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पराली जलाने पर किसानों ने कहा- प्रदूषण से चिंतित हैं मगर हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं

Krishna Bali | News18 Haryana
Updated: October 31, 2019, 3:46 PM IST
पराली जलाने पर किसानों ने कहा- प्रदूषण से चिंतित हैं मगर हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं
पराली जलाने मामले में कृषि विभाग का कहना है कि वे किसानों को जागरूक कर रहे हैं.

किसानों का कहना है कि 15 दिन के इस पीरियड में उनके पास खेतों में अवशेषों को आग लगाने के अलावा उन्हें कोई दूसरा रास्ता नहीं सूझता है.

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अंबाला. पर्यावरण प्रदूषित (Environment Polluted) होने को लेकर किसान (Farmers) चिंतित हैं, लेकिन उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं होने के चलते उन्हें खेतों में पराली को आग (Burning Straw) लगानी पड़ती है. अंबाला (Ambala) के किसानों का कहना है कि सरकार उन्हें अच्छी सब्सिडी दे व बढ़िया औजार दे ताकि वे फसलों को आग न लगाएं. किसानों का कहना है कि पराली जलाने से उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. वहीं छोटे किसानों का साफ कहना है कि वो इस हालात में नहीं हैं कि सरकार की सब्सिडी का फायदा उठा सकें.

खेतों में आग लगाकर खुशी नहीं होती है

किसानों का कहना है कि 15 दिन के इस पीरियड में उनके पास खेतों में अवशेषों को आग लगाने के अलावा उन्हें कोई दूसरा रास्ता नहीं सूझता है. इस दौरान उन्हें प्रशासन से लेकर पुलिसिया कार्रवाई तक का सामना करना पड़ता है. अंबाला के किसानों का कहना है कि वे फसलों के अवशेषों को आग न लगाएं तो क्या करें. उनके पास ऐसा कोई औजार नहीं है जिससे वे इस समस्या से बच सकें. सरकार उन्हें अच्छी तकनीक मुहैया करवाए ताकि वे भी खेतों में आग न लगाएं. किसानों का कहना है कि खेतों में आग लगाकर उन्हें खुशी नहीं होती है. किसान डी कंपोस्ट पर सब्सिडी के सरकारी फैसले को बेहतर मानते हैं, लेकिन इसमें समय ज्यादा लगने के चलते वे इसे अपनाना नहीं चाहते हैं.

अंबाला के एक किसान ने जानना चाहा कि वह फसलों के अवशेषों को आग न लगाएं तो क्या करे ?


छोटे किसानों ने कहा- बेहतर होगा कि वे खेती छोड़ दें

वहीं छोटे किसानों का कहना है कि उनके पास खेतो में आग लगाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. वे सरकार द्वारा मुहैया करवाई जा रही सब्सिडी का लाभ भी नहीं ले सकते हैं. छोटे किसानों का साफ कहना है कि उनके लिए इससे बेहतर यही होगा कि वे खेती छोड़ दें. इस मामले में कृषि विभाग का कहना है
कि वे समय समय पर अभियान चला कर किसानों को जागरूक कर रहे हैं. साथ ही इस बार शुगर मिल मालिकों के साथ बैठक कर फैसला लिया गया है कि किसान पराली शुगर मिल को बेचेंगे.
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First published: October 31, 2019, 3:46 PM IST
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