पढ़ें, समाज को पूरी जिंदगी समर्पित करने वाली बलवंत देवी की कहानी
Chandigarh-City News in Hindi

पढ़ें, समाज को पूरी जिंदगी समर्पित करने वाली बलवंत देवी की कहानी
महिला दिवस के मौके पर अब बात उस महिला की, जिसने अपना सारा जीवन समाजसेवा में गुजार दिया। मेवात की रहने वाली बलवंत देवी देश की महिलाओं के लिए मिसाल हैं।

महिला दिवस के मौके पर अब बात उस महिला की, जिसने अपना सारा जीवन समाजसेवा में गुजार दिया। मेवात की रहने वाली बलवंत देवी देश की महिलाओं के लिए मिसाल हैं।

  • Share this:
महिला दिवस के मौके पर अब बात उस महिला की, जिसने अपना सारा जीवन समाजसेवा में गुजार दिया। मेवात की रहने वाली बलवंत देवी देश की महिलाओं के लिए मिसाल हैं।

बलवंत देवी का जन्म 1941 में पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ। इसके बाद 1948 में उनका पूरा परिवार भारत आ गया और पंजाब में रहने लगा। पंजाब से ही बलवंत ने पांचवीं तक पढ़ाई की। उसके बाद दिल्ली जाकर कस्तूरबा बालिका आश्रम से आठवीं तक शिक्षा ली।

इसके बाद बलवंत ने नौ महीने का बेसिक कोर्स किया, जिसे आज जेबीटी कहा जाता है। इसी दौरान 1953-53 तक बलवंत ने प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी विनोबा भावे के साथ बिहार की राजधानी पटना में काम किया।



बिहार से लौटने के बाद बलवंत देवी अपनी बहन जनक दुलारी के साथ मेवात आ गईं। यहां उन्होंने पाकिस्तान से आए मेव समुदाए के लोगों को घर बसाने में उनकी मदद की। उन्होंने मेव समुदाए की महिलाओं को कढ़ाई, सिलाई और बुनाई जैसे काम सिखाए।
75 साल की हो चुकी बलवंत ज्यादा बुजुर्ग होने के कारण आज ठीक से उठ बैठ नहीं पाती है। फिर भी अपना सारा काम खुद करती हैं। बलवंत देवी ने समाज की सेवा में अपनी सारी जिंदगी बसर कर दी।

इस पर उन्हें फक्र है, लेकिन इस बात का मलाल भी है कि सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया। स्‍थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को बलवंत देवी को समाज के सुधार और लोगों की सेवा के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए।

आप hindi.news18.com की खबरें पढ़ने के लिए हमें फेसबुक और टि्वटर पर फॉलो कर सकते हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज