वडोदरा लोकसभा सीट: महिलाओं के दबदबे वाली सीट पर फिर चलेगी मोदी लहर!

वडोदरा लोकसभा सीट: महिलाओं के दबदबे वाली सीट पर फिर चलेगी मोदी लहर!
वडोदरा सीट पर कांग्रेसी उम्मीदवार प्रशांत पटेल(बाएं) और बीजेपी की प्रत्याशी रंजन भट्ट् (दाएं)

वडोदरा गुजरात का एक महत्वपूर्ण शहर है. यह उद्यानों, औद्योगिक राजधानी और गुजरात के तीसरे सबसे अधिक आबादी वाले शहर के रूप में भी जाना जाता है.

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किसी सीट के बारे में अगर महज इतना कह दिया जाए कि यहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लड़े थे, तो इतना ही काफी है. वडोदरा ऐसी ही जगह है. नरेंद्र मोदी 2014 में चुनाव लड़े थे. तब वो प्रधानमंत्री नहीं थे. उसके बाद उन्होंने इस सीट से इस्तीफा दे दिया. वडोदरा से एक और चर्चित सितारे ने चुनाव लड़ा और जीता है. वो थीं दीपिका चिखलिया. 1991 में टीवी धारावाहिक रामायण की सीता दीपिका ने जीत दर्ज की थी.

वडोदरा गुजरात का एक महत्वपूर्ण शहर है. यह उद्यानों, औद्योगिक राजधानी और गुजरात के तीसरे सबसे अधिक आबादी वाले शहर के रूप में भी जाना जाता है. इसे बड़ौदा भी कहा जाता है. यहां की क्रिकेट टीम को अब भी बड़ौदा ही कहते हैं. सार्वजिनक और निजी क्षेत्रों की कंपनियों का प्रतिनिधित्व इस जगह पर देखा जा सकता है.

पिछले चुनाव में कैसा था मिजाज



बीजेपी की रंजन भट्ट यहां सांसद हैं. नरेंद्र मोदी के इस सीट को छोड़ने की वजह से हुए उपचुनाव में भट्ट विजयी हुए. वडोदरा सीट पहले बड़ौदा के नाम से रजिस्टर्ड थी. 2009 में वडोदरा सीट के नाम पर यहां चुनाव हुआ और बीजेपी के बालकृष्ण शुक्ला ने चुनाव जीता. उन्होंने कांग्रेस के दलीप सिंह गायकवाड़ को शिकस्त दी. इसके बाद 2014 में यहां से ऐतिहासिक चुनाव हुआ और नरेंद्र मोदी ने अपने जीवन का पहला लोकसभा चुनाव इस सीट से लड़ा.



मधुसूदन मिस्त्री


कांग्रेस ने उनके सामने वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री को मौका दिया था, लेकिन वह मोदी की लोकप्रियता के सामने कहीं नहीं टिक पाए. नरेंद्र मोदी को साढ़े आठ लाख से ज्यादा वोट मिले, जबकि मधुसूदन मिस्त्री पौने तीन लाख वोट ही पा सके. मोदी ने उन्हें 5 लाख 70 हजार 128 मतों से हराया.

उपचुनाव में रंजनबेन भट्ट को 5,26,763 वोट हासिल हुए थे. उनके खिलाफ खड़े हुए कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र रावत को मात्र 1,97,256 वोट मिले थे.

इस सीट पर महिलाओं और बीजेपी का भी दबदबा रहा है. 1991 में बीजेपी ने दीपिका चिखलिया, 1998-1999 और 2004 में जया बेन ठक्कर को प्रत्याशी बनाया था. कांग्रेस ने केवल 1999 में डॉ. उर्मिला बेन पटेल को टिकट दिया था. तब भी सामने बीजेपी की महिला उम्मीदवार जया बेन ठक्कर थीं, जिनसे उन्हें हारना पड़ा था. इसके बाद 2014 के उपचुनाव में पीएम मोदी द्वारा खाली की गई सीट से रंजन बेन भट्ट को टिकट दिया गया, जिस पर उन्होंने जीत हासिल की. पहली बार 1952 में यहां से इन्दुबेन अमीन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतीं, जबकि फतेहसिंह राव गायकवाड़ इस सीट से चार बार सांसद रहे.

कौन हैं प्रत्याशी

इस सीट पर रंजन बेन का मुकाबला कांग्रेस के प्रशांत पटेल से है. रंजनबेन शहर की उप महापौर भी रह चुकी हैं. सांसद निधि से खर्च के मामले में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है. उनकी निधि से जारी 24.83 करोड़ रुपये का वह लगभग 95 प्रतिशत विकास कार्यों पर खर्च करने में कामयाब रही हैं.

रामायण धारावाहिक में सीता का किरदार निभाने के बाद दीपिका चिखलिया देश भर में मशहूर हो गई थीं.


इस सीट की खासियत यह है कि यहां से महिला उम्मीदवार ने हमेशा जीत दिलाई है. इसके पहले 1991 में भाजपा की दीपिका चिखलिया ने कांग्रेस के रणजीत सिंह गायकवाड़ को, 1998 और 2004 में भाजपा की जया बेन ने कांग्रेस के नरेंद्र रावत को हराया था. 1999 में दो महिला उम्मीदवारों के बीच जंग थी, जिसमें भाजपा की जया बेन ठक्कर ने कांग्रेस की डॉ. उर्मिला बेन पटेल को हराया था.

सामाजिक समीकरण

साल 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की कुल जनसंख्या 21 लाख 7 हजार है. हालांकि एक अनुमान के मुताबिक अब यहां जनसंख्‍या 23 लाख के करीब है. 2018 की वोटर लिस्ट के मुताबिक, यहां 17,51,637 वोटर हैं. अनुसूचित जाति की आबादी 6.37 और 6.17 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की है. करीब 10 फीसदी यहां मुस्लिम आबादी है.

वडोदरा गुजरात का ऐसा शहर है जहां हिंदी भाषियों का खासा प्रभाव है. खासकर यूपी मूल के लोगों का बड़ा प्रभाव है. इस क्षेत्र की दो विधानसभा सीट ऐसी हैं, जहां से यूपी मूल के नेता विधायक भी बनते रहे हैं.
वडोदरा लोकसभा सीट के तहत सावली, सयाजीगंज, मंजलपुर, वाघोडिया, अकोटा, रावपुरा और वडोदरा सिटी विधानसभा सीट आती हैं. सातों सीटें बीजेपी के कब्जे में हैं.

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First published: May 8, 2019, 4:31 PM IST
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