COVID-19: कोरोना से बेटे की हुई मौत तो सदमे में चली गई मां, हाल जानने बार-बार आती हैं अस्पताल

 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

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Coronavirus in Gujarat: राज्य में कोविड-19 से मारे जाने वालों के परिजन इसी अवस्था जूझ रहे हैं. अवसाद और सदम में वह वास्तविकता से दूर हैं और परिजनों को भी इस दुःख को खत्म करने काई उचित रास्ता नजर नहीं आ रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 20, 2021, 1:55 PM IST
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अहमदाबाद. गुजरात (Coronavirus in Gujarat) स्थित अहमदाबाद में 1,200 बेड को कोविड अस्पताल के बाहर 60 वर्षीय एक बेबस मां पूनम सोलंकी अपने मर चुके बेटे के इंतजार में अब भी उसी जगह आ जाती है, जहां उनकी बेटे से आखिरी बार बात हुई थी. उसे यकीन नहीं होता कि 6 महीने पहले बीते साल सितंबर में उसके 30 वर्षीय बेटे महेंद्र की मौत हो गई है. अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार पूनम के बेटे की मौत 24 सितंबर 2020 को ही हो गई थी.

पूनम सिविल अस्पताल में पहुंचकर फोन लगाकर कहती हैं, 'कैसे हो बेटा? क्या वो आपको अच्छा खाना दे रहे हैं? मैं तुम्हारे स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रही हूं.' करीब पांच मिनट तक चली कॉल कट जाती है. कई लोगों को लगता है कि पूनम भी अपने किसी प्रियजन का हाल ले रही है, लेकिन हकीकत यह नहीं है.

रिश्तेदार ने बताया कि पूनम को इस बात की जानकारी है कि महेंद्र अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन कई बार वह सदमे में चली जाती हैं और अपने बेटे से मिलने के लिए अक्सर ही सिविल अस्पताल आ जाती हैं. रिपोर्ट के अनुसार रिश्तेदार ने कहा कि 'महेंद्र नारोल में एक दूध पार्लर चलाता था. संक्रमण के कारण मौत से पहले लगभग 5-6 दिन पहले महेंद्र को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वह अपनी मां के बहुत करीब थे. वह जानती है कि उसका बेटा अब नहीं है, लेकिन कई बार वह इस बात को भूल कर अपने बेटे से मिलने अस्पताल आ जाती हैं.'

अवसाद और सदमें में हैं रिश्तेदार
रिश्तेदार ने कहा, 'कई बार हम पूनम को ठीक उसी जगह पर सिविल में लाते हैं, जहां उसने आखिरी बार महेंद्र के साथ बातचीत की थी ताकि उसे कुछ शांति मिल सके. हम जानते हैं कि यह ठीक बात नहीं है लेकिन हमारे पास उसके दुःख को संभालने में मदद करने का और कोई बेहतर तरीका नहीं है.' राज्य में कोविड-19 से मारे जाने वालों के परिजन इसी अवस्था जूझ रहे हैं. अवसाद और सदम में वह वास्तविकता से दूर हैं और परिजनों को भी इस दुःख को खत्म करने काई उचित रास्ता नजर नहीं आ रहा है.



अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ.  केविन पटेल ने कहा कि हाल ही के एक मामले में एक 18 वर्षीय लड़की अपने पिता की जानकारी लेने के लिए अस्पताल आती है. रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर ने बताया कि 'एक महीने पहले पिता की मृत्यु हो गई और बेटी सभी रिवाजों का हिस्सा थी. लेकिन वह इसे स्वीकार नहीं कर पाई है और उसे लगता है कि वह अपने पिता के बहुत करीब है. लगातार इलाज के बाद एक दिन वह 10 मिनट से अधिक रोई. इसके बाद उसने अपने पिता के निधन की वास्तविकता को स्वीकार किया.
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