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कुमारी शैलजा: दो बार भाजपा प्रत्याशी रतन लाल कटारिया को दे चुकी हैं पटखनी

News18 Haryana
Updated: May 18, 2019, 1:16 PM IST
कुमारी शैलजा: दो बार भाजपा प्रत्याशी रतन लाल कटारिया को दे चुकी हैं पटखनी
कुमारी शैलजा

पिछले लोकसभा चुनाव में कुमारी सैलजा राज्यसभा सांसद के तौर पर मनोनित होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने राजकुमार वाल्मीकि को चुनाव मैदान में उतारा था.

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अंबाला संसदीय क्षेत्र से अगला सांसद कौन होगा? इसकी घोषणा 23 मई को मतगणना पूरी होने के बाद होगी. अंबाला संसदीय क्षेत्र में मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा में ही माना जा रहा है. कांग्रेस ने राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा को चुनाव मैदान में उतारा है. वहीं भाजपा ने वर्तमान सांसद रतनलाल कटारिया को दोबारा चुनाव मैदान में उतारा है.

कुमारी सैलजा और रतनलाल कटारया दोनों की इस लोकसभा क्षेत्र से दो-दो बार सांसद चुने जा चुके हैं. कुमारी सैलजा 2004-09 और 2009 से 2014 में इस लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुकी हैं. कुमारी सैलजा केंद्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार होने पर मंत्री भी रह चुकी हैं. कटारिया और सैलजा दोनों तीसरी बार एक-दूसरे के आमने सामने हैं.

मां को दी थी मुखाग्नि

पूर्व सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री कुमारी शैलजा का जन्‍म चंडीगढ़ के दलित नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी दलबीर सिंह के घर 24 सितंबर 1962 को हुआ. कुमारी शैलजा की माता का नाम कलावती था, जिनका मार्च 2012 में निधन हुआ. एक स्त्री होने के बावजूद उन्होंने अपनी मां को मुखाग्नि दी थी.



दो बार कटारियों दे चुकी हैं मात

पिछले लोकसभा चुनाव में कुमारी सैलजा राज्यसभा सांसद के तौर पर मनोनित होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने राजकुमार वाल्मीकि को चुनाव मैदान में उतारा था. कटारिया ने 6,12,121 वोट लेकर राजकुमार वाल्मीकि को 3,40,074 वोट के अंतर से हराया था. कटारिया और सैलजा की टक्कर में अब तक दोनों बार जीत कुमारी सैलजा की हुई हैं. इस बार सैलजा के सामने पहली बार जीत दर्ज करने के लिए कटारिया ने पूरा जोर लगाया हुआ है. वहीं सैलजा ने भी जीत का रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. सैलजा और कटारिया में कांटे की टक्कर मानी जा रही है.
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1990 में शुरु हुआ राजनीतिक करियर

कुमारी शैलजा बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज थीं. प्रारंभिक शिक्षा दिल्‍ली के जीसस एंड मेरी पब्लिक स्‍कूल में हुई. स्‍नातकोत्‍तर तथा एमफिल चंडीगढ़ से पंजाब विश्‍वविद्यालय से किया. 1990 में महिला कांग्रेस की अध्‍यक्ष बनकर इन्‍होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की. 1991 में वे पहली बार 10वीं लोकसभा चुनाव में हरियाणा के सिरसा लोकसभा सीट से जीतीं और नरसिंहराव सरकार में शिक्षा और संस्‍कृति राज्‍यमंत्री बनीं.



सिरसा सीट से भी हासिल कर चुकी हैं जीत

जुलाई 1992 से सितंबर 1995 तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय के शिक्षा और संस्कृति विभाग की केंद्रीय उप मंत्री रहीं. सितंबर 1995 से मई 1996 तक उक्त विभाग की केंद्रीय राज्यमंत्री रहीं. 1996 में 11वीं लोकसभा में दूसरी बार सिरसा सीट से जीत हासिल की तथा कांग्रेस संसदीय दल की कार्यकारी समिति की सदस्य बनीं.

1996 से 2004 तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सचिव व प्रवक्ता पद का दायित्व संभाला. तीसरी बार 2004 में 14वें लोकसभा चुनाव में कुमारी शैलजा ने हरियाणा की अंबाला सीट का प्रतिनिधित्‍व किया तथा डॉ. मनमोहन सिंह सरकार में आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय की राज्‍यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनीं.

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First published: May 18, 2019, 1:11 PM IST
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