गंगा में शव प्रवाहित करने पर लिखी थी कविता, गुजरात साहित्‍य अकादमी ने कहा 'अराजकता'

पारुल खाखर ने लिखी थी कविता. (Pic- Youtube)

पारुल खाखर ने लिखी थी कविता. (Pic- Youtube)

संपादकीय में कहा गया है, 'ऐसे लोग भारत में जल्दी से अराजकता फैलाना चाहते हैं...वे सभी मोर्चों पर सक्रिय हैं और इसी तरह वे गंदे इरादों से साहित्य में कूद गए हैं.'

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अहमदाबाद. पिछले दिनों कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) की दूसरी लहर के दौरान उत्‍तर प्रदेश और बिहार के कुछ इलाकों में गंगा नदी में शव फेंके (Dead Bodies in Ganga) जाने की घटनाएं सामने आई थीं. इस घटना को लेकर कवियित्री पारुल खाखर ने एक कविता लिखी थी. इस कविता की गुजरात साहित्‍य अकादमी (Gujarat Sahitya Akademi) ने अपने जून संस्‍करण के एक संपादकीय में आलोचना की है. इसमें इसे अराजकता कहा गया है. साथ ही अकादमी की ओर से यह भी कहा गया है कि जिन लोगों ने इस कविता पर चर्चा की और इसे प्रसारित किया वे 'साहित्‍यिक नक्‍सल' हैं.

गुजरात साहित्‍य अकादमी के अध्यक्ष विष्णु पांड्या ने संपादकीय लिखने की पुष्टि की है. हालांकि इसमें विशेष रूप से शव वाहिनी गंगा का उल्लेख नहीं है. उन्होंने यह भी पुष्टि की कि उनका मतलब उस कविता से है, जिसकी काफी प्रशंसा हुई है और कई भाषाओं में उसका अनुवाद किया गया है.

कविता को 'आंदोलन की स्थिति में व्यक्त व्यर्थ क्रोध' के रूप में वर्णित करते हुए संपादकीय में कहा गया है, 'शब्दों का उन ताकतों द्वारा दुरुपयोग किया गया था जो केंद्र विरोधी और केंद्र की राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी हैं. उक्त कविता का इस्तेमाल ऐसे तत्वों द्वारा कंधे से कंधा मिलाकर किया गया है, जिन्होंने एक साजिश शुरू की है, जिनकी प्रतिबद्धता भारत के लिए नहीं बल्कि कुछ और है, जो वामपंथी, तथाकथित उदारवादी हैं, जिनकी ओर कोई ध्यान नहीं देता है...ऐसे लोग भारत में जल्दी से अराजकता फैलाना चाहते हैं...वे सभी मोर्चों पर सक्रिय हैं और इसी तरह वे गंदे इरादों से साहित्य में कूद गए हैं.'

संपादकीय में यह भी कहा गया है, 'इन साहित्यिक नक्सलियों का उद्देश्य उन लोगों के एक वर्ग को प्रभावित करना है जो अपने दुख और खुशी को इससे (कविता) जोड़ेंगे.'


वहीं संपादकीय में कहा गया है कि अकादमी ने पारुल खाखर के पहले के कार्यों को प्रकाशित किया था और अब अगर उन्होंने भविष्य में कुछ अच्छी चीज लिखी तो गुजराती पाठकों द्वारा उनका स्वागत किया जाएगा.'

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