घरों को रोशन और किसानों को धनी बना सकती है पराली

News18Hindi
Updated: November 15, 2017, 6:23 PM IST
घरों को रोशन और किसानों को धनी बना सकती है पराली
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के पीछे हरियाणा औऱ पंजाब के किसानों द्वारा जलाई जा रही पराली को माना जा रहा है.
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Updated: November 15, 2017, 6:23 PM IST
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के पीछे हरियाणा और पंजाब के किसानों द्वारा जलाई जा रही पराली को माना जा रहा है. किसानों का कहना है कि पराली जलाए जाने के अलावा उनके पास कोई और चारा नहीं है. लेकिन किसानों का एक वर्ग ऐसा भी है जो पराली को जलाता नहीं बल्की उसे बॉयोमास बेस्ड पावर प्लांट को दे रहा हैं.

10 साल पहले शुरु हुआ था सिलसिला

पंजाब में ऐसे 7 प्लांट हैं जिसके कारण इस साल लगभग ढाई लाख हेक्टेयर की पराली जलने से बच गई है. यह सिलसिला दस साल पहले मुक्तसर प्लांट में शुरु हुआ था और अब ये साल दर साल बढ़ता जा रहा है. पंजाब के होशियार जिले में ही 220 गांवों के किसान अपनी पराली को इस प्लांट को दे रहे हैं.



पराली से पैदा कर सकते हैं बिजली

पंजाब एनर्जी डेवलपमेंट अथॉरिटी (पेडा) के मुताबिक हर साल निकलने वाली 2 करोड़ टन पराली से बायोमास प्रोजेक्ट्स के माध्यम से 1000 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है. केवल 10 टन कृषि अवशेष से ही 3000 लीटर एथनॉल बनाया जा सकता है.

एथनॉल से निकलने वाली राख के भी फायदे

एथनाल से निकलने वाली राख से ईंटें और सीमेंट बना सकते हैं. इससे सिर्फ पराली और पॉल्यूशन की समस्या कम होगी बल्कि बिजली की किल्लत दूर होने के साथ-साथ प्रदेश के लाखों युवाओं को रोजगार भी मिल सकेगा. एक अनुमान के मुताबिक, अकेले मालवा बेल्ट के किसान ही पराली न जलाकर इसे बेचना शुरू कर दें तो 300 करोड़ से अधिक का फायदा हर साल कमा सकते हैं.



क्या है जानकारों का कहना

जानकारों का कहना है कि अगर सरकार पंजाब को पराली जलाने से मुक्त करना चाहती है तो मालवा में प्रत्‍येक 40 और माझा में प्रत्‍येक 50 किलोमीटर पर एक प्लांट लगाना चाहिए. पंजाब में ऐसे 40 प्लांटों की जरुरत है. इससे किसान पराली सीधे प्लांट पर दे सकते हैं.

प्लांटों की आमदनी में हुआ इजाफा

5 सालों में पंजाब में मौजूद इन 7 प्लांटों में पराली की आमदनी ढाई गुना तक बढ़ी है. हालांकि, ऐसा करने वाले किसानों की तादाद अभी बहुत कम है. इस साल सूबे में धान का कुल रकबा 29.72 लाख हेक्टेयर रहा. इससे कुल 200 लाख टन पराली हुई.
First published: November 15, 2017
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