किसानों से हाथ मिलाने की बजाय उनसे पंजा लड़ा रही खट्टर सरकार: हुड्डा

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा और जजपा को लेकर कही ये बात

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा और जजपा को लेकर कही ये बात

हुड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Prime Minister Crop Insurance Scheme) के तहत बीमा कंपनियों ने किसानों के 75 फीसदी से अधिक दावों को खारिज कर दिया है.

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चंडीगढ़. अपने सरकारी निवास पर पत्रकारों से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) ने कहा कि उपलब्धियों के नाम पर खट्टर सरकार के खाते में घोटाले, आंदोलन और हिंसा है. भाजपा (BJP) के साथ इस काम में जजपा भी सहयोगी बन गई है. जजपा को लोगों ने भाजपा के विरुद्ध वोट दिए थे, लेकिन अब वह भी भाजपा की हमसफर बनकर प्रदेश व किसान को बर्बादी के रास्ते पर लेकर जा रही है. हुड्डा ने कहा कि किसानों से आंख मिलाने की बजाए सरकार उन्हें आंख दिखा रही है. कृषि, शिक्षा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बिजली और मंहगाई के मामले में सरकार ने प्रदेश को रसातल में पहुंचा दिया है.

वहीं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक बार फिर भाजपा-जजपा गठबंधन पर जमकर हमले किए. हुड्डा ने मनोहरलाल सरकार से आधा दर्जन सवाल पूछे. हुड्डा ने कहा कि घोटाले और आंदोलन इस सरकार की पहचान बन गए हैं. यह सरकार किसानों से हाथ मिलाने की बजाय उनसे पंजा लड़ा रही है. अपनी विफलताओं को विपक्ष पर थोपने की इस सरकार की आदत बन चुकी है. भाजपा की सरकार बने छह साल से ज्यादा समय हो गया, लेकिन अभी तक सरकार एक भी उपलब्धि हासिल नहीं कर सकी और इसका दोष वह कांग्रेस के सिर मढ़ने में देरी नहीं लगाती.

प्रदेश पर कर्ज में इजाफा हो रहा

हुड्डा ने कहा कि मौजूदा सरकार हरियाणा की जनता को बहुत महंगी पड़ रही है. लगातार पेट्रोल, डीजल, गैस और बिजली के दाम बढ़ रहे हैं. स्टांप ड्यूटी, किसानों की लागत और प्रदेश पर कर्ज में इजाफा हो रहा है. भाजपा को आत्ममंथन करना चाहिए कि दो साल पहले हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटें जीतने वाली पार्टी के नेता आज जनता के बीच क्यों नहीं जा पा रहे हैं.
सरकार का रवैया पूरी तरह नकारात्मक

हुड्डा ने कहा कि किसानों के प्रति सरकार का रवैया पूरी तरह नकारात्मक है. तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पहले से आंदोलनरत किसानों को सरकार अब मंडियों में परेशान कर रही है. रजिस्ट्रेशन, नमी, मिश्रण और मैसेज का बहाना बनाकर गेहूं की खरीद में देरी की जा रही है.
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