लॉकडाउन के बावजूद यहां 25 दिन में खरीदा गया रिकॉर्ड 70 लाख मिट्रिक टन गेहूं
Chandigarh-City News in Hindi

लॉकडाउन के बावजूद यहां 25 दिन में खरीदा गया रिकॉर्ड 70 लाख मिट्रिक टन गेहूं
अभी जारी है गेहूं की खरीद

एक-दो दिन में हरियाणा सरकार पूरा कर लेगी इस साल गेहूं खरीदने का अपना लक्ष्य, 44 लाख टन से अधिक गेहूं गोदाम में पहुंचा

  • Share this:
चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने काफी तेजी दिखाते हुए 25 दिन में ही 69.44 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद पूरी कर ली है. इससे 4,55,337 किसानों को लाभ मिला है. हरियाणा सरकार (Haryana Government) इस साल 75 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन किसानों की सहायता के लिए वो 80 लाख टक तक पहुंच सकती है. लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) की वजह से गेहूं खरीद इस साल 1 की जगह 20 अप्रैल को शुरू हुई थी. इसके बावजूद इतनी तेजी से खरीद पूरी करने की तरफ सरकार बढ़ चुकी है.

डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के मुताबिक 44 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं गोदाम तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. जहां तक भुगतान की बात है तो प्रदेश सरकार अब तक 5250 करोड़ रुपये आढ़तियों के खाते में डाल चुकी है.

उधर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बताया कि अब तक 2,55,111 किसानों (Farmers) से कुल 7.12 लाख मीट्रिक टन सरसों की खरीद की गई है. सरसों की खरीद 15 अप्रैल से शुरू हुई थी. इसी तरह अब तक 1,854 किसानों से 3,978.87 मीट्रिक टन चने की खरीद की जा चुकी है.



Wheat purchasing, Wheat Procurement in haryana, haryana mandi, Haryana farmers, Meri Fasal Mera Byora, Agriculture, FCI and Food and Supplies Department, Covid-19, गेहूं की खरीद, हरियाणा में गेहूं की खरीद, हरियाणा की मंडी, हरियाणा के किसान, मेरा फसल मेरा ब्योरा, कृषि विभाग, एफसीआई, खाद्य और आपूर्ति विभाग, कोविड-19
भारत के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में शामिल है हरियाणा (Photo-Ministry of agriculture)

चार एजेंसियां कर रही हैं खरीद

राज्य में गेहूं की खरीद मुख्य रूप से चार सरकारी खरीद एजेंसियां कर रही हैं. इसमें सबसे ज्यादा 45 प्रतिशत हैफेड, उपभोक्ता विभाग 25 प्रतिशत,  हरियाणा भंडागार निगम 18 फीसदी और भारतीय खाद्य निगम 12 प्रतिशत की खरीद कर रही है.

गेहूं की खरीद 1925 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों की 4425 रुपये और चने की 4875 रुपये प्रति क्विंटल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP-Minimum Support Price)  के साथ खरीद हो रही है. इस साल सरकार ने यह खरीद मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के जरिए की है. इस पर रजिस्टर्ड किसानों को मोबाइल पर मैसेज भेजकर बारी-बारी से मंडी में बुलाया गया, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे.

ये भी पढ़ें: Economic Package: क्या इसलिए एग्रीकल्चर सप्लाई चेन में रिफॉर्म करना चाहते हैं पीएम मोदी?

कोरोना वायरस राहत पैकेज: मोदी सरकार ने 2 साल पहले ही लिख दी थी कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार की स्क्रिप्ट!
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading