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किसान की मौत का मामला: प्रशासन और परिजनों के बीच सहमती के बाद हुआ पोस्टमार्टम

मृतक किसान की फाइल फोटो
मृतक किसान की फाइल फोटो

जेल में बंद चैहड़ कलां निवासी किसान रणबीर की सोमवार रात को सिने में दर्द के चलते मौत हो गई थी.

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भिवानी जेल में किसान की संदिग्ध मौत मामले में परिजनों और प्रशासन के बीच सहमती के बाद मृतक किसान के शव का पोस्टमार्टम करवाया गया. पोस्टमार्टम जज की देखरेख में करवाया गया है. फिलहाल शव परिजनों को सौंप दिया गया है और परिजन अंतिम संस्कार के लिए भी सहमत हो गए हैं.

बता दें कि जेल में बंद चैहड़ कलां निवासी किसान रणबीर की सोमवार रात को सिने में दर्द के चलते मौत हो गई थी. रणबीर की मौत के बाद काफी तूल पकड़ा और परिजन शव का पोस्टमार्टम करवाने की बजाय बहल में किसान संगठनों के साथ मिलकर धरने पर बैठ गए. यहां पर दोपहर बाद सियासत भी शुरु हुई. आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिन्द के साथ अनेक स्थानीय नेता भी धरने पर पहुंचे.

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देर शाम बहल में उपायुक्त अंसज सिंह और एसपी गंगाराम पूनियां धरने पर पहुंचे और परिजनों से लंबे दौर की वार्ता कर मामले को सुलझाया. मृतक किसान रणबीर के भतीजे बीरसिंह ने बताया कि उन्होंने 25 लाख रुपये आर्थिक मदद तथा बैंक का कर्ज माफ करने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने पांच लाख रुपये आर्थिक मदद, बैंक का साढे 9 लाख रुपये कर्ज माफ करने तथा एक सदस्य को डीसी रेट पर नौकरी देने पर सहमती की. उन्होंने बताया कि ये मांग पूरी होने के बाद सहमती हुई है और सहमती के बाद वो पोस्टमार्टम करवाकर शव के अंतिम संस्कार के लिए राजी हो गए.
चैहड़ कलां गांव निवासी किसान रणबीर ने लैंड मोर्गेज बैंक से ट्रैक्टर और फ्वारा सेट के लिए कर्ज लिया था जो बढ कर 9 लाख 83 हजार रुपये हो गया था. कर्ज चुकता ना देख बैंक ने रणबीर के ब्लेंक चेक को लगाया तो वो बाऊंस हो गया. इस पर कोर्ट कार्यवाई के बाद रणबीर को दो साल की सजा सुनाई गई और 20 सितंबर को उसे जेल भेज दिया गया था. परिजनों का आरोप है कि जेल के डर से रणबीर के सिने में दर्द होने से मौत हो गई.
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