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Haryana Assembly Election 2019: BJP में मचा घमासान, टिकट पाने और कटवाने की जंग चरम पर

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: September 23, 2019, 3:17 PM IST
Haryana Assembly Election 2019: BJP में मचा घमासान, टिकट पाने और कटवाने की जंग चरम पर
नवरात्र में हो सकता है BJP प्रत्याशियों की ऐलान. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

Haryana Assembly Election 2019: जल्द आ सकती है BJP प्रत्याशियों की लिस्ट. क्या कांग्रेस और इनेलो का बंटाधार करके बीजेपी में आए नेताओं काे मिलेगी टिकट?

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  • Last Updated: September 23, 2019, 3:17 PM IST
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नई दिल्ली. विधानसभा चुनाव (Assembly Election) की तारीख घोषित होते ही बड़ी पार्टियों में टिकट के लिए जोड़तोड़ शुरू हाे गई है. प्रत्याशियों पर मंथन चल रहा है. क्योंकि वोटिंग में एक महीने से भी कम का समय बचा है. हरियाणा (Haryana) में बीजेपी (BJP) की सरकार है, इसलिए उसमें दावेदारों की संख्या बहुत ज्यादा है. जाहिर है दावेदार अधिक हैं तो उतना ही अधिक झगड़ा भी है. हालात ये हैं कि अपने ही एक दूसरे के नंबर कम करने और काटने में लगे हुए हैं. सोशल मीडिया पर कोई कंडीडेट की लिस्ट वायरल (Social media) कर मानसिक दबाव बना रहा है तो कोई बता रहा है कि कितने विधायकों का टिकट कटेगा और दूसरी पार्टियों के बागियों में से कौन टिकट ला सकता है. टिकट लाने और कटवाने की जंग चरम पर है. दूसरी पार्टी से चुनावी लड़ाई से पहले अपनी पार्टी में लड़ाई जारी है. दूसरी ओर अब जनता को प्रत्याशियों की लिस्ट (Candidate list) का इंतजार है.

कांग्रेस और इनेलो यहां हाशिए पर हैं. इसलिए इनमें इतनी सिर फुटव्वल नहीं है जितनी बीजेपी में जारी है. पार्टी के बड़े नेता खासतौर पर प्रदेश से आने वाले तीनों मंत्री अपने-अपने समर्थकों और बेटा-बेटी को टिकट दिलाने की लिए रस्साकशी कर रहे हैं. तो दूसरी पार्टियों में विधायक पद त्याग कर आए नेता भी बदले में टिकट लेने वालों की लाइन में खड़े हो गए हैं. इस समय प्रदेश अध्यक्ष, हरियाणा (Haryana) में संघ से जुड़े नेताओं और यहां के तीनों केंद्रीय मंत्रियों के यहां टिकटार्थियों का तांता लगा हुआ है. पार्टी के एक नेता ने बताया कि दो-तीन दिन में लिस्ट फाइनल हाे सकती है.

दूसरी पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए नेता भी चाहते हैं टिकट


केंद्रीय मंत्री राव के बागी तेवर

अहीरवाल के सबसे बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह (Rao Inderjeet Singh) ने ऐलान कर दिया है कि वो दूसरी पार्टियों से बगावत करके बीजेपी में आए नेताओं को टिकट नहीं लेने देंगे. राव का कहना है कि बहुत से नेता कांग्रेस और इनेलो का सत्यानाश करके बीजेपी में आए हैं. पार्टी को ऐसे नेताओं से सचेत रहने की जरूरत है. ऐसे नेताओं को टिकट न मिले. राव ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद दूसरी पार्टियों से बीजेपी में आए नेताओं को टिकट देने पर विचार न किया जाए. क्योंकि वो पार्टी की हवा देखकर आए हैं. उन्होंने कहा कि बुरे वक्त में बीजेपी का साथ देने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को टिकट देनी चाहिए.

कुछ वर्तमान विधायकों की कट सकती है टिकट!
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि अच्छे परिणाम के लिए करीब 30 फीसदी वर्तमान विधायकों के टिकट पर कैंची चल सकती है, ताकि जनता के किसी भी तरह के विरोध का सामना न करना पड़े. नए प्रत्याशी होने से लोगों का गुस्सा काफी हद तक कम हो जाता है. पार्टी पहले भी यह फार्मूला अपना चुकी है. पूरे हरियाणा में पार्टी के लोग चाहते हैं कि बेटा-बेटी और बाहरियों की जगह संगठन को यहां तक पहुंचाने वाले कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाए. हालांकि, इस घमासान के बारे में कोई भी पार्टी नेता कुछ खुलकर नहीं बोल रहा.
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केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का दक्षिण हरियाणा में अच्छा प्रभाव माना जाता है (File Photo)


युवा मोर्चा ने भी मांगी टिकट
बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष यादव का कहना है कि उन्होंने पार्टी के सामने यह बात रखी है कि युवा मोर्चा के जो योग्य कार्यकर्ता हैं उन्हें टिकट दी जाए. पार्टी प्रवक्ता राजीव जेटली का कहना है कि टिकट के लिए कोई घमासान नहीं है. सबका लक्ष्य 75 से ज्यादा सीटें जीतने का है. टिकट के लिए पार्टी का एक सिस्टम है. बैठकर वरिष्ठ नेता इस बारे में फैसला लेंगे. उधर, प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला (Subhash Barala) ने कहा है कि भाजपा किसी भी जल्दबाजी में टिकट की घोषणा नहीं करेगी.

बीजेपी में इसलिए है टिकट के लिए मारामारी
प्रदेश में अभी जो सियासी माहौल है उसमें  बीजेपी का सियासी पलड़ा भारी दिख रहा है. यही देखकर इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के 10 वर्तमान विधायक बीजेपी (BJP) में आ चुके हैं. जबकि बसपा (BSP) का एकमात्र विधायक भी अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुका है. ये सभी टिकट (Ticket) के चक्कर में जुगाड़ लगा रहे हैं.

हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा का कहना है कि ज्यादातर सांसद अपने बेटा-बेटी और पत्नी के लिए टिकट चाहते हैं. राव इंद्रजीत अपनी बेटी को टिकट दिलवाना चाहते हैं तो पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह अपनी पत्नी को. पार्टी कार्यकर्ता तो दूसरी पार्टियों के बागियों और बड़े नेताओं के बेटा-बेटियों के लिए झंडा-बैनर उठाएंगे.

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टिकट के लिए बीजेपी में बढ़ी अंदरूनी कलह


79 सीटों पर आगे थी बीजेपी
दरअसल, इसकी वजह लोकसभा चुनाव के नतीजे हैं. यहां की दस में दस सीटें बीजेपी की झोली में हैं. अगर लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से विश्लेषण करें तो  90 में से 79 सीटों पर बीजेपी अन्य सभी पार्टियों से आगे थी. इसी आंकड़े के सामने आने के बाद अन्य पार्टियों के नेताओं को यह लगा कि उनका भविष्य शायद बीजेपी में ही सुरक्षित है.

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First published: September 23, 2019, 9:01 AM IST
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