पानी बचाने की अनोखी मुहिम, किसानों ने किया 1.07 लाख हेक्टेयर में धान न बोने का फैसला
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पानी बचाने की अनोखी मुहिम, किसानों ने किया 1.07 लाख हेक्टेयर में धान न बोने का फैसला
एक किलोग्राम चावल पैदा करने में 5000 लीटर तक पानी की खपत होती है.

भारी नुकसान के बावजूद हरियाणा के किसानों ने लिया धान न लगाने का फैसला, ताकि जल संकट का कम सामना करें आने वाली पीढ़ियां

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नई दिल्ली. गंभीर होते पेयजल संकट (Water Crisis) के बीच किसानों ने अनोखा संदेश दिया है. कृषि पर आश्रित हरियाणा के अन्नदाताओं ने सरकार के उस संकल्प को पूरा कर दिया है जिसमें इस साल पानी बचाने के लिए 1 लाख हेक्टेयर में धान की फसल (Paddy crop) न लगाने का टारगेट रखा गया था. प्रदेश के 93,184 किसानों ने अपनी 1,07,519 हेक्टेयर जमीन पर धान की बजाय बहुत कम पानी खपत वाली फसलें उगाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है.

जानकारों का कहना है कि किसानों द्वारा कायम की गई यह मिसाल जल संकट से निपटने में मदद करेगी. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक एक किलोग्राम चावल पैदा करने में 5000 लीटर तक पानी की जरूरत होती है.

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किसानों का कितना बड़ा त्याग
जल संकट के लिए सिर्फ किसान जिम्मेदार नहीं है. लेकिन जब नेक काम करने का वक्त आया तो वो सबसे आगे खड़ा मिला. हरियाणा, भारत के टॉप टेन धान उत्पादकों में शामिल है. यहां प्रति एकड़ औसतन 26 क्विंटल धान पैदा होता है. जबकि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,868 रुपये प्रति क्विंटल है. मतलब ये है कि एक एकड़ में 48,568 रुपये का धान होता है. जबकि सरकार ने प्रति एकड़ सिर्फ 7 हजार रुपये प्रोत्साहन दिया. इस भारी नुकसान के बावजूद किसानों ने भावी पीढ़ी को बचाने के लिए इतना बड़ा फैसला लिया. हरियाणा में करीब 8.5 लाख हेक्टेयर रकबे में धान की खेती की जाती है.

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हरियाणा प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है


‘मेरा पानी-मेरी विरासत’

हरियाणा में बड़ा रकबा बासमती का होता है. लेकिन सरकार ने सिर्फ गैर बासमती धान की फसल छोड़ने का आह्वान किया था. इसके लिए ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ (Mera Pani Meri Virasat Scheme) योजना शुरू की गई थी.

-योजना के तहत जिन किसानों ने अपनी कुल जमीन के 50 प्रतिशत या उससे अधिक क्षेत्र पर धान की बजाय मक्का, कपास, बाजरा, दलहन, सब्जियां इत्यादि फसल उगाई है उन्हें 7,000/- रूपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जा रहा है.

-जिन किसानों ने धान की बजाय फलदार पौधों तथा सब्जियों की खेती से फसल विविधीकरण (Crop Diversification) अपनाया है, उनको बागवानी विभाग द्वारा चलने वाली परियोजनाओं के प्रावधान के अनुसार अनुदान राशि अलग से मिल रही है.

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-राज्य सरकार ने इस योजना के तहत अपनाई गई फसल मक्का, बाजरा, दलहन के उत्पादन को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने का वादा किया है.

-फसल विविधीकरण अपनाने वाले किसानों को सूक्ष्म सिंचाई संयत्र लगाने पर कुल लागत का केवल जीएसटी ही देना होगा.

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खट्टर सरकार ने किसानों को प्रेरित किया


हरियाणा में जल संकट कितना गंभीर

हरियाणा में धान के क्षेत्र से हर साल लगभग 1.0 मीटर भू-जल स्तर (Ground water level) में गिरावट आ रही है. मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के मुताबिक प्रदेश का कुछ हिस्सा पानी के लिहाज से डार्क जोन हो चुका है.



इसमें 36 ब्लॉक ऐसे हैं, जहां पिछले 12 वर्षों में भू-जल स्तर (ground water level) में गिरावट दोगनी हुई है. जहां पहले पानी की गहराई 20 मीटर थी, वो आज 40 मीटर हो गई है. जहां पानी की गहराई 40 मीटर से ज्यादा हो गई है ऐसे 19 ब्लॉक हैं. लेकिन इनमें से 11 ब्लॉक ऐसे हैं जिसमें धान की फसल नहीं होती.

प्रदेश के 8 ब्लॉकों रतिया, सीवान, गुहला, पीपली, शाहबाद, बबैन, ईस्माइलाबाद व सिरसा में वाटर लेवल 40 मीटर से ज्यादा है. इनमें धान की बिजाई होती है. इन्हीं में यह स्कीम लागू की गई है.
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