tags: Assembly elections, Caste politics, Gujarat Assembly Elections, Gujarat news

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