अब MSP पर पहले से ज्यादा धान बेच पाएंगे किसान, नाराजगी दूर करने की कोशिश में जुटी सरकार

हरियाणा में धान बेचने वाले किसानों के लिए बड़ी खबर   
(Photo-Moneycontrol)
हरियाणा में धान बेचने वाले किसानों के लिए बड़ी खबर (Photo-Moneycontrol)

MSP पर धान की खरीद को लेकर हरियाणा सरकार ने लिया बड़ा फैसला, जानिए कितने फायदे में होंगे किसान?

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 8:56 AM IST
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चंडीगढ़. नए कृषि कानून में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का प्रावधान न होने के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के बीच हरियाणा सरकार (Haryana Government) ने एक बड़ा फैसला लिया है. यहां पर धान की खरीद (Paddy procurement) शुरू हो चुकी है. सीएम मनोहरलाल ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसके बाद अब किसान पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा उपज एमएसपी पर बेच पाएंगे.

दरअसल, अब तक यह प्रावधान है कि अगर आपके पास एक एकड़ में धान की फसल है तो अधिकतम 25 क्विंटल धान ही सरकारी रेट पर बेच सकते थे. इसका तकनीकी मतलब यह है कि हरियाणा सरकार मानती थी कि यहां एक एकड़ में 25 क्विंटल से अधिक धान नहीं पैदा होता. लेकिन अब किसानों (farmers) के हित को देखते हुए इस लिमिट को बढ़ा दिया गया है.

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सरकार अब प्रति एकड़ धान की पैदावार 30 क्विंटल मानेगी. यानी अब एक एकड़ वाला किसान आसानी से 30 क्विंटल बेच सकता है. सरकार ने कहा है कि यदि कोई किसान मंडी में 10 प्रतिशत अतिरिक्त धान लेकर आता है तो उसे भी खरीदा जाएगा. इस तरह 25 क्विंटल की जगह अब वो प्रति एकड़ धान की फसल पर 33 क्विंटल धान एमएसपी पर बेच सकता है.
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हरियाणा में न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर धान की खरीद शुरू हो चुकी है.


मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने धान की खरीद पर एक समीक्षा बैठक कर खरीद एजेंसियों को सख्त आदेश दिए कि जहां पर धान की खरीद हो चुकी है, वहां कल से ही तुरंत उठान करवाया जाए. उन्होंने कहा कि सीमांत किसानों के बारे में ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन 5 अक्तूबर से शुरू किया जाएगा. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडी स्तर पर कल से ही मंडी सचिव व आढ़ती, अपने स्तर पर 25 प्रतिशत किसानों को बुला सकेंगे.

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मनोहर लाल ने कहा कि किसानों को खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार से कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी. वहीं, उन्होंने बाजरा, मक्का, मूंग एवं कपास की खरीद की भी समीक्षा की. केंद्र के नए कृषि कानून (New Agri law) के बाद राज्य सरकार का यह फैसला नाराज किसानों को रिझाने के तौर पर देखा जा रहा है. प्रदेश में बरोदा विधानसभा सीट पर उप चुनाव भी है. देखना ये है कि सरकार का यह कदम किसानों के गुस्से को कम कर पाता है या नहीं.
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