लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा की चुनावी जंग जीतने के लिए बीजेपी ने बनाई ये रणनीति!

हरियाणा: बीजेपी ने ज्यादातर सीटों पर गैर जाट कार्ड खेला है, सभी दस सीटों का चुनावी विश्लेषण, किस सीट पर क्या है समीकरण!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: May 8, 2019, 12:45 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा की चुनावी जंग जीतने के लिए बीजेपी ने बनाई ये रणनीति!
हरियाणा फतह के लिए बीजेपी ने अपना पुराना दांव चला है!
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: May 8, 2019, 12:45 PM IST
हरियाणा की सभी 10 सीटों पर 12 मई को वोटिंग होगी. यहां के राजनीतिक ‘कुरुक्षेत्र’ का महाभारत जीतने के लिए बीजेपी, कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी-आप और लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी-बसपा गठबंधन ने जातियों के हिसाब से टिकटों का वितरण किया है. जीतने के लिए जो जाल बिछाया गया है उसमें जाट बनाम गैर जाट का फार्मूला साफ दिख रहा है. बीजेपी ने ज्यादातर सीटों पर गैर जाट नेताओं पर दांव लगाया है. जहां बहुत मजबूरी थी वहीं पर उसने जाट को टिकट दिया है. बीजेपी ने जींद उप चुनाव का फार्मूला अपनाते हुए जाटों के गढ़ में गैर जाट प्रत्याशी उतारकर लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है. यहां की किस सीट पर कौन लड़ रहा है, उसका जातीय गणित क्या है? इसके लिए पढ़िए सभी सीटों का विश्लेषण.

रोहतक: जाटलैंड में बीजेपी ने अरविंद शर्मा के रूप में ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाकर गैर जाट कार्ड खेला है. जबकि कांग्रेस ने अपने मौजूदा सांसद दीपेंद्र हुड्डा को उतारा है. वो लगातार 10 साल हरियाणा के सीएम रहे भूपेंद्र हुड्डा के बेटे हैं. इनेलो ने धर्मवीर फौजी और जननायक जनता पार्टी-आप गठबंधन ने प्रदीप देशवाल पर भरोसा किया है. बीजेपी छोड़कर सभी ने जाट प्रत्याशी पर दांव लगाया है. ऐसे में यहां जाट वोट बंटेगा तो दीपेंद्र हुड्डा की राह इतनी आसान नहीं होगी. इस सीट पर अब तक दो उप चुनावों को मिलाकर 18 बार लोकसभा इलेक्शन हुए हैं. जिसमें से 11 बार कांग्रेस जीती है. यह हुड्डा परिवार की पारंपरिक सीट कही जा सकती है. दीपेंद्र हुड्डा यहां से तीन बार सांसद बने हैं. चार बार भूपेंद्र हुड्डा ने भी यहां का प्रतिनिधित्व किया. दीपेंद्र के दादा रणवीर सिंह हुड्डा भी यहां से दो बार सांसद बने. (ये भी पढ़ें: कांग्रेस ने क्या इसलिए काट दी रॉबर्ट वाड्रा के करीबी की लोकसभा टिकट!)



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सोनीपत: इस सीट पर भी बीजेपी ने गैर जाट कार्ड ही खेला है. पार्टी ने अपने मौजूदा सांसद रमेश कौशिक पर फिर भरोसा जताया है. लेकिन उनकी मुश्किल कांग्रेस ने बढ़ा दी है. कांग्रेस ने यहां भूपेंद्र सिंह हुड्डा को उतार दिया है जो रोहतक से चार बार सांसद रहे हैं. दो टर्म कांग्रेस से मुख्यमंत्री रहे हैं. यहां एक और बड़ा नाम हैं दिग्विजय चौटाला. जो अपनी नई नवेली पार्टी जननायक जनता पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं. उन्हें आम आदमी पार्टी का समर्थन है. इनेलो ने सुरेंद्र छिकारा को टिकट दी है. कुल मिलाकर बीजेपी को छोड़कर अन्य सभी महत्वपूर्ण दलों ने जाटों पर भरोसा किया है. बीजेपी को उम्मीद है कि गैर जाट वोटों के पोलराइजेशन से उसकी राह आसान हो सकती है.

