भूपेंद्र सिंह हुड्डा बोले- किसानों की मांगों को स्वीकार करने के लिए केंद्र पर दबाव बनाए राज्य सरकार

उन्होंने कहा कि ऐसे में हरियाणा सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर दबाव बनाए.(फाइल फोटो)

उन्होंने कहा कि ऐसे में हरियाणा सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर दबाव बनाए.(फाइल फोटो)

कल खबर सामने आई थी कि कोरोना महामारी (Corona Epidemic) के बीच केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ हरियाणा के किसान एक बार फिर से आंदोलन की धार तेज करने में जुट गए हैं

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चंडीगढ़. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupendra Singh Hooda) ने शनिवार को राज्य सरकार से कहा कि वह किसानों की मांगें स्वीकार किए जाने के लिए केंद्र सरकार (central Government) पर दबाव बनाएं, ताकि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसान वापस घर लौट सकें. किसानों की मांग को ’’वैध’’ ठहराते हुए हुड्डा ने कहा, ’’ प्रदर्शनकारियों में हरियाणा (Haryana) के हजारों किसान भी शामिल हैं. ऐसे में हरियाणा सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर दबाव बनाए.’’

उन्होंने एक बयान में कहा, ’’ राज्य सरकार को किसानों की मांग स्वीकार किए जाने का दबाव केंद्र सरकार पर बनाना चाहिए ताकि उनकी घर वापसी का रास्ता साफ हो सके.’’ केंद्र से संवेदनशील रवैया अपनाने का अनुरोध करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि उसके उपेक्षा और कोविड महामारी के चलते आंदोलन के दौरान करीब 400 किसान अपनी जान गंवा चुके हैं. हुड्डा ने कहा कि कोविड-19 संकट काल के दौरान जब अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्र धराशायी हो गए थे, तब किसान ही थे जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को सहारा दिया.

 उसकी साजिश सफल नहीं होगी

वहीं, कल खबर सामने आई थी कि कोरोना महामारी के बीच केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ हरियाणा के किसान एक बार फिर से आंदोलन की धार तेज करने में जुट गए हैं. आज गोहाना से बड़ी संख्या में किसानों का जत्था दिल्ली बॉर्डर की तरफ रवाना हुआ. अपने साथ कई ट्रॉलियों में गेहूं व राशन के अन्य सामान लेकर रवाना होने वाले किसानों ने कहा कि जब तक सरकार तीन कृषि कानूनों को रद्द नहीं करती, उनका आंदोलन जारी रहेगा. किसानों ने कहा कि पुलिस उनपर कितने ही मामले क्यों न दर्ज करे, लेकिन वे आंदोलन से पीछे हटने वाले नहीं हैं. सरकार कोरोना के नाम पर किसानों का धरना समाप्त करवाना चाहती है, लेकिन उसकी साजिश सफल नहीं होगी.

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