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Jagannath Rath Yatra: अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू, अमित शाह ने की मंगला आरती

गुजरात के सीएम विजय रुपाणी भी रथ यात्रा में शामिल हुए. ANI

गुजरात के सीएम विजय रुपाणी भी रथ यात्रा में शामिल हुए. ANI

Jagannath Temple Rath Yatra: अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की वार्षिक रथयात्रा, इस बार कोरोना वायरस जनित महामारी के कारण कर्फ्यू के बीच निकाली जा रही है, ताकि लोग इसमें शामिल न हो सकें. आमतौर पर हर साल रथयात्रा में भारी भीड़ एकत्र होती है.

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    अहमदाबाद. गुजरात के अहमदाबाद स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर ( Jagannath Temple in Ahmedabad) से रथयात्रा शुरू हो गई है. इस मौके पर रथयात्रा में शामिल होने और भगवान के दर्शन पूजन के लिए राज्य के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी (Vijay Rupani) भी पहुंचे. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रथयात्रा शुरू होने से पहले जगन्नाथ मंदिर में मंगला आरती की और मंदिर के बाहर हाथियों को भोजन कराया. मंगला आरती के बाद रथयात्रा कार्यक्रम शुरू हुआ. रथयात्रा को देखते हुए अहमदाबाद स्थित जगन्नाथ मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया है.

    बता दें कि अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की वार्षिक रथयात्रा, इस बार कोरोना वायरस जनित महामारी के कारण कर्फ्यू के बीच निकाली जा रही है, ताकि लोग इसमें शामिल न हो सकें. आमतौर पर हर साल रथयात्रा में भारी भीड़ एकत्र होती है.

    अधिकारियों के मुताबिक जनता के भाग न लेने के अलावा, 144वीं रथयात्रा का आयोजन सादे तरीके से कम समय में किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस बार 12 घंटे के स्थान पर चार-पांच घंटे में यात्रा समाप्त हो जाएगी, हालांकि यह पहले की तरह 19 किलोमीटर की दूरी तय करेगी.

    राज्य प्रशासन और मंदिर अधिकारियों ने जन भागीदारी के बिना सादे तरीके से रथयात्रा निकालने के सारे इंतजाम किये हैं. अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त की गई है, ताकि कोविड-19 नियमों का पालन करते हुए यात्रा का आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके.

    महामारी को देखते हुए राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तीन रथ और दो अन्य वाहनों को छोड़कर कोई अन्य वाहन, अखाड़े, हाथी या सजे हुए ट्रकों को यात्रा में शामिल होने की अनुमति नहीं है. लोगों को यात्रा से दूर रखने के लिए पूरी यात्रा के मार्ग पर भोर से दोपहर तक कर्फ्यू लागू किया जाएगा.

    पारंपरिक तौर पर रथों के नेतृत्व में यात्रा, चार सौ साल पुराने मंदिर से सुबह सात बजे शुरू होती है और रात आठ बजे लौटकर समाप्त होती है. इस बार केवल 60 युवाओं को अनुमति दी गई है, जिसमें से प्रत्येक रथ को 20 युवा खीचेंगे.

    इस साल की रथयात्रा में मुख्य पुजारी महंत दिलीप दासजी, रथ पर कुछ पुजारी, मंदिर के न्यासी और 60 युवाओं के अलावा किसी को शामिल होने की अनुमति नहीं है.

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