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करनाल: सीएम सिटी करनाल में बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद आश्विनी कुमार को टिकट नहीं दी है. लेकिन फिर से पंजाबी कार्ड खेलते हुए संजय भाटिया को मैदान में उतारा है. इस सीट पर जीतना बीजेपी के लिए प्रतीकात्मक रूप से बहुत जरूरी है, क्योंकि सीएम मनोहरलाल खट्टर करनाल से विधायक हैं. कांग्रेस ने यहां ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए कुलदीप शर्मा को प्रत्याशी बनाया है. इस सीट पर पंजाबी और ब्राह्मण निर्णायक माने जाते हैं. इनेलो ने धर्मवीर पाढ़ा के रूप में जाट, जेजेपी-आप गठबंधन ने कृष्ण अग्रवाल के रूप में वैश्य और बीएसपी-लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के गठबंधन ने पंकज चौधरी के रूप में रोड़ जाति के प्रत्याशी पर भरोसा किया है. इस सीट पर एक उप चुनाव सहित अब तक 17 बार इलेक्शन हुए हैं. जिसमें से 11 बार कांग्रेस और तीन बार बीजेपी ने चुनाव जीता है. 1962 में इस सीट पी जनसंघ की टिकट पर रामेश्वरानंद जीते थे.

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कुरुक्षेत्र: इस ऐतिहासिक शहर की लोकसभा सीट पर अब तक 11 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं. जिसमें से चार बार कांग्रेस का कब्जा रहा है. यह सैनी जाति के प्रभाव वाली सीट मानी जाती है. तभी इस पर चार बार सैनी सांसद बने. 2014 में इस सीट से बीजेपी के राजकुमार सैनी जीतकर आए थे. लेकिन अब वो बीजेपी से बागी हो गए हैं. उन्होंने लोकतंत्र सुरक्षा नाम की पार्टी बनाकर बसपा से समझौता करके अपने प्रत्याशी उतारे हैं. लेकिन बीजेपी ने उनकी काट के लिए हरियाणा के श्रम एवं रोजगार मंत्री नायब सिंह सैनी को मैदान में उताकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. राजकुमार सैनी की पार्टी ने शशि सैनी को टिकट दी है. दूसरी ओर जननायक जनता पार्टी-आप गठबंधन ने जयभगवान शर्मा के रूप में ब्राह्मण कार्ड खेल दिया है. कांग्रेस ने निर्मल सिंह और इनेलो ने अर्जुन चौटाला के रूप में जाट प्रत्याशी उतारा है.

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भिवानी-महेंद्रगढ़: यह वो क्षेत्र है जहां से हरियाणा के तीन लालों में से एक बंसीलाल आते थे. यह सीट अभी बीजेपी के पास है. धर्मबीर सिंह मौजूदा सांसद हैं. बीजेपी ने उन पर फिर भरोसा किया है. जबकि कांग्रेस ने श्रुति चौधरी को उतारा है जो हरियाणा के सीएम रहे बंसीलाल पौत्री हैं. श्रुति 2009 में यहां से कांग्रेस की सांसद रह चुकी हैं. वो हरियाणा में कांग्रेस की बड़ी नेत्री किरण चौधरी की बेटी हैं. कांग्रेस और बीजेपी ने यहां जाट कार्ड खेला है तो इनेलो और जननायक जनता पार्टी-आप गठबंधन ने यादव. क्योंकि यहां जाट और यादव वोट निर्णायक हैं. इनेलो ने बलवान यादव को प्रत्याशी बनाया है. जननायक जनता पार्टी-आप गठबंधन की ओर से स्वाती यादव मैदान में हैं. वो अमेरिका से पढ़ाई करके लौटी हैं. वहां से उन्होंने ग्रेजुएशन और एमबीए किया है.

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हिसार: यह क्षेत्र कभी हरियाणा के तीन लालों में से एक भजनलाल का गढ़ हुआ करता था. यहां से दुष्यंत चौटाला मौजूदा सांसद हैं. 2014 में वो इनेलो की टिकट पर सांसद बने थे लेकिन परिवार में फूट पड़ी तो उन्होंने जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) बना ली. इसी की टिकट पर वो चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि 1998 बैच के आईएएस अधिकारी रहे बिजेंद्र सिंह को बीजेपी ने उतारा है. वो हरियाणा के बड़े जाट नेता और केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं. सबसे बड़ी नौकरी छोड़कर अपनी पारिवारिक विरासत को संभालने के लिए राजनीति में उतर गए हैं. इनेलो ने सुरेश कौथ को प्रत्याशी बनाया है. इस तरह बीजेपी, जेजेपी और इनेलो ने जाट पर भरोसा किया है. कांग्रेस ने यहां गैर जाट का दांव चलते हुए भव्य विश्नोई को मैदान में उतारा है. वो भजनलाल के पौत्र और पूर्व सांसद कुलदीप विश्नोई के बेटे हैं.

