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बेटे-बेटी की टिकट के लिए काम नहीं आया केंद्रीय मंत्रियों का दबाव, BJP ने कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा  

News18Hindi
Updated: October 3, 2019, 3:01 PM IST
बेटे-बेटी की टिकट के लिए काम नहीं आया केंद्रीय मंत्रियों का दबाव, BJP ने कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा  
आखिरी 12 उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी कर बीजेपी ने बेटे-बेटियों के लिए टिकट की उम्मीद लगाए मंत्रियों को झटका दे दिया है

बीजेपी के दो दिग्गज केंद्रीय मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह और कृष्ण पाल गुर्जर अपने बेटे और बेटी के लिए टिकट मांग रहे थे. लेकिन बीजेपी ने वंशवाद की राजनीति को नकार कर अपने कार्यकर्ताओं को मैदान में उतार दिया है.

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  • Last Updated: October 3, 2019, 3:01 PM IST
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नई दिल्ली. बीजेपी में न बेटे को टिकट न बेटी को टिकट. हरियाणा से आने वाले दो केंद्रीय मंत्रियों कृष्णपाल गुर्जर और राव इंद्रजीत का दबाव काम नहीं आया है. गुर्जर अपने बेटे देवेन्द्र चौधरी के लिए और राव अपनी बेटी आरती राव के टिकट लिए मांग रहे थे. पार्टी ने परिवारवाद पॉलिटिक्स को नकारते हुए दोनों सीटों पर अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को टिकट दिया है. हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 (Haryana Assembly Election 2019) में 75 से अधिक सीटों को जीतने का टारगेट रखकर लड़ रही बीजेपी (BJP) में टिकट के लिए घमासान मचा हुआ था. न्यूज़ 18 हिंदी से विशेष बातचीत में बीजेपी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला (Subhash barala) ने पहले ही कहा था कि बेटा-बेटी को टिकट नहीं मिलेगा. कर्मठ कार्यकर्ताओं को पार्टी चुनाव लड़ाएगी.

क्या बोले थे प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला 

दिल्ली स्थिति हरियाणा भवन में बराला ने कहा था कि विधानसभा चुनाव (Assembly Election) को लेकर चुनाव समिति की मैराथन बैठक हुई थी. प्रत्याशियों के नाम केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने फाइनल किए थे. जहां तक सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के बेटे-बेटी को टिकट दिए जाने का सवाल है तो केंद्रीय नेतृत्व पहले ही साफ कर चुका था, कि किसी भी विधायक और सांसद के परिवार में टिकट नहीं दी जाएगी. इसी तरह जो नेता 75 साल से अधिक उम्र के हैं, उन्हें भी टिकट नहीं मिलेगा.

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केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत का अहीरवाल में चलता है सिक्का (File Photo)


दोनों मंत्री (कृष्णपाल गुर्जर और राव इंद्रजीत) अंत तक अपने परिवार के लिए टिकट की जंग लड़ रहे थे लेकिन पार्टी ने गुर्जर के बेटे की बजाय तिगांव से बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता राजेश नागर को लड़ाने का फैसला किया है. दूसरी ओर रेवाड़ी से आरती राव को टिकट न देकर सुनील मुसेपुर को मैदान में उतारा गया है. दरअसल बीजेपी को लग रहा था कि यदि उसने परिवारवाद किया ताे कांग्रेस उसे इस मुद्दे पर घेरेगी. बीजेपी खुद कांग्रेस के परिवारवाद पर सवाल उठाते रही है.

दोनों नेताओं को ऐसे किया गया राजी!

केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर अपने बेटे देवेंद्र चौधरी को भले ही टिकट नहीं दिला पाए, लेकिन उन्होंने पार्टी में मौजूदा समय के धुर विरोधी विपुल गोयल का टिकट कटवा दिया, जबकि विपुल मंत्री थे. इससे पार्टी ने उनका गुस्सा ठंडा करने की कोशिश की है. इसी तरह केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह भले ही अपनी बेटी आरती राव को टिकट नहीं दिला पाए लेकिन बीजेपी में अपने धुर विरोधी राव नरबीर सिंह की टिकट कटवा दी है. राव मनोहरलाल सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री रहे हैं.
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First published: October 3, 2019, 10:59 AM IST
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