हरियाणा: बीज विकास निगम में बड़ा घोटाला, CM खट्टर ने दिए विजिलेंस जांच के आदेश

सीएम मनोहर लाल खट्टर ने जांच के आदेश दे दिए हैं.(फाइल फोटो)

Scam in Haryana Seed Development Corporation: घोटाले में शामिल यह लोग राजस्थान और उत्तर प्रदेश से सस्ते दामों पर बीज खरीद कर निगम और दूसरी एजेंसी को सप्लाई कर रहे थे.

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    मनोज कुमार

    चंडीगढ़. हरियाणा बीज विकास निगम में बड़ा घोटाला (Big scam in Seed Development Corporation) सामने आया है. बीज विकास निगम के माध्यम से बीज का उत्पादन करने वाले कथित किसानों (Farmers) ने ये घोटाला किया. महज कुछ एकड़ जमीन रखने वाले लोगों ने सैकड़ों एकड़ जमीन पर बीज का उत्पादन दिखाकर बीज विकास निगम को लाखों रुपए का चूना लगाया. इस मामले में निगम के एक निदेशक और पूर्व निदेशक की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है. मुख्यमंत्री मनोहर लाल (CM Manohar Lal) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस जांच (Vigilance Investigation) के आदेश दिए. मुख्यमंत्री ने 1 महीने में जांच करके रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं.

    हरियाणा बीज विकास निगम को मिली शिकायत में पाया गया है कि निगम के एक मौजूदा निदेशक ने जींद के गिल्लाखेड़ा गावं में 60 एकड़ जमीन पर बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत बीज का उत्पादन दिखाया. इसके अलावा करीब 13 एकड़ जमीन पर अपनी पत्नी के नाम कृषकों के लिए और 10 एकड़ जमीन पर अपने बेटे के नाम पर आईएफएफडीसी के लिए बीज का उत्पादन दिखाया, जबकि इस गांव में इस निदेशक या उसके परिवार के नाम पर कोई जमीन नहीं है.

    सैकड़ों एकड़ फर्जी जमीन दिखा किया घोटाला
    इसी प्रकार बीज विकास निगम के पूर्व निदेशक में भी 315 एकड़ जमीन पर बीज उत्पादन कार्यक्रम दिखाया. लेकिन उसके और उसके परिवार के नाम पर सिर्फ 65 एकड़ जमीन ही पाई गई. घोटाले में शामिल यह लोग राजस्थान और उत्तर प्रदेश से सस्ते दामों पर बीज खरीद कर निगम और दूसरी एजेंसी को सप्लाई कर रहे थे. बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत बीज विकास निगम और दूसरी एजेंसी एमएसपी पर 400 प्रति क्विंटल ज्यादा कीमत देती हैं, जबकि दालों के बीज और खरीफ फसलों के लिए एमएसपी से 30 गुना ज्यादा कीमत बीज उत्पादकों को दी जाती है.

    घटिया बीज की सप्लाई
    घोटाले में शामिल लोग न केवल बीज विकास निगम को चूना लगा रहे थे, बल्कि घटिया बीज की सप्लाई भी निगम को कर रहे थे. इस घटिया बीज को बीज विकास निगम सर्टिफाई भी कर रहा था. सर्टिफाई बीज को दूसरे किसान हाइब्रिड बीज समझकर खरीद रहे थे. लेकिन उनकी पैदावार बढ़ने की बजाय और घट गई. इस मामले में निगम के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है. उनकी भूमिका की जांच भी की जा रही है. इस घोटाले में कई बड़ी मछलियों के फंसने के आसार हैं.

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