दंगल गर्ल गीता-बबीता की बहन सुसाइड केस: क्या हुआ था रितिका के साथ उसके आखिरी मैच में?

गीता-बबीता की ममेरी बहन ने मैच हारने के बाद किया था सुसाइड

Wrestler Ritika Suicide Case: मैच के फाइनल मुकाबले में रितिका एक प्वॉइंट से हार गईं.

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भिवानी. दंगल गर्ल गीता-बीता फौगाट की ममेरी बहन राजस्थान निवासी रितिका बलौदा द्वारा एक अंक से हारने पर सुसाइड (Suicide) से मिनी क्यूबा भिवानी के खिलाड़ियों व कोचों में सन्नाटा है. सभी ने रितिका के सुसाइड पर दुख जताया है और खिलाड़ियों (Players) पर जीत का दबाव होना भी माना है. लेकिन हार के चलते सुसाइड किसी को समझ नहीं आ रहा. रितिका द्वारा इस कदम को उठाने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं.

बता दें कि रितिका राजस्थान के झुंझुनू ज़िले के जैतपुर गांव की रहने वाली थीं. पिता का नाम है मेनपाल. मेनपाल, गीता और बबीता के मामा हैं. रितिका पिछले कई दिनों से महावीर फोगाट की रेसलिंग एकेडमी में प्रैक्टिस कर रही थीं और बलाली में महावीर के घर पर ही रह रही थीं. बलाली, हिरयाणा के चरखी दादरी ज़िले के तहत आने वाला एक गांव है.

12 से 14 मार्च के बीच राजस्थान के भरतपुर ज़िले में रेसलिंग की एक प्रतियोगिता थी. ये एक राज्य स्तरीय कॉम्पिटिशन था. रितिका ने भी इसमें हिस्सा लिया था. मैच के फाइनल मुकाबले में वो एक पॉइंट से हार गईं. इस दौरान महावीर और रितिका के पिता मेनपाल भी वहां मौजूद थे. कॉम्पटिशन खत्म होने के बाद रितिका महावीर के साथ बलाली गांव वापस चली गई. और 15 मार्च की रात करीब 11 बजे उनका शव घर के एक कमरे में पंखे से झूलता हुआ पाया गया.

जीत हार की बजाय मेहनत पर ध्यान देना चाहिए

बात करें विश्व विजेता बॉक्सर के कोच एंव द्रोणाचार्य अवार्डी जगदीश या फिर भिवानी को मिनी क्यूबा का नाम दिलाने वाले द्रोणाचार्य अवार्डी हवासिंह के बेटे अर्जुन अवार्डी कोच संजय की तो ये दोनों कोच रितिका बलौदा को देश की दरोहर और उभरती खिलाड़ी की मौत पर दुख जता रहे हैं. दोनों कोच मानते हैं कि हर खिलाड़ी के साथ खेल के समय उन पर भी दबाव था, लेकिन खिलाड़ी को जीत हार की बजाय अपनी मेहनत पर ध्यान देना चाहिए.

सेलिब्रिटी परिवार पर ये दबाव और होता है

उन्होंने कहा कि सेलिब्रिटी परिवार पर ये दबाव और होता है, लेकिन खेल में राजा का बेटा ही राजकुमार बने ये जरूरी नहीं. इनका मानना है कि कोच के साथ मनोवैज्ञानिक व परिजनों को खिलाड़ियों का मनोबल बनाना चाहिए. वहीं अंतराष्ट्रीय बॉक्सर नूपूर व नीतू ने भी कहा कि खिलाड़ी पर दबाव बहुत होता है लेकिन सुसाइड का क़दम ग़लत है. इनका कहना है कि हार के बाद ही जीत मिलती है. हार के कारणों से सबक लेकर कमियां दूर करते हुये कड़ी मेहनत हार के कारणों को जीत में बदल देते हैं.

खिलाड़ी देश की धरोहर 

उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर एक खिलाड़ी देश की धरोहर होता है जो समय समय पर हमारे राष्ट्रीय ध्वज को दूसरे देशों में फहरा कर देश व देशवासियों का गौरव बढ़ाता है. ऐसे में ज़रूरत है इस धरोहर के हौंसले बढ़ाने और हर हाल में बचाने की.