16 अगस्त से फिर शुरू होगा जाट आरक्षण आंदोलन
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16 अगस्त से फिर शुरू होगा जाट आरक्षण आंदोलन
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव गंगाराम श्योराण

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति का दावा है कि वो हर भाईचारे सम्मेलन में 36 बिरादरियों को साथ लिया जाएगा.

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स्वतंत्रता दिवस के एक दिन बाद एक बार फिर प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन की आहट देखने को मिलेगी. भिवानी में जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने इसके लिए तैयारियों भी शुरू कर दी है. समिति के प्रदेश सचिव गंगाराम श्योराण ने बताया कि चार बार समझौता कर सरकार मांग पूरी नहीं कर रही. ऐसे में मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा, भले ही कितने भी मुकद्दमे क्यों ना बने.

बता दें कि प्रदेश में जाट समाज अपने आप को पिछड़ा वर्ग में शामिल करवाने की मांग को लेकर एक दशक से भी ज्यादा समय से आंदोलनरत है. वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर आगजनी मामले में समिति के राष्ट्रीय महासचिव अशोक बलहारा का नाम आने पर समिति के पदाधिकारी फिर सक्रिय हो गए हैं. भिवानी में आयोजित समिति की जिला स्तरीय बैठक में प्रदेश सचिव गंगाराम श्योराण ने फिर से आंदोलन शुरू करने के संकेत दिए हैं.

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गंगाराम श्योराण ने बताया कि भाजपा सरकार जाट आरक्षण को लेकर आंदोलन रोकने के लिए चार बार समझौता कर चुकी है, लेकिन हर बार मांग मानने का वादा किया जाता है पर पूरा आज तक नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महासचिव अशोक बलहारा का आगजनी में नाम मामले में वो न्यायालय में लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन अपनी संवैधानिक मांग को लेकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगे.
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उन्होंने कहा कि 30 जून से हर जिला में होने वाले भाईचारे सम्मेलन के तहत भिवानी के धनाना गांव में 3 अगस्त को भाईचारा सम्मेलन आयोजित होगा. उन्होंने बताया कि समिति ने सरकार को 15 अगस्त तक का समय दिया है. इसके बाद 16 अगस्त से सीएम और मंत्रियों के कार्यक्रमों का बहिष्कार किया जाएगा और उनसे जवाब मांगा जाएगा कि उनकी मांग पूरी क्यों नहीं की जा रही. उन्होंने बताया कि अपनी मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा, चाहे इसके लिए कितने भी ने मुकदमें क्यों ना बने.

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति का दावा है कि वो हर भाईचारे सम्मेलन में 36 बिरादरियों को साथ लिया जाएगा. समिति का साथ ही ये भी दावा है कि वो भाजपा सरकार के समाज को बांटने वाले प्रयास में सफल नहीं होने देगी. अब आने वाले दिनों में दिखना होगा कि सरकार जाट आरक्षण आंदोलन से कैसे निपटेगी.
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