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कमजोर मानसून के कारण गहराता जल संकट: खेती के लिए सीवेज के पानी के इस्‍तेमाल को मजबूर किसान

News18Hindi
Updated: September 16, 2019, 4:31 PM IST
कमजोर मानसून के कारण गहराता जल संकट: खेती के लिए सीवेज के पानी के इस्‍तेमाल को मजबूर किसान
हरियाणा (haryana) में औसत से कम बारिश हुई है. जून से लेकर 11 सितंबर तक हरियाणा में 244.9 मिमी बारिश हुई है. जो औसतन होने वाली 402.4 मिमी से 39 फीसदी कम है.

हरियाणा (haryana) में औसत से कम बारिश हुई है. जून से लेकर 11 सितंबर तक हरियाणा में 244.9 मिमी बारिश हुई है. जो औसतन होने वाली 402.4 मिमी से 39 फीसदी कम है.

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  • Last Updated: September 16, 2019, 4:31 PM IST
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भले देश के कई हिस्‍सों में भरपूर बारिश के कारण बाढ़ के हालात हों, लेकिन हरियाणा (haryana)में कमजोर मानसून के कारण हालात खराब हैं. भले यहां पर यमुना में बढ़े हुए जल स्‍तर के कारण कुछ इलाकों में पानी ने लोगों की समस्‍याएं बढ़ी हों, लेकिन इस बार मानसून में हरियाणा में औसत से कम बारिश हुई है. जून से लेकर 11 सितंबर तक हरियाणा में 244.9 मिमी बारिश हुई है. जो औसतन होने वाली 402.4 मिमी से 39 फीसदी कम है.

ग्राउंड वॉटर नीचे जाने से खेती के लिए किसानों के सामने सबसे बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है. यही कारण है कि वह खेती के लिए सीवेज वॉटर का इस्‍तेमाल करने के लिए मजबूर हैं. हरियाणा के किसान का कहना है कि हमारे जैसे किसान अंबाला कैंट से आने वाले सीवेज के पानी का इस्‍तेमाल खेती में कर रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि यहां पर सरकार ने बोरवेल कराने पर रोक लगा दी है. ऐसे में हमारे सामने पानी का संकट है.

हरियाणा के पास देश की कुल 1.5 फीसदी जमीन है. लेकिन वह देश के कुल उत्‍पादन का 15 फीसदी पैदा करता है. लेकिन पानी की उपलब्‍धता कम होने से अब किसानों के सामने खेती का संकट बढ़ रहा है.

WHO के अनुसार, 2025 तक दुनिया की आधी आबादी के सामने पानी का संकट होगा. अगर तापमान ऐसे ही गिरता रहा तो बारिश की स्‍थिति और गंभीर हो जाएगी. ऐसे में सूखे के हालात पानी का संकट और बढ़ाएंगे. दक्षिण एशिया में एक रिपोर्ट के मुताबिक सूखा पानी का संकट और गहरा करने वाला है.

भारत में पानी का संकट खेती से भी जुड़ा है. प्‍लानिंग कमीशन के पूर्व सदस्‍य मिहिर शाह के अनुसार, देश 90 फीसदी खेती पानी पर निर्भर है. हरित क्रांति के बाद किसानों ने गन्‍ना, गेहूं और चावल की खेती की, इसमें पानी ज्‍यादा लगता है. लेकिन अब इसमें कुछ अलग करने की जरूरत है.

भारतीय किसान यूनियन के अध्‍यक्ष राकेश कुमार कहते हैं कि किसान को जब पानी नहीं मिलता तो उसे जमीन से निकालता है, और तब तक जमीन खोदता है जब तक उसे मिल नहीं जाता. उसके लिए एक फ्री पानी का स्रोत सोने की खदान के बराबर होता है. लेकिन अब ये सोने की खदान भी उसकी नहीं रही. 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा के 128 ब्‍लॉक में से 78 डार्क जोन में हैं. यहां पर पानी पर गहरा संकट है.

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First published: September 16, 2019, 4:28 PM IST
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