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पूर्व सीएम हुड्डा बोले- खट्टर सरकार खो चुकी लोगों का विश्वास, लाएंगे अविश्वास प्रस्ताव

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि आंदोलनरत किसानों की मांगे पूरी तरह जायज़ हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि आंदोलनरत किसानों की मांगे पूरी तरह जायज़ हैं.

भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder singh hooda) ने कहा कि सरकार को समर्थन देने वाले कई विधायक समर्थन वापस ले चुके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2021, 7:25 AM IST
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चंडीगढ़. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) ने खट्टर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि  इस सरकार ने लोगों का विश्वास खो दिया है, इसलिए हम अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएंगे. हुड्डा ने कहा कि सरकार के गठबंधन सहयोगी के विधायक ही कह रहे हैं कि यह सबसे भ्रष्ट सरकार है. वहीं हुड्डा ने बताया कि सरकार को समर्थन देने वाले दो निर्दलीय विधायकों (Independent MLA's) ने अपना समर्थन वापस ले लिया है.

वहीं किसान आंदोलन पर हुड्डा ने कहा कि किसान घरों से बाहर है जिससे देश का नुक्सान होगा. उन्होंने कहा कि फसल उगाता किसान है लेकिन खाता पूरा देश है. केंद्र सरकार को आगे आकर आंदोलन को खत्म करना चाहिए. सरकार को वार्ता की प्रक्रिया शुरू करने की पहल करनी चाहिए और किसानों की मांगें मान लेनी चाहिए.

वहीं उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार दावा करती है कि वह हरियाणा के लोगों को निजी क्षेत्र की नौकरियों में भी 75 प्रतिशत आरक्षण देगी लेकिन सरकार अन्य भर्तियों में स्थानीय युवाओं के बजाए बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों के लोगों को नौकरियां दे रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की नीतियों के कारण रोजगार के अवसर पैदा नहीं हो रहे.



पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों पर कही ये बात
हुड्डा ने कहा कि राजस्व हासिल करने के लिए प्रदेश सरकार लगातार पेट्रोल-डीज़ल पर वैट बढ़ाने में लगी है. हुड्डा ने याद दिलाया कि उनके कार्यकाल के दौरान हरियाणा में डीजल सबसे सस्ता था, क्योंकि उसपर वैट की दर सिर्फ 9.2 प्रतिशत थी. लेकिन अब वो लगभग डबल हो चुकी है. सरकार को लोगों की परेशानी समझनी चाहिए और उसे महंगाई बढ़ाने की बजाए घोटालों पर नकेल कसनी चाहिए.

एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करे सरकार

उन्होंने कहा कि नंवबर 2020 में ज़हरीली शराब पीने से 40-50 लोगों की मौत हो गई थी. प्रदेश में बड़ा शराब घोटाला सामने आया था. एसआईटी ने इसकी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है लेकिन सरकार उसे सार्वजनिक करने को तैयार नहीं है. इसी तरह रजिस्ट्री घोटाले की रिपोर्ट को भी सरकार अलमारी में दबाकर बैठ गई है.
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