खुद को गुलाम मानते थे इस गांव के लोग, 7 दशकों बाद मनाया आजादी का जश्न
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खुद को गुलाम मानते थे इस गांव के लोग, 7 दशकों बाद मनाया आजादी का जश्न
71 साल बाद मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

देश की आजादी के लिए पहली बड़ी लङाई 1857 में लड़ी गई थी. इसे 1857 की क्रांति का नाम दिया गया. पूरे देश के लोगों के साथ इस क्रांति में भिवानी जिला के रोहणात गांव के लोगों का भी अहम योगदान रहा.

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पूरा देश आज आजादी के जश्म में डूबा है, लेकिन ये आजादी का जश्न भिवानी के शहीद गांव रोहणात के लिए खास है. क्योंकि इस गांव में आजादी के सात दशकों बाद पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र ध्वज फहराया गया है और आजादी के गीत गाए गए हैं. अब से पहले तक इस गांव के लोग अपने आप को आजाद देश के गुलाम समझते थे और इस बार सूबे के मुखिया मनोहर लाल के आश्वासन पर आजादी के जश्न में झूमें हैं.

1857 की लड़ाई में रोहणात गांव लोगों का रहा अहम योगदान
बता दें कि देश की आजादी के लिए पहली बड़ी लड़ाई 1857 में लड़ी गई थी. इसे 1857 की क्रांति का नाम दिया गया. पूरे देश के लोगों के साथ इस क्रांति में भिवानी जिला के रोहणात गांव के लोगों का भी अहम योगदान रहा. यहां के लोगों द्वारा आजादी की जंग में कूदने से अंग्रेज इतने आग बबूला हुए कि उन्होंने रोहणात गांव के लोगों पर एक-एक कर जुल्म करने शुरू कर दिए.

अंगेजों ने गांव को लोगों को फांसी पर लटकाया
अंग्रेजों ने रोहणात गांव के लोगों को पेड़ों पर फांसी पर लटका दिया. पास के गांव मंगल पुठी खां में तोप लगा कर लोगों को उड़ा दिया गया. यही नहीं, कई लोगों को तो हांसी जाने वाली सड़क पर लिटा कर उनके ऊपर बुलडोजर चला दिया. जिसके बाद यहां की एक सड़क का नाम लाल सड़क पड़ा है.



अंग्रेजों ने लोगों को जिंदा मार डाला
अंग्रेजों के जुल्म यहीं नहीं रुके. उन्होने यहां के अधिकतर लोगों को जिंदा मार डाला और गांव की जमीन को नीलाम कर दिया. कुछ सालों बाद एक-एक कर आसपास के लोगों ने नीलामी में इस जमीन को खरीद लिया. जिसके बाद यहां के स्थाई निवासी जमीन और कामधंधे से भी वंचित हो गए. हद तब हुई जब करीब 90 साल बाद देश आजाद हुआ. इस गांव के लोगों को धीरे-धीरे लगने लगा कि उनके बुजुर्गों की आजादी के लिए दी गई शहादत बेकार गई क्योंकि उन्हें आजादी के बाद भी अपनी पुस्तैनी जमीन नहीं मिली. इसको लेकर इस गांव में आजादी के बाद कभी भी राष्ट्र ध्वज नहीं फहराया गया. ये लोग आज 70 से भी अधिक सालों तक अपने आप को आजाद देश का गुलाम समझते रहे.

न्यूज 18 की खबर का हुआ असर
जब न्यूज-18 ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया तो उसका असर देखने को मिला. खुद सीएम मनोहर लाल ने मामले को संज्ञान में लिया और गांव के लोगों से मिले. ग्रामीणों का कहना है कि उनसे मिलकर और गांव के इतिहास को सुनकर खुद सीएम मनोहर लाल भी हैरान रह गए. ग्रामीण कहते हैं कि इसके बाद सीएम मनोहर लाल ने उनकी समस्या के समाधान का भरोसा दिया. साथ ही खुद सीएम मनोहर लाल 23 मार्च को गांव में आए और राष्ट्र ध्वज फहरा कर हमें आजादी का अहसास करवाया. साथ ही सीएम ने भरोसा दिलाया कि उनके गांव के लोगों की शहादत हमेशा याद रखी जाएगी और उनकी जमीन कानूनी तरीके से उन्हें दिलाई जाएगी.

ग्रामीणों को उम्मीद जल्द पूरी होंगी उनकी मांगें
ग्रामीणों का कहना है कि सीएम के भरोसे पर आज पहली बार गांव के स्कूल में आजादी का जश्न मनाया गया है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी मांग सीएम मनोहर लाल खट्टर और सरकार जल्द पूरी करेंगें. गांव में पहली बार जश्न-ए-आजादी पर गांव की सबसे पढ़ी लिखी बेटी अनामिका ने झंडा फहराया. अनामीका एमटेक कर चेन्नई में इंकम टैक्स एसिस्टेंट की पोस्ट पर कार्यरत हैं.
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