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फरीदाबाद: इस सीट पर अब तक 12 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं. जिसमें 6 बार कांग्रेस और चार बार बीजेपी को मौका मिला है. बीजेपी ने मौजूदा सांसद और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर पर फिर भरोसा जताया है. जबकि कृष्णपाल को जीत के लिए मोदी मैजिक और राष्ट्रवाद पर. शहरी वोटरों में उनकी पकड़ है. कांग्रेस ने यहां रॉबर्ट वाड्रा के नजदीकी ललित नागर की टिकट वापस लेकर पूर्व सांसद अवतार भड़ाना को मैदान में उतार दिया है. यहां दो गुर्जरों की लड़ाई है. लेकिन आम आदमी पार्टी ने नवीन जयहिंद के रूप में ब्राह्मण कार्ड और इनेलो ने महेंद्र चौहान के रूप में राजपूत कार्ड खेलकर बीजेपी की मुश्किल बढ़ा दी है. क्योंकि दोनों जातियां बीजेपी की वोटर मानी जाती हैं. इस पर बसपा ने जाट कार्ड खेलते हुए मनधीर मान को उतारा है. उन्हें राजकुमार सैनी की लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी का भी समर्थन है. फरीदाबाद सीट पर हरियाणा के पूर्व सीएम भजनलाल भी सांसद रह चुके हैं. यह सीट दिल्ली से लेकर मथुरा, यूपी बॉर्डर तक फैली हुई है.

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गुरुग्राम: इस सीट पर बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद राव इंद्रजीत सिंह को फिर मैदान में उतारा है्. वो केंद्र में मंत्री हैं. इससे पहले वो इसी सीट पर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीते थे. वो यूपीए गवर्नमेंट में भी मंत्री रह चुके हैं. यह सीट कभी महेंद्रगढ़-गुड़गांव कहलाती थी. उस पर राव 1998 और 2004 में कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं. उनके पिता राव बीरेंद्र सिंह तीन बार सांसद बने और हरियाणा के सीएम भी रहे हैं. ऐसे में बीजेपी ने राव इंद्रजीत को इस बार भी चुना. वो हरियाणा में यादवों के सबसे बड़े नेता हैं. यहां कांग्रेस ने भी यादव कार्ड ही चला है. उसने कैप्टन अजय यादव को मैदान में उतारा है, जो भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार में बिजली मंत्री रह चुके हैं. बसपा ने रईस अहमद और जन नायक जनता पार्टी ने महमूद खान के रूप में मुस्लिम कार्ड खेला है. इस लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम बहुल मेवात भी आता है.

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सिरसा: यह सुरक्षित सीट है. 2014 की मोदी लहर में भी इस सीट पर इनेलो के चरणजीत सिंह रोड़ी जीते थे. यह इनेलो खासतौर पर चौटाला परिवार का गढ़ माना जाता है. इस सीट पर आठ बार कांग्रेस के प्रत्याशी जीते हैं. इस सीट पर कांग्रेस की दलित नेत्री कुमारी शैलजा दो बार सांसद रही हैं. कांग्रेस ने इसी सीट से सांसद रह चुके अशोक तंवर को उतारा है. वो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं. राहुल गांधी के विश्वासपात्र माने जाते हैं. डेरा सच्चा सौदा यहीं पर है. ऐसे में उसका समर्थन लेने के लिए तंवर डेरे के दर पर भी गए. इनेलो ने चरणजीत सिंह रोड़ी को ही फिर मैदान में उतारा है. परिवार में बिखराव के बाद अब इनेलो अपना यह बचाने के लिए जूझ रही है. जननायक जनता पार्टी ने निर्मल सिंह उतारा है. बीजेपी ने इस सीट पर पूर्व आयकर अधिकारी एवं अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की चेयरमैन रहीं सुनीता दुग्गल को प्रत्याशी बनाया है. उनके पति राजेश दुग्गल आईपीएस हैं.

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अंबाला: यह सीट भी अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है. इस पर अब तक 16 बार चुनाव हुए हैं जिनमें से नौ बार कांग्रेस का सांसद बना है. बीजेपी ने भी यहां तीन बार बाजी मारी है. 1998 में यह सीट बसपा ने जीत ली थी. भारतीय जनसंघ ने भी इस पर खाता खोला था. बीजेपी ने यहां मौजूदा सांसद कटारिया को टिकट दिया है. जबकि कांग्रेस ने यहीं से पूर्व सांसद कुमारी शैलजा को उम्मीदवार बनाया है. शैलजा कांग्रेस शासन में केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं. वो यहां से 2004 और 2009 में सांसद थीं. तब उन्होंने रतनलाल कटारिया को ही हराया था. इस बार फिर उनका मुकाबला शैलजा से है. बीजेपी प्रत्याशी को यहां राष्ट्रवाद और मोदी मैजिक पर भरोसा है. यहां इनेलो को छोड़कर किसी भी दल ने वाल्मीकि समुदाय को टिकट नहीं दिया है. उसने रामपाल वाल्मीकि पर दांव लगाया है. बसपा और लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी गठबंधन ने नरेश सारन को उतारा है. सारन बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं.

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