गुरुग्राम: दो महीने में 117 नवजात और 7 गर्भवतियों की मौत, प्रशासन में मचा हड़कंप

दिए गए जांच के आदेश, स्वास्‍थ्य विभाग ने पड़ताल के लिए किया टीम का गठन

News18Hindi
Updated: June 20, 2019, 3:07 PM IST
गुरुग्राम: दो महीने में 117 नवजात और 7 गर्भवतियों की मौत, प्रशासन में मचा हड़कंप
मामला सामने आने के बाद उपायुक्त अमित खत्री इसे गंभीरत से लेते हुए जांच करवाने की बात तो कर रहे हैं लेकिन इसके साथ ही वे इसको ज्यादा हाईलाइट नहीं करने पर भी जोर दे रहे हैं.
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Updated: June 20, 2019, 3:07 PM IST
गुरुग्राम से चौंकाने वाली खबर है. यहां पर सिर्फ दो महीने के अंदर ही 117 नवजात सहित 7 गर्भवतियों की मौत हो गई है. जिले में हुई इन मौत के आंकडेां ने अब प्रशासन के भी हाथ पैर फुला दिए हैं. मौत के यह दहलाने वाले आंकड़े सामने आने के बाद अब जिला उपायुक्त ने मामले में संज्ञान लेते हुए मामले की जांच के आदेश दिए हैं. कहने को तो साइबर सिटी के नाम से प्रसिद्ध गुरुग्राम अपनी चमक दमक के लिए मशहूर है लकिन अब ऐसे आंकड़े सामने आने के बाद प्रशासन से लेकर स्वास्‍थ्य विभाग तक में हड़कंप मच गया है. यह आंकड़े भी जिला स्वास्‍थ्य विभाग ने जारी किए हैं.

मामले को न करें हाईलाइट


मामला सामने आने के बाद उपायुक्त अमित खत्री इसे गंभीरत से लेते हुए जांच करवाने की बात तो कर रहे हैं लेकिन इसके साथ ही वे इसको ज्यादा हाईलाइट नहीं करने पर भी जोर दे रहे हैं. उन्होंने बतायाकि स्वास्‍थ्‍य अधिकारियों से मामले के संबंध में जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कह दिया गया है. खत्री के अनुसार इस मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है. यह टीम पता लगाएगी कि अचानक हुई इतनी मौतों का कारण क्या रहा है. स्वास्‍थ्य विभाग के अनुसार एक लाख शिशु पर एक की मौत होना सामान्य है लेकिन हाल के आंकड़े चौंकाने वाले हैं.

सभी को जारी किए आदेश

खत्री के अनुसार जिले के अर्बन और रूरल इचार्ज को आदेश जारी कर दिए गए हैं कि संबंधित क्षेत्र में पोस्ट और नियो नेटल डेथ के आंकड़े और गर्भवती महिलाओं की जानकारी स्वास्‍थ्य विभाग की टीम को दी जाए, जिससे इनका रिव्यू कर मामले की जांच सही तरीके से की जा सके. हालांकि इस पूरे मामले से अब जिला स्वास्‍थ्य विभाग अपना पल्ला झाड़ रहा है, लेकिन यह आंकड़ा दिनों दिन बढ़ता जा रहा है.

मौतों के पीछे का रहस्य
खत्री ने बताया कि ज्यादातर नवजात बच्चों की मौत जानकारी के अभाव के कारण हुई है. जैसे सही तरीके से दूध न पिलाना, बच्चे को डकार न दिलवाना, सफाई नहीं रखना और डायरिया जैसे कारण सबसे ज्यादा सामने आए हैं. इसमें जागरुकता का अभाव भी काफी देखने को मिला है.
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