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आरक्षण रद्द होने से जाटों में रोष, समुदाय से जुड़े नेता कर रहे बैठक

आरक्षण रद्द होने से जाटों में रोष, समुदाय से जुड़े नेता कर रहे बैठक

सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र से जाट समुदाय का आरक्षण समाप्त करने के बाद से जाटों में काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है। जाट समुदाय से जुड़े नेता लगातार बैठक करके आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे है। इसी कड़ी में बुधवार को हिसार की जाट धर्मशाला में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश स्तरीय बैठक ली। बैठक में प्रत्येक जिला से समिति के पदाधिकारियों ने शिरक्त की।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र से जाट समुदाय का आरक्षण समाप्त करने के बाद से जाटों में काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है। जाट समुदाय से जुड़े नेता लगातार बैठक करके आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे है। इसी कड़ी में बुधवार को हिसार की जाट धर्मशाला में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश स्तरीय बैठक ली। बैठक में प्रत्येक जिला से समिति के पदाधिकारियों ने शिरक्त की।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र से जाट समुदाय का आरक्षण समाप्त करने के बाद से जाटों में काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है। जाट समुदाय से जुड़े नेता लगातार बैठक करके आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे है। इसी कड़ी में बुधवार को हिसार की जाट धर्मशाला में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश स्तरीय बैठक ली। बैठक में प्रत्येक जिला से समिति के पदाधिकारियों ने शिरक्त की।

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र से जाट समुदाय का आरक्षण समाप्त करने के बाद से जाटों में काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है। जाट समुदाय से जुड़े नेता लगातार बैठक करके आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे है। इसी कड़ी में बुधवार को हिसार की जाट धर्मशाला में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश स्तरीय बैठक ली। बैठक में प्रत्येक जिला से समिति के पदाधिकारियों ने शिरक्त की।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि जाट आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया निर्णय समुदाय के लिए काफी परेशानी भरा है।

उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रिय मंत्री कुमारी शैलजा के इशारे पर गलत रिपोर्ट तैयार करके सुप्रीम कोर्ट को दी गई, क्योंकि कुमारी शैलजा शुरू से ही जाटों को आरक्षण दिए जाने के विरोध में थी। ऐसे में उन्होंने सोची-समझी रणनीति के अनुसार नेशनल बैकवर्ड कमीशन(एनसीबीसी) में अपने चहतों की नियुक्ति करवाई और उनसे जाट आरक्षण के खिलाफ रिपोर्ट तैयार करवाई।

केंद्र सरकार ने कमीशन की रिपोर्ट ज्यों की त्यों सुप्रीम कोर्ट में रखी, इसके चलते जाटों का आरक्षण कोर्ट ने निरस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को एनसीबीसी के सदस्यों पर गलत रिपोर्ट भेजने पर उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

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