अब गुजराती में भी होगी इंजीनियरिंग की पढ़ाई, AICTE ने लिया फैसला

क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों को अनुमति देने के पीछे का कारण ग्रामीण के साथ-साथ आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों के सपनों को पूरा करना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों को अनुमति देने के पीछे का कारण ग्रामीण के साथ-साथ आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों के सपनों को पूरा करना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Engineering in Regional Language: भविष्य में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के लिए 11 और भाषाओं को मान्यता देने पर विचार किया जा रहा है परिषद द्वारा ऑनलाइन पोर्टल में सभी भाषाओं में शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी.

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गांधीनगर. गुजरात (Gujarat) के छात्र अब गुजराती भाषा (Gujarati Language) में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर सकेंगे. ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एज्युकेशन (AICTE) ने गुजरात सहित पूरे देश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों की बढ़ती कमी को दूर करने के लिए अंग्रेजी के अलावा आठ भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की पेशकश करने का फैसला किया है. नए शैक्षणिक सत्र से इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विभिन्न भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं.

गुजरात में अधिकांश छात्र अंग्रेजी पाठ्यक्रम को ठीक से नहीं जानते हैं, इसलिए जिन परिस्थितियों में वे इस क्षेत्र से भाग रहे हैं. निर्णय के अनुसार, अब छात्र गुजराती में पाठ्यक्रम का चयन भी कर सकेंगे. क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों को अनुमति देने के पीछे का कारण ग्रामीण के साथ-साथ आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों के सपनों को पूरा करना है.

काउंसिल फॉर टेक्निकल एज्युकेशन अंग्रेजी, गुजराती, हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मराठी, मलयालम में पाठ्यक्रम प्रदान करना चाहती है. AICTE के सूत्रों ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से छात्र इंजीनियरिंग के बुनियादी सिद्धांतों को बेहतर और अधिक आसानी से समझ सकेंगे. इसी वजह से पाठ्यक्रम में भाषाओं को जोड़ा गया है. क्षेत्रीय भाषा में पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए परिषद को लगभग 500 अभ्यावेदन प्राप्त हुए. भविष्य में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के लिए 11 और भाषाओं को मान्यता देने पर विचार किया जा रहा है. परिषद द्वारा ऑनलाइन पोर्टल में सभी भाषाओं में शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी.


सरकार के शिक्षा विभाग के अनुसार, गुजरात में इंजीनियरिंग क्षेत्र की सीटों की संख्या 2019-20 में 73,500 थी, लेकिन हर साल 45 से 55 प्रतिशत सीटें खाली रहती हैं, जिससे 2020-21 में सीटों की संख्या घटकर 63851 रही है. इसी तरह कक्षा-10 के बाद डिप्लोमा सीटों की संख्या एक वर्ष में 74715 से घटकर 56085 हो गई है.

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