इस महीने के अंत तक भारत को मिल सकता है पहला 'राफेल', अंबाला बेस पर होगी इसकी तैनाती

News18 Haryana
Updated: September 10, 2019, 12:58 PM IST
इस महीने के अंत तक भारत को मिल सकता है पहला 'राफेल', अंबाला बेस पर होगी इसकी तैनाती
लड़ाकू विमान राफेल की तैनाती हरियाणा के अंबाला वायुसेना स्टेशन पर की जाएगी. (फाइल फोटो)

फ्रांस से आ रहे लड़ाकू विमान राफेल को पाक सीमा के पास अंबाला (हरियाणा) और चीन सीमा के पास हाशीमारा (पश्चिम बंगाल) एयरबेस पर तैनात किया जाएगा.

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अंबाला. फ्रांस (France) से खरीदे जाने वाले लड़ाकू विमान राफेल (french fighter aircraft rafale) की तैनाती हरियाणा (Haryana) के अंबाला वायुसेना स्टेशन (Ambala Air Force Station) पर की जाएगी. ऐसे में भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) ने अपनी 'गोल्डन ऐरोज' 17 स्क्वाड्रन ('Golden Arrows' 17 Squadron) को फिर से गठित किया है, जो फ्रांस से आ रहे राफेल लड़ाकू विमान को उड़ाने वाली पहली इकाई होगी. वहीं भारत को पहला राफेल विमान इस महीने के अंत तक मिल सकता है.

इसे लेकर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं. मंगलवार को अंबाला वायुसेना स्टेशन पर रेसुरेक्शन कार्यक्रम (Resurrection program) होगा. इसमें वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ (Air Force Chief BS Dhanoa) भी आएंगे.

बहरहाल, एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन अनुपम बनर्जी (Anupam Banerjee) ने बताया कि अंबाला में गोल्डन एरो स्क्वाड्रन को तैनात किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि फ्रांस से कुछ 36 राफेल खरीदे जा रहे हैं. इन्हें पाक सीमा के पास अंबाला (हरियाणा) और चीन सीमा के पास हाशीमारा (पश्चिम बंगाल) एयरबेस (Hasimara Air Force Station) पर तैनात किया जाएगा.

वीरगाथाओं से भरा हुआ है स्क्वाड्रन का इतिहास 

बता दें कि 'गोल्डन एरो' 17 स्क्वाड्रन का इतिहास वीर गाथाओं से भरा हुआ है. सन् 1999 के कारगिल युद्ध (Kargil War) के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर के समय स्क्वाड्रन बठिंडा एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात थी. तब एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ विंग कमांडर थे. 27 मई 1999 को स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा मिशन पर थे, तब एक स्टिंगर मिसाइल (Stinger missile) ने उनके विमान को निशाना बनाया था. स्क्वाड्रन लीडर आहूजा इसमें शहीद हो गए थे. उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया था.

पाकिस्तान के महत्वपूर्ण ठिकानों पर गिराया था बम 

इस घटना के बाद स्क्वाड्रन के पायलटों ने पाकिस्तान सेना को मुंहतोड़ जवाब देते हुए उनके महत्वपूर्ण ठिकानों पर बम गिराया था, जिसमें विंग कमांडर बीएस धनोआ भी शामिल थे. कारगिल युद्ध में अद्भुत प्रदर्शन करने पर विंग कमांडर बीएस धनोआ को युद्ध सेवा मेडल, स्क्वाड्रन लीडर ए चौधरी को वायुसेना मेडल, फ्लाइट लेफ्टिनेंट आरएस धालीवाल को वायुसेना मेडल और अन्य सम्मान मिल थे.
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एयरफोर्स में स्क्वाड्रन की भूमिका सबसे अहम होगी. (फाइल फोटो)


एयरफोर्स में स्क्वाड्रन की भूमिका होगी सबसे अहम

इस स्क्वाड्रन की स्थापना सन् 1951 में 1 अक्टूबर को हुई थी. वर्ष 2016 में भंग करने से पहले स्क्वाड्रन मिग-21 विमानों का संचालन कर रही थी, जिन्हें एयरफोर्स के बेड़े से अब धीरे-धीरे बाहर किया जा रहा है. अब राफेल विमानों का संचालन इस स्क्वाड्रन को सौंपा जाएगा. इससे एयरफोर्स में इस स्क्वाड्रन की भूमिका सबसे अहम रहेगी.

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First published: September 10, 2019, 11:17 AM IST
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