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24 घंटे में 50 से ज्यादा सिगरेट पीने के बराबर हो गया दिल्ली में Pollution!

News18Hindi
Updated: November 5, 2019, 12:59 PM IST
24 घंटे में 50 से ज्यादा सिगरेट पीने के बराबर हो गया दिल्ली में Pollution!
रविवार को दिल्ली के आनंद विहार में सबसे ज्यादा प्रदूषण था

डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली में अब कोई नॉन-स्मोकर नहीं रह गया है. जो सिगरेट नहीं पीते हैं उन पर भी स्मोकर जितना खतरा है. उधर, केंद्र सरकार (Central Government) की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के वायु प्रदूषण (Air Pollution in Delhi) में सोमवार को पराली (Parali) का योगदान 25 फीसदी है.

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  • Last Updated: November 5, 2019, 12:59 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) इस सीजन के टॉप पर पहुंच गया है. रविवार को आनंद विहार (Anand Vihar) में पीएम 2.5 का स्तर 1618 और पीएम 10 तो 1817 तक चला गया था. डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली के वायु प्रदूषण (Air Pollution in Delhi) का स्तर इतना खतरनाक है कि यदि इतने पीएम 2.5 में कोई 24 घंटे रहता है तो यह 50 से अधिक सिगरेट (Cigarette) पीने के बराबर है. प्रदूषण से आम जन जीवन पर पड़ने वाले दुष्‍प्रभाव को लेकर कई सर्वे कर चुके गुड़गांव के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. हिमांशु गर्ग कहते हैं यदि हम समय रहते नहीं संभले तो दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में अगले एक दशक में फेंफड़े का कैंसर (Lung Cancer) इतना बढ़ जाएगा कि कोई उम्मीद भी नहीं करेगा.

फिजिशियन डॉ. सुरेंद्र दत्ता बताते हैं कि पीएम 2.5 यदि 500 से 1000 के बीच है तो रोजाना 20 से 40 सिगरेट पीने के बराबर है. ऐसे में दिल्ली में प्रदूषण के खतरे को समझा जा सकता है. हालात ये हैं कि दिल्ली में अब कोई नॉन-स्मोकर नहीं रह गया है. जो सिगरेट नहीं पीते हैं उन पर भी स्मोकर जितना खतरा है.

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दत्ता कहते हैं कि स्‍कूलों (Schools) को बंद करना और मास्‍क (Mask) लगाना ही इस समस्या का समाधान नहीं है. इसकी एक शॉर्ट टर्म और एक लॉन्ग टर्म प्‍लानिंग होनी चाहिए, वरना प्रदूषण की भयावहता के कारण इन शहरों से लोगों का पलायन होने लगेगा. एक सर्वे में ही 30-40 फीसदी लोग ने दिल्ली को छोड़ने की इच्छा जाहिर की है.

डॉ. हिमांशु गर्ग कहते हैं कि दिल्ली में इतना प्रदूषण हो गया है कि यहां साधारण मास्क काम नहीं करेगा. इसलिए इस प्रदूषण से थोड़ा बचना है तो कम से कम एन-95 मास्‍क लगाएं. प्रदूषण की समस्या कई देशों में है. लेकिन अंतर यह है कि हमने इससे जुड़ी चिंताओं को कभी गंभीरता से नहीं लिया. इसे रोकने के लिए शॉर्ट टर्म और लांग टर्म समाधान खोजने होंगे. कंस्‍ट्रक्‍शन पर मॉनिटरिंग बढ़ानी होगी. सड़कों पर रोज पानी छिड़का जाना चाहिए. पराली और कूड़ा जलाने पर सख्‍ती से रोक लगनी चाहिए. वाहन शेयरिंग को प्रोत्साहित किया जाए.  लॉन्ग टर्म समाधान के तहत हमें पौधारोपण को बढ़ावा देना होगा. इको फ्रेंडली वाहनों को प्रोत्साहित किया जाए. सार्वजनिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाए.

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दिल्ली के प्रदूषण में कितना है पराली का योगदान
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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की संस्था है 'सफर' यानी इंडिया सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR-India) के मुताबिक रविवार को दिल्ली के प्रदूषण में पराली का हिस्सा सिर्फ 12 फीसदी था. जो सोमवार को बढ़कर 25 फीसदी हो गया. 25 अक्टूबर को यह 4 फीसदी था. यह 31 अक्टूबर को अब तक के अधिकतम स्तर 44 फीसदी पर था.

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क्या होता है PM 10, PM 2.5 और एयर क्वालिटी इंडेक्स?

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First published: November 4, 2019, 1:04 PM IST
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