बांगड़ की धरती से अमित शाह ने किया 2019 के चुनाव का शंखनाद

जींद रैली में अमित शाह ने जहां कई योजनाओं का बखान किया. वहीं भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे को लेकर मनोहर सरकार की पीठ भी थपथपाई. अमित शाह के इस दौरे के मायने निकालें तो ये माना जा सकता है कि अमित शाह ने बांगड़ की धरती से 2019 के चुनाव की शंखनाद कर दिया है.

Mukesh Rajput | News18Hindi
Updated: February 15, 2018, 6:25 PM IST
बांगड़ की धरती से अमित शाह ने किया 2019 के चुनाव का शंखनाद
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह
Mukesh Rajput | News18Hindi
Updated: February 15, 2018, 6:25 PM IST
भारतीय जनता पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने हरियाणा में युवा हुंकार रैली की. दावे के मुताबिक एक लाख मोटरसाइकिल पर रैली निकालकर शक्ति प्रदर्शन भी किया. अमित शाह हेलीपैड से बाइक पर सवार होकर रैली स्थल तक पहुंचे. अमित शाह ने हरियाणा की अवाम को ये एहसास दिलाने की कोशिश की कि प्रदेश के इतिहास में मनोहर सरकार से अच्छी सरकार नहीं आई.

अमित शाह ने जहां कई योजनाओं का बखान किया. वहीं भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे को लेकर मनोहर सरकार की पीठ भी थपथपाई. अमित शाह के इस दौरे के मायने निकालें तो ये माना जा सकता है कि अमित शाह ने बांगड़ की धरती से 2019 के चुनाव का शंखनाद कर दिया है.

चुनाव में बेशक थोड़ा वक्त हो लेकिन अभी से ही बिसात बिछाने की कवायद तेज की जा रही है और इस कड़ी में भारतीय जनता पार्टी सबसे आगे निकल गई है. जींद में रैली करने के मायने निकालें तो इसके कई पहलू हैं. सबसे अहम बात ये है कि बीजेपी की ओर से जाटों को साधऩे की कवायद की जा रही है, क्योंकि हरियाणा में सत्ता का रास्ता जाट समुदाय से ही होकर गुजरता है.

करीब 25 फीसदी जाट आबादी वाले हरियाणा में एक बार फिर बीजेपी जाट समुदाय को अपने खेमे में लाना चाहती है. लेकिन जाट समुदाय को साधने की राह बीजेपी के लिए आसान नहीं है. क्योंकि जाट आरक्षण का मसला अभी अधऱ में है.

इतना ही नहीं अमित शाह की रैली से पहले सरकार और जाट समुदाय के बीच तनातनी को भी देखने को मिली थी. जाटों ने रैली को देखते हुए हिंसक आंदोलन में दर्ज मामलों को वापस लेकर सरकार पर दबाव बनाया. लिहाजा अभी इस स्थिति में ये कहना अभी मुश्किल होगा कि 2019 में भी बीजेपी को जाटों का साथ मिलेगा.

जींद में रैली करने का एक और पहलू ये भी है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राज में सबसे ज्यादा उपेक्षा अगर किसी जिले की हुई थी तो वो जींद था. यही वजह है कि साल 2005 में जिले की पांचों सीटें जीतने वाली कांग्रेस को 2009 में पांचों सीटों पर मुंह की खानी पड़ी.

जींद में रैली की और एक वजह ये भी है कि जींद प्रदेश का ऐसा जिला है जो तीन लोकसभा क्षेत्रों को छूता है. यानि जींद जिले के विधानसभा क्षेत्र सोनीपत, हिसार, और सिरसा लोकसभा क्षेत्र में आते हैं और जींद के रास्ते से इऩ जिलों में पैंठ मजबूत की जा सकती है. चूंकि जीटी रोड बेल्ट और अहीरवाल में बीजेपी मजबूत स्थिति में है. लिहाजा बीजेपी के सामने यहां से आगे निकलकर सिरसा, हिसार, भिवानी, कैथल और फतेहाबाद में ज़मीन तैयार करने की चुनौती है और इऩ जिलों का रास्ता जींद से होकर ही जाता है.

जींद में रैली करने के मायने ये भी हैं कि जींद हरियाणा का केंद्र बिंदू है यानि प्रदेश के बाकी जिलों कों की कमोवेश यहां से बराबर दूरी पर है जिससे यहां प्रदेश के हर हिस्से के लोग आ सकते हैं और भीड़ जुटाने या फिर शक्ति प्रदर्शन के लिहाज से जींद हरियाणा का सबसे बेहतर इलाका है.

अमित शाह की रैली के लिए जींद चुनने के पीछे ये भी एक वजह है. बता दें कि मिशन 2014 के लिए नरेंद्र मोदी ने रेवाड़ी से सितंबर 2013 में चुनावी शंखनाद की थी और पूर्व सैनिकों को साधने की कवायद की थी. चूंकि दक्षिण हरियाणा में पूर्व सैनिकों की संख्या सबसे ज्यादा था और हुड्डा राज में दक्षिण हरियाणा हासिये पर रहा था. इसलिए 2014 के मिशन की शुरूआत रेवाड़ी से की गई थी और 2014 में मोदी का मैजिक ऐसा चला था कि ना सिर्फ लोकसभा चुनाव में अच्छे-अच्छे किले ढह गये थे बल्कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर पहली बार अकेले दम पर सत्ता हासिल की थी.

हालांकि इस बार अमित शाह का जादू कितना चलेगा इसके लिए लंबा इंतज़ार करना होगा. बहरहाल कुल मिलाकर जनता को रिझाने के लिए अमित शाह चुनावी भाषण दे गये.
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