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Kisan Andolan: दिल्‍ली के सिंघु बॉर्डर की तरह अंबाला में किसानों का धरना जारी, शंभु टोल प्लाजा पर सजा कीर्तन दरबार

 शंभु टोल प्लाजा पर किसान दिन रात आंदोलन कर रहे हैं.

शंभु टोल प्लाजा पर किसान दिन रात आंदोलन कर रहे हैं.

अंबाला के शंभु टोल प्लाजा (Shambhu Toll Plaza) पर दिल्‍ली के सिंघु बॉर्डर जैसा नजारा दिखने लगा है. यहां पिछले 12 दिनों से किसान लगातार कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं.

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    अंबाला. दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन (Kisan Andolan) का आज 41वां दिन है, तो वहीं शंभु टोल प्लाजा (Shambhu Toll Plaza) पर किसान पिछले 12 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं. अब शंभु बॉर्डर का नजारा भी दिल्ली के सिंघु बॉर्डर जैसा लगने लगा है, क्योंकि यहां भी किसान दिन रात आंदोलन कर रहे हैं. यही नहीं, अब तो शंभु टोल प्लाजा पर कीर्तन दरबार भी सजने शुरू हो गए हैं.

    बता दें कि आज पंजाब से संगीत अकादमी के बच्चों ने शंभु टोल प्लाजा पर कीर्तन कर किसानों का हौसला बढ़ाया और किसान आंदोलन में किसानों की जीत की कामना की. पंजाब से आए जत्‍थे ने शंभु टोल प्लाजा पर बैठे किसानों को कंबल भी वितरित किए. पंजाब से आई संगीत अकादमी के सदस्य ने कहा,'उनकी सिर्फ यही मांग है कि जल्द से जल्द 3 कृषि कानूनों को रद्द किया जाए. इसके साथ ही उन्होंने मोदी सरकार को खरी खोटी भी सुनाई.

    भारतीय किसान यूनियन जताया आभार
    भारतीय किसान यूनियन के नेता गुलाब सिंह ने पंजाब से संगीत अकादमी के जत्‍थे का आभार व्यक्त किया. इसके साथ ही मोदी सरकार के ऊपर तंज कसते हुए कहा कि 4 तारीख को होने वाली मीटिंग से उन्हें बहुत उम्मीदें थी, लेकिन सरकार तारीख पर तारीख देकर किसानों के साथ मजाक कर रही है.



    नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है. वे पिछले कई दिनों से दिल्ली के विभिन्न बॉर्डरों पर इन कानूनों के खिलाफ धरने पर डटे हुए हैं. इस दौरान केंद्र सरकार से किसान नेताओं के कई दौर की वार्ता भी हुई, लेकिन फिर भी कोई बात नहीं बन पाई. इसी बीच दिल्ली में हो रही बारिश ने किसानों के सामने और बड़ी समस्या खड़ी कर दी है. लगातार हो रही बारिश की वजह से किसान अपने-अपने तंबुओं में कैद हो गए हैं. वे ठंड से ठिठुर रहे हैं. यही नहीं, सोमवार को केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच सातवें दौर की बैठक खत्म हो गई. दोनों पक्षों के बीच तीन घंटे तक चली ये बैठक बेनतीजा रही. अब अगले दौर की बैठक 8 जनवरी को होगी. किसान संगठनों के प्रतिनिधि कानूनों को निरस्त करने की मांग पर कायम हैं. हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि वह कानूनों को वापस नहीं लेगी पर वह संशोधन के लिए तैयार है. (रिपोर्ट- के. बाली)

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