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जिस कलेक्टर को देख निशा ग्रेवाल बनीं IAS, उसने फोन पर दी बधाई, पहले प्रयास में ही मिली 51वीं रैंक

भिवानी की निशा ग्रेवाल ने पहले अटैम्प्ट में UPSC में पाई 51वीं रैंक. डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने फोन कर दी बधाई.

भिवानी की निशा ग्रेवाल ने पहले अटैम्प्ट में UPSC में पाई 51वीं रैंक. डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने फोन कर दी बधाई.

UPSC Results 2020: भिवानी की बेटियां खेलों के साथ पढ़ाई में भी झंडे गाड़ने लगी हैं. जिले के बामला गांव की निशा ग्रेवाल ने UPSC में फर्स्ट अटैम्प्ट में ही आल इंडिया 51वीं रैंक हासिल की. 22 वर्षीय निशा ने कोरोना काल में दो साल घर पर रहकर पढ़ाई की है. अपने दादा रिटायर्ड मैथ टीचर रामफल की मदद से पहले प्रयास में ये बड़ा मुकाम हासिल किया है.

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भिवानी. हरियाणा के भिवानी की बेटियां खेल ही नहीं, अब पढ़ाई में भी झंडे गाड़ने लगी हैं. बामला गांव की 22 वर्षीय बेटी निशा ग्रेवाल ने पहली बार में ही UPSC की परीक्षा में 51वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है. निशा की इस उपलब्धि पर बधाई देने वालों का तांता लगा है. डिप्टी CM दुष्यंत चौटाला ने भी निशा को फोन कर बधाई दी है. भिवानी के डीसी रहते निशा को गाइड करने वाले IAS अधिकारी जयबीर सिंह ने भी निशा को फोन करके बधाई दी है. असल में, निशा ग्रेवाल डीसी जयबीर सिंह से तैयारी के दौरान लगातार सलाह लेती रही हैं और इसका फायदा उन्हें परीक्षा में मिला.

IAS बनने जा रहीं निशा का कहना है कि उन्होंने ये मुकाम किसी के सपोर्ट से ही हासिल किया है, इसलिए अब वो हर लड़की की सपोर्ट करने के लिए हमेशा तैयार रहेंगी, जिसे उनकी जरूरत होगी. महिला सशक्तिकरण के लिए काम करती रहेंगी. बता दें कि निशा की प्राथमिक शिक्षा गांव बामला में ही हुई है. निशा के पिता बिजली निगम में कर्मचारी हैं और दादा रिटायर्ड मैथ टीचर हैं. निशा को इस मुकाम तक लाने में उसके दादा रामफल का सबसे अहम योगदान रहा है, जो निशा के 24 घंटे के टीचर रहे हैं.

दादा उनके 24 घंटे के टीचर थे, उन्होंने गर्मियों में भी छुट्टी नहीं होने दी 

निशा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिजनों व टिचर्स को दिया है. निशा का कहना है कि उसके दादा रामफल उसके 24 घंटे के टीचर थे, जो गर्मी की छुट्टियों में भी उसकी छुट्टी नहीं होने देते थे. निशा ग्रेवाल कहा कि कोरोना काल में दो साल से दादा के साथ घर पर ही पढ़ाई की. निशा का कहना है कि लड़कियों के लिए हर मुकाम हासिल करने में चैलेंज ज़्यादा होता है. पर मेहनत से मंज़िल मिल ही जाती है. निशा ने कहा कि वो यहां तक किसी की सपोर्ट से पहुंची हैं तो अब वह हर लड़की की सपोर्ट करेंगी.

दादा ने कहा- साधारण लड़की ने असाधारण काम कर दिया

वहीं निशा के दादा रामफल ने बताया कि निशा ने साधारण लड़की होते हुये असाधारण काम किया है. दादा का कहना है कि मां-बाप को बेटा-बेटी में भेदभाव ना करते हुए बेटियों की पढाई और उन्हें आगे बढ़ने का मौक़ा देना चाहिए. दादा रामफल ने कहा कि भिवानी की बेटियां अभी तक कुश्ती, कबड्डी और मुक्केबाज़ी में पूरी दुनिया में मुकाम हासिल कर चुकी हैं, पर निशा ने पढ़ाई में मुकाम हासिल कर बेटियों के लिए उम्मीद की नई किरण बनी हैं.